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धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी….

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विविधीकरण तथा कृषि आधारित सहायक आजीविका गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य गतिविधियों को अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जशपुर जिले के ग्राम सोगड़ा निवासी प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती संजीता एक्का इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन को अपनाकर अपने परिवार के लिए आय के नए अवसर विकसित किए हैं।

सीमित आमदनी से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

श्रीमती संजीता एक्का अपने पति श्री ईश्वर राम एक्का के साथ मिलकर खेती-किसानी और विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। पहले उनका परिवार मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती पर निर्भर था। खेती से होने वाली सीमित आमदनी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने आय के वैकल्पिक साधनों की तलाश शुरू की।

संजीता ने पारंपरिक खेती के साथ सबसे पहले मत्स्य पालन को अपनाया। इस गतिविधि से बेहतर लाभ मिलने पर उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने बत्तख पालन तथा सुकर पालन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया। आज वे खेती के साथ इन सहायक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं, जिससे परिवार की आय के स्रोतों में विविधता आई है और केवल एक फसल पर निर्भरता कम हुई है।

मत्स्य पालन से मिली नई दिशा, बत्तख और सुकर पालन ने बढ़ाए आय के अवसर

श्रीमती संजीता एक्का बताती हैं कि पहले वे अपने पति के साथ केवल धान की खेती करती थीं, लेकिन इससे अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता था। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें धान की खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने लगा। इस अनुभव ने उन्हें कृषि आधारित अन्य व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मत्स्य पालन के साथ बत्तख और सुकर पालन शुरू करने से उनकी आजीविका को नया आधार मिला है। अलग-अलग गतिविधियों से आय अर्जित करने के अवसर बढ़ने के साथ खेती में होने वाले मौसमी उतार-चढ़ाव पर निर्भरता भी कम हुई है। संजीता का मानना है कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी भूमि, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सहायक व्यवसाय भी अपनाने चाहिए।

धान के बाद आलू और गेहूं की खेती, लीची की बागवानी से भविष्य की तैयारी

संजीता एक्का ने खेती में फसल विविधीकरण को भी विशेष महत्व दिया है। वे बरसात के मौसम में धान की खेती करती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में आलू और गेहूं जैसी फसलों का उत्पादन करती हैं। इससे कृषि भूमि का अलग-अलग मौसम में बेहतर उपयोग हो रहा है और अतिरिक्त आमदनी की संभावनाएं बढ़ी हैं।

 धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

इसके साथ ही उन्होंने अपने खेत में लीची के पौधे लगाकर बागवानी की भी शुरुआत की है। लीची के पौधे भविष्य में फल उत्पादन से अतिरिक्त आय का साधन बन सकते हैं। वहीं, पौधरोपण से मिट्टी के कटाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।संजीता का मानना है कि खेती में नए प्रयोग और विविध फसलों को अपनाना किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कृषि, पशुपालन और बागवानी को साथ लेकर चलने से उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

सोलर फेंसिंग से खेती की सुरक्षा, आधुनिक तकनीक का भी कर रहीं उपयोग

कृषि गतिविधियों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए संजीता एक्का ने अपने खेत के पास सोलर फेंसिंग भी लगवाई है। इससे फसलों की सुरक्षा में मदद मिल रही है। खेती में आधुनिक तकनीक और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर वे कृषि कार्यों को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।

शासन की विभिन्न योजनाओं और जिला प्रशासन से मिले सहयोग का लाभ उठाकर वे मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और फसल विविधीकरण जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार, अन्य किसानों को भी कर रहीं प्रेरित

श्रीमती संजीता एक्का ने अपनी प्रगति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं से किसानों को खेती के साथ अन्य आजीविका गतिविधियां अपनाने में सहयोग मिल रहा है। वे अपने अनुभवों के आधार पर गांव के अन्य किसानों को भी धान की खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि किसान यदि अपनी परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप खेती में बदलाव लाएं, तो आय के नए साधन विकसित कर सकते हैं।

महिला सशक्तीकरण और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रेरक मिसाल

संजीता एक्का की सफलता यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार और विविधीकरण अपनाकर ग्रामीण परिवार आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर न केवल पारंपरिक खेती के स्वरूप में बदलाव किया है, बल्कि मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और बागवानी को जोड़कर आजीविका का एक विविधतापूर्ण मॉडल भी विकसित किया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। संजीता एक्का जैसी प्रगतिशील महिला किसानों की पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण है।

आज संजीता एक्का की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि नई सोच और मेहनत से अपनी आजीविका को मजबूत बनाने वाली महिला के रूप में हो रही है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि खेती में बदलाव की पहल छोटे स्तर से भी की जा सकती है। दृढ़ संकल्प, मेहनत और योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की खुशहाली के साथ गांव की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में साकार हो रहे गरीब परिवारों के पक्के आवास के सपने, जयानंदन दास को मिला सुरक्षित आशियाना….

रायपुर: हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसके सिर पर अपनी पक्की छत हो, जहां वह परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके। आर्थिक अभाव के कारण अनेक जरूरतमंद परिवारों के लिए यह सपना वर्षों तक अधूरा रह जाता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ऐसे ही परिवारों के सपनों को साकार कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटया निवासी जयानंदन दास का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना साकार हुआ है। कभी मिट्टी के कच्चे मकान में अनेक परेशानियों के बीच जीवन गुजारने वाले जयानंदन दास आज अपने पक्के आवास में परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

कच्चे मकान में हर बरसात बन जाती थी चुनौती

जयानंदन दास बताते हैं कि पहले उनका परिवार मिट्टी के कच्चे मकान में रहता था। बरसात का मौसम आते ही परेशानियां बढ़ जाती थीं। छत से पानी टपकने, दीवारों में सीलन और मकान के क्षतिग्रस्त होने का डर हमेशा बना रहता था। घर में चूहों की समस्या भी परेशान करती थी। बारिश के दौरान घर और घरेलू सामान को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होती थी। कभी मकान की टूट-फूट तो कभी मरम्मत की जरूरत के कारण परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के कारण पक्का मकान बनवाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था, लेकिन बेहतर और सुरक्षित घर की उम्मीद उन्होंने कभी नहीं छोड़ी।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से उनकी यह उम्मीद हकीकत में बदल गई। योजना के तहत आवास का लाभ मिलने के बाद उन्होंने अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा कर लिया है। अब उनका परिवार मजबूत छत के नीचे सुरक्षित महसूस करता है। बरसात में पानी टपकने, सीलन और बार-बार मरम्मत कराने जैसी परेशानियों से उन्हें राहत मिली है। जयानंदन दास के लिए यह आवास केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि वर्षों की कठिनाइयों से मुक्ति और बेहतर भविष्य की नई शुरुआत है।

पक्का घर मिलने से लौटी खुशियां, मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद

अपने पक्के आवास को लेकर जयानंदन दास बेहद खुश हैं। वे स्थानीय बोली में अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहते हैं, “पहिली मिट्टी के घर रहिस सर, बहुत समस्या रहिस। बरखा पानी म परेशानी होवत रहिस, चूहे घर मन घलो दिक्कत रहिस। अब पक्का घर बन गे हे, पानी ले बचत हन, अब मरम्मत के चिंता नइ हे। प्रधानमंत्री आवास योजना ले मोला आवास मिलिस हे, एकर बर विष्णु भईया ला बहुत-बहुत धन्यवाद।”
जयानंदन दास बताते हैं कि पक्का मकान बनने से उनके परिवार की वर्षों पुरानी चिंता दूर हो गई है। अब बारिश के मौसम में पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि गांव के अन्य पात्र परिवारों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है और उनके पक्के घर बन रहे हैं। उन्होंने इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा सुरक्षित जीवन का आधार

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन के लिए स्थायी आधार प्रदान करना भी है। पक्के मकान मिलने से परिवारों को मौसम की मार, असुरक्षित आवास और बार-बार मरम्मत की परेशानियों से राहत मिल रही है।

सरगुजा जिले के जयानंदन दास की सफलता की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। कभी बरसात में टपकती छत और मिट्टी की दीवारों के बीच जीवन गुजारने वाला उनका परिवार आज अपने पक्के घर में सुकून से रह रहा है। उनके चेहरे की खुशी और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त आभार इस बात को दर्शाते हैं कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं किस तरह जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। जयानंदन दास का पक्का आशियाना सुरक्षित जीवन, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीदों का नया आधार बन गया है।

चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी वर्षा की गतिविधियां, किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी….

रायपुर: द क्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से विकसित हो रही चक्रवाती परिस्थितियों का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 28 एवं 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को फसलों, सब्जियों, फलदार पौधों और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

पूर्वानुमान के अनुसार 27 अक्टूबर को प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां अधिक रहने की संभावना है। 28 एवं 29 अक्टूबर को सभी जिलों में वर्षा का पूर्वानुमान है। वर्षा के कारण रात के तापमान में वृद्धि होने से आगामी कुछ दिनों तक ठंड का प्रभाव कम रहने की संभावना है।

मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई अगले दो से तीन दिनों तक टालें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं तथा खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करें। फसलों में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार करें। तिवरा एवं अलसी की उत्तेरा फसल लेने वाले किसान फिलहाल बुवाई स्थगित रखें। रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।

सब्जियों एवं फलदार पौधों की सुरक्षा के लिए भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तेज हवा और वर्षा की संभावना को देखते हुए लौकी, करेला जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा देने की व्यवस्था करें तथा जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस से सहारा दें। रबी मौसम की सब्जियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करने की सलाह दी गई है।

वहीं पशुपालक अपने पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थानों पर रखें, उनके लिए चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा वज्रपात की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें। किसानों से अपील की गई है कि वे आगामी दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और खेतों में जल निकासी सहित फसलों एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए समय रहते आवश्यक प्रबंध करें।

सात दिनों में सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को पूरा करना होगा जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया…..

रायपुर: सरगुजा संभाग में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान और पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संभाग के सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम को सात दिनों के भीतर जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सभी स्वास्थ्य संस्थानों को नियमानुसार प्राधिकार (ऑथराइजेशन) प्राप्त करने के साथ ही अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) से संबद्धता सुनिश्चित करनी होगी। सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने आज अंबिकापुर में आयोजित अंतरविभागीय बैठक में इस संबंध में सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का उल्लंघन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

संभागायुक्त श्री दुग्गा ने कमिश्नर कार्यालय में आयोजित बैठक में संभाग के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को निर्देशित किया कि शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सुरक्षित संग्रहण एवं वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने दिए सख्त निर्देश, नियमों का उल्लंघन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों पर होगी कार्रवाई

संभागायुक्त ने सभी सीएमएचओ को अपने-अपने जिलों के शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन में पाई जाने वाली कमियों को तत्काल दूर कराया जाए। निर्धारित नियमों और प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सात दिनों के भीतर सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों की आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराने और निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करने को कहा।

बैठक में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के नियमित संग्रहण एवं निष्पादन की व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। संभागायुक्त श्री दुग्गा ने अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी से संबंधित देयकों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भुगतान में विलंब के कारण अपशिष्ट संग्रहण एवं निष्पादन की व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम और आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सभी संबंधित विभाग और स्वास्थ्य संस्थान आपसी समन्वय से कार्य करें।

बैठक में कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रतिनिधि, उपायुक्त (विकास) श्री आर.के. खुटे, संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ. कपिलदेव पैकरा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम हेल्पलाइन 1076 से जय को मिली राहत, जन्म प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि हुई दूर….

रायपुर: सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान और शासकीय सेवाओं को सुलभ बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ओटेबंद निवासी श्री जय कुमार गायकवाड़ को जन्म प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि सुधारने के लिए दर्ज शिकायत पर राहत मिली है। ग्राम पंचायत द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई कर उन्हें संशोधित जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया।

तहसील अहिवारा अंतर्गत ग्राम ओटेबंद निवासी श्री जय कुमार गायकवाड़ अपने जन्म प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि के कारण परेशान थे। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संबंधित ग्राम पंचायत तक पहुंचने के बाद नाम सुधार की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। आवेदक द्वारा प्रस्तुत आवेदन, शपथ पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

दस्तावेजों के आधार पर जारी हुआ संशोधित जन्म प्रमाण पत्र

ग्राम पंचायत द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत 19 अगस्त 2025 को संशोधित जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर आवेदक को उपलब्ध कराया गया। प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि दूर होने से श्री गायकवाड़ को राहत मिली। अब वे शासकीय एवं अन्य आवश्यक कार्यों में संशोधित प्रमाण पत्र का उपयोग कर सकेंगे।

आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण का सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 नागरिकों को अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचाने की सुविधा प्रदान कर रही है। प्राप्त शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई कर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। श्री जय कुमार गायकवाड़ की समस्या का निराकरण इसका एक उदाहरण है। जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान, शासकीय सेवाओं में पारदर्शिता और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से राहत दिलाना राज्य शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

*झारखंड से अवैध धान परिवहन करते दो पिकअप जब्त, दुलदुला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, तत्परता से पकड़ा गया अवैध धान परिवहन,मंडी निरीक्षक को प्रकरण तैयार करने के दिए निर्देश….*

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*झारखंड से अवैध धान परिवहन करते दो पिकअप जब्त, दुलदुला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, तत्परता से पकड़ा गया अवैध धान परिवहन,मंडी निरीक्षक को प्रकरण तैयार करने के दिए निर्देश..*

जशपुरनगर, 25 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशन में जिले में अवैध धान परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

इसी कड़ी में दुलदुला तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक टीम ने कार्रवाई करते हुए झारखंड से अवैध रूप से धान का परिवहन कर रहे दो पिकअप वाहनों को जब्त किया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तहसीलदार दुलदुला श्री राहुल कौशिक तथा खाद्य निरीक्षक श्री संदीप गुप्ता की तत्परता से 24 अक्टूबर की रात यह कार्रवाई की गई। दोनों पिकअप वाहनों में झारखंड के कुरडेग से धान लोड कर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर चराईमारा की ओर ले जाया जा रहा था।

जांच के दौरान धान परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं पाए गए।

प्रशासनिक टीम ने दोनों पिकअप वाहनों सहित धान को जब्त कर थाना दुलदुला के सुपुर्द कर दिया है।

वहींमामले में आवश्यक कार्रवाई एवं प्रकरण तैयार करने के लिए मंडी निरीक्षक को सूचित किया गया है।

अवैध धान परिवहन पर प्रशासन की पैनी नजर

दुलदुला तहसील झारखंड की सीमा से लगा हुआ है। धान खरीदी के सीजन में दूसरे राज्यों से अवैध रूप से धान लाकर छत्तीसगढ़ में खपाने की आशंका को देखते हुए जिला एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा निगरानी बढ़ाई जा रही है। सघन जांच अभियान के माध्यम से ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।

जिला प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध धान परिवहन करने वालों पर निगरानी और सख्त हुई है। प्रशासन ने धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने तथा अवैध परिवहन पर रोक लगाने के लिए जांच अभियान जारी रखने की दिशा में कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से प्रदेश के श्रद्धालुओं को मिल रहा निःशुल्क तीर्थ दर्शन का अवसर….

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को प्रमुख तीर्थस्थलों के निःशुल्क दर्शन का अवसर मिल रहा है। योजना के तहत जांजगीर-चांपा जिले के 277 तीर्थयात्रियों को चांपा रेलवे स्टेशन से पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर की यात्रा के लिए रवाना किया गया। यह यात्रा 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित की जा रही है।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती उमा राजेन्द्र राठौर एवं श्री राज कुमार साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री प्रदीप नामदेव, इंजी. रवि पांडेय सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया और तीर्थयात्रियों को मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से प्रदेश के श्रद्धालुओं को मिल रहा निःशुल्क तीर्थ दर्शन का अवसर

जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के लिए लाभकारी है। योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है।

चार दिवसीय यात्रा के दौरान तीर्थयात्री पुरी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करेंगे। इसके साथ ही वे कोणार्क के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर और भुवनेश्वर के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेंगे। यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा भोजन, चिकित्सा, ठहरने और सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। रवाना हो रहे श्रद्धालुओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण अपने खर्च पर भगवान जगन्नाथ के दर्शन करना कठिन था। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से उनका वर्षों पुराना सपना पूरा होने जा रहा है।

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीतियों के निर्माण में जनगणना के आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका : संभागायुक्त नरेन्द्र कुमार दुग्गा….

रायपुर: शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यक्रमों और नीतियों के प्रभावी निर्माण एवं क्रियान्वयन में जनगणना के आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जनगणना से प्राप्त जानकारी के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं का आकलन करने और विकास की प्राथमिकताएं निर्धारित करने में सहायता मिलती है। इसलिए जनगणना कार्य पूरी गंभीरता, सावधानी और जिम्मेदारी के साथ संपन्न किया जाना आवश्यक है। यह बात सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने शनिवार को अम्बिकापुर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित डिजिटल जनगणना 2027 के द्वितीय चरण के जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में कही।

डिजिटल जनगणना 2027 के द्वितीय चरण के अंतर्गत जनसंख्या गणना कार्य की तैयारियों को लेकर आयोजित प्रशिक्षण में जिले के चार्ज अधिकारी, तहसीलदार एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी शामिल हुए। संभागायुक्त श्री दुग्गा ने अधिकारियों को जनगणना कार्य की महत्ता से अवगत कराते हुए कहा कि जनगणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की जानकारी का सही एवं सटीक संकलन सुनिश्चित किया जाए। इस कार्य में विशेष सावधानी बरती जाए, ताकि कोई भी व्यक्ति अथवा घर गणना से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़े शासन को शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, अधोसंरचना विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में योजनाएं तैयार करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता प्रदान करते हैं।

संभागायुक्त श्री दुग्गा ने सभी चार्ज अधिकारियों को जनगणना संबंधी दिशा-निर्देशों का गंभीरता से अध्ययन करने और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य से जुड़े प्रत्येक अधिकारी को निर्देश पुस्तिका की पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की शंका अथवा तकनीकी समस्या का समाधान मास्टर ट्रेनर्स से प्राप्त कर लिया जाए, ताकि मैदानी स्तर पर कार्य के दौरान किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने अधिकारियों से प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने और जनगणना कार्य से संबंधित सभी पहलुओं को भलीभांति समझने को कहा।

डिजिटल जनगणना 2027 के द्वितीय चरण की तैयारियों को लेकर चार्ज अधिकारियों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित

संभागायुक्त ने सरगुजा संभाग में जनगणना के प्रथम चरण के दौरान किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जिम्मेदारीपूर्वक कार्य किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि द्वितीय चरण में भी इसी प्रतिबद्धता और समन्वय के साथ कार्य करते हुए जनगणना को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों के संकलन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य की विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करने का कार्य है।

श्री दुग्गा ने आम नागरिकों से भी जनगणना कार्य में सक्रिय सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनगणना के द्वितीय चरण में प्रगणकों द्वारा घर-घर पहुंचकर जनसंख्या संबंधी जानकारी दर्ज की जाएगी। नागरिक प्रगणकों को अपने परिवार से संबंधित सही, पूर्ण एवं तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराएं, जिससे जनगणना के आंकड़ों की विश्वसनीयता और शुद्धता सुनिश्चित हो सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना निदेशालय, नवा रायपुर से आए मास्टर ट्रेनर्स ने कम्प्यूटर आधारित प्रस्तुतिकरण (पीपीटी) के माध्यम से चार्ज अधिकारियों को जनगणना की प्रक्रिया, आवश्यक दिशा-निर्देशों तथा डिजिटल माध्यम से जानकारी संकलित करने के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया। इस दौरान अधिकारियों को जनसंख्या गणना कार्य के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

प्रशिक्षण में अपर कलेक्टर श्री प्रताप विजय खेस्स, अनुविभागीय दण्डाधिकारी अम्बिकापुर श्री बनसिंह नेताम, उदयपुर श्री रामराज सिंह, सीतापुर सुश्री प्राची ठाकुर, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रिंसी तम्बोली एवं सुश्री सुष्मिता टोंड्रे सहित जिले के तहसीलदार, मुख्य नगर पालिका अधिकारी तथा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

‘सेवा सेतु’ केन्द्र के माध्यम से दिलीप कुमार को एक दिन में मिला जाति प्रमाण पत्र….

रायपुर: आम नागरिकों को शासकीय सेवाओं का त्वरित एवं पारदर्शी लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ केन्द्र जमीनी स्तर पर बेहद कारगर साबित हो रहा है। इसके माध्यम से नागरिकों को आवश्यक दस्तावेज एवं प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने से निजात मिल रही है। बालोद जिले के ग्राम मुल्लेगुड़ा निवासी श्री दिलीप के लिए यह अत्यंत मददगार साबित हुआ, जहां उन्हें मात्र एक ही दिवस के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र तैयार कर प्रदान कर दिया गया।

एक दिन में प्रक्रिया पूर्ण, दूर हुई लंबे इंतजार की चिंता

हितग्राही श्री दिलीप कुमार ने बताया कि उन्हें विभिन्न आवश्यक कार्यों एवं योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए जाति प्रमाण पत्र की अत्यंत आवश्यकता थी। पूर्व में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई दिनों तक प्रतीक्षा करनी पड़ती थी तथा बार-बार कार्यालयीन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। लेकिन सेवा सेतु केन्द्र के तहत जब उन्होंने अपने दस्तावेज प्रस्तुत किए, तो संबंधित अमले ने पूरी संवेदनशीलता एवं तत्परता दिखाते हुए आवेदन का त्वरित सत्यापन किया और रिकॉर्ड समय में मात्र एक दिन के भीतर उनका जाति प्रमाण पत्र तैयार कर उन्हें सौंप दिया।

समयबद्ध सेवा से आमजन में बढ़ा विश्वास

एक ही दिन में बिना किसी परेशानी के प्रमाण पत्र मिलने पर दिलीप की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने बताया कि इस त्वरित पहल से न केवल उनके समय और धन की बचत हुई, बल्कि शासकीय व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है। सेवा सेतु के माध्यम से सुशासन की जो परिकल्पना साकार हो रही है, वह ग्रामीण अंचल के जरूरतमंद लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

सेवा सेतु केन्द्र के माध्यम से मिले त्वरित समाधान और एक दिन में जाति प्रमाण पत्र जारी होने पर दिलीप कुमार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप आम जनता को सुलभ व पारदर्शी प्रशासनिक सेवाएं प्रदान करने की यह पहल अत्यंत सराहनीय है, जिससे सुदूर ग्रामीणों को घर के निकट ही त्वरित राहत मिल पा रही है।

आईआईटी भिलाई के छठे दीक्षांत समारोह में 313 विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी स्वर्ण पदक से सम्मानित….

रायपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के नालंदा हॉल में आज छठा दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के कुल 313 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए प्रतिभावान विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं सीनेट पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नीति आयोग के पूर्व सदस्य एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व महानिदेशक डॉ. विजय कुमार सारस्वत उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईआईटी भिलाई के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय ने की।

समारोह का शुभारंभ अकादमिक शोभायात्रा के साथ हुआ। आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने स्वागत उद्बोधन देते हुए संस्थान की वार्षिक उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आईआईटी भिलाई छत्तीसगढ़ को प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

छत्तीसगढ़ का पहला आईटी पार्क बना नवाचार और रोजगार की नई संभावनाओं का केंद्र

निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने बताया कि आईआईटी भिलाई और छत्तीसगढ़ शासन की संयुक्त पहल से राज्य का पहला आईटी पार्क स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा सिविल लाइंस में उद्घाटित यह आईटी पार्क प्रदेश में तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप, उद्यमिता और रोजगार सृजन को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल है। संस्थान का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी एवं अनुसंधान इकोसिस्टम विकसित करना है।

आईआईटी भिलाई के छठे दीक्षांत समारोह में 313 विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी स्वर्ण पदक से सम्मानित

उन्होंने बताया कि आईआईटी भिलाई में वर्तमान में 191 अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित हैं तथा संस्थान का अनुसंधान एवं विकास बजट बढ़कर 187 करोड़ रुपए हो गया है। अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को विस्तार देते हुए संस्थान ने आईएमटी नॉर्ड यूरोप, इकोल सेंट्राल डी नांत और ग्राज़ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित विदेशी संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

निदेशक ने बताया कि आईआईटी भिलाई टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फाउंडेशन द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की समग्र शिक्षा पहल के सहयोग से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विद्या समीक्षा केंद्र विकसित किया गया है। इस केंद्र को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 30 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ को समर्पित किया था। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के उपयोग और प्रभावी निगरानी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

313 विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ, डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए

दीक्षांत समारोह में कुल 313 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 19 विद्यार्थियों को पीएचडी, 37 को एमएससी, 79 को एमटेक, 8 को बीटेक (ऑनर्स) तथा 170 विद्यार्थियों को बीटेक की उपाधियाँ मिलीं। डिजिटल इंडिया पहल के अनुरूप संस्थान द्वारा विद्यार्थियों को डिजिटल उपाधि प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह व्यवस्था तकनीकी नवाचार के साथ पर्यावरण-अनुकूल कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करती है।

कृति अरोड़ा को संस्थान स्वर्ण पदक, निधि सिंह बनीं उत्कृष्ट छात्रा

समारोह में सर्वाधिक सीजीपीए प्राप्त करने पर बीटेक की छात्रा सुश्री कृति अरोड़ा को प्रतिष्ठित संस्थान स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। बीटेक, बीटेक (ऑनर्स) और एमएससी पाठ्यक्रमों में समग्र शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सुश्री निधि सिंह को निदेशक स्वर्ण पदक (उत्कृष्ट छात्रा) से सम्मानित किया गया।

शैक्षणिक एवं पाठ्येतर गतिविधियों में उत्कृष्ट समग्र प्रदर्शन के लिए बीटेक वर्ग में श्री शुभम योगेश महाजन तथा एमटेक वर्ग में सुश्री जिमली पाटोवारी को निदेशक स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सीनेट पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। बीटेक वर्ग में सुश्री कृति अरोड़ा, श्री मरदोककर वेदांत भालचंद्र, श्री अनुज गुप्ता, श्री प्रशांत मालवीय और श्री धनंजय एबॉट को सम्मान मिला। एमएससी वर्ग में श्री शुभदीप पॉल, सुश्री मानवी त्यागी और श्री अनुराग हाजरा को सीनेट पुरस्कार प्रदान किए गए।

आईआईटी भिलाई के छठे दीक्षांत समारोह में 313 विद्यार्थियों को मिली उपाधियाँ, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी स्वर्ण पदक से सम्मानित

इसी प्रकार एमटेक के विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए श्री प्रजापत रविंद्र हिम्मतभाई, श्री अरिंदम चक्रवर्ती, श्री देबजीत सरकार, श्री ब्योमकेश पांडा, श्री नितेश सिंह भदौरिया, श्री नितेश वर्षन एम., श्री सौरव कुमार, सुश्री बसिट्टी रंजिता, श्री देबज्योति डे, सुश्री जिमली पाटोवारी, श्री यजौर किचेनमूर्ती, श्री विवेक कुमार सोनी तथा श्री अनुपम कुमार सिंह को सीनेट पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

युवा विकसित भारत के निर्माण में निभाएं महत्वपूर्ण भूमिका: डॉ. सारस्वत

मुख्य अतिथि डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि देश का भविष्य युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नवाचार करने वाली प्रतिभाओं के हाथों में है। उन्होंने डीआरडीओ और नीति आयोग में अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं से अपने सपनों को विकसित भारत के निर्माण के संकल्प में बदलने का आह्वान किया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. वीरेंद्र कुमार विजय ने ग्रामीण विकास और समावेशी भारत के निर्माण में उच्च शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाकर सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की गई। यह आयोजन विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ देश और समाज के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का भी प्रतीक बना।