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राज्यपाल रमेन डेका ने आसमान में देखा भारतीय वायु सेना का अद्भुत शौर्य, साहस और कौशल

, 2 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर नवा रायपुर का आसमान आज भारतीय वायु सेना के अदम्य शौर्य, साहस, अनुशासन और अद्भुत उड़ान कौशल का साक्षी बना। सेंध लेक में आयोजित भारतीय वायु सेना की विश्वप्रसिद्ध सारंग एयरोबेटिक डिस्प्ले टीम के भव्य एयर-शो में राज्यपाल श्री रमेन डेका शामिल हुए। इस अवसर पर आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम, गरुड़ कमांडोज और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के जांबाजों ने अपने साहसिक करतबों, सटीक नियंत्रण और उत्कृष्ट समन्वय से उपस्थित जनसमूह को रोमांचित कर दिया। पांच हेलीकॉप्टरों की आकर्षक फॉर्मेशन, हैरतअंगेज हवाई करतबों, आसमान में तिरंगे की मनमोहक छटा और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से सराबोर कर दिया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने भारतीय वायु सेना के जांबाजों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित सारंग टीम का यह आयोजन हम सभी के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। वायु वीरों ने जिस साहस, अनुशासन, आत्मविश्वास और सटीक समन्वय के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन किया है, वह प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। यह आयोजन केवल रोमांचकारी हवाई करतबों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना की उत्कृष्ट क्षमता, कठिन प्रशिक्षण, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना का जीवंत परिचय है। उन्होंने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कामना की, कि हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास, प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहे। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस की खुशियों के बीच भारतीय वायु सेना के जांबाजों का यह अद्भुत प्रदर्शन प्रदेशवासियों के उत्साह और गौरव को और अधिक बढ़ा रहा है।

*अनुशासन, आपसी विश्वास और टीम भावना का अनुपम उदाहरण है सारंग टीम*

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि सारंग का अर्थ मोर होता है। जिस प्रकार मोर हमारे देश की विशिष्ट पहचान और सुंदरता का प्रतीक है, उसी प्रकार सारंग टीम भारतीय वायु सेना की गरिमा, उत्कृष्ट कौशल और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हवाई प्रदर्शन के दौरान हेलीकॉप्टरों की विभिन्न फॉर्मेशन और साहसिक करतब भले ही देखने में सहज और सुंदर दिखाई देते हों, लेकिन इनके पीछे विस्तृत योजना, निरंतर अभ्यास, गहरी एकाग्रता और असाधारण समन्वय होता है। प्रत्येक पायलट को अपनी भूमिका के साथ-साथ अपने साथियों की गतिविधियों का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक-दूसरे पर अटूट विश्वास और सटीक तालमेल ही ऐसी अद्भुत प्रस्तुतियों को संभव बनाता है। उन्होंने कहा कि सारंग टीम का प्रदर्शन हमें यह महत्वपूर्ण संदेश देता है कि अनुशासन, समर्पण, सामूहिक प्रयास और आपसी विश्वास से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। यह प्रदर्शन युवाओं को उत्कृष्टता प्राप्त करने, अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने और सामूहिक प्रयासों से सफलता हासिल करने की प्रेरणा देता है।

*आकाशगंगा के जांबाजों ने आसमान से उतरकर दिखाया अद्भुत साहस और सटीक नियंत्रण*

एयर-शो का रोमांचकारी शुभारंभ भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने किया। खुले आसमान से छलांग लगाते हुए टीम के जांबाजों ने अपने पैराशूट को कुशलतापूर्वक नियंत्रित कर अदम्य साहस, संतुलन और सटीकता का परिचय दिया। निर्धारित दिशा और गति के अनुरूप पैराशूट को नियंत्रित करते हुए स्काईडाइवर्स ने सेंध लेक के सामने निर्धारित स्थान पर सटीक लैंडिंग की। उनके इस साहसिक प्रदर्शन को देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे और सफल लैंडिंग के बाद पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस प्रस्तुति ने भारतीय वायु सेना के जवानों की शारीरिक दक्षता, मानसिक एकाग्रता और दृढ़ता और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की।

*गरुड़ कमांडोज ने किया रेस्क्यू और कॉम्बैट ऑपरेशन का प्रभावशाली प्रदर्शन*

आकाशगंगा टीम के प्रदर्शन के बाद भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडोज ने अपने अदम्य साहस और विशेष ऑपरेशन की दक्षता का परिचय दिया। कमांडोज ने एयर-शो से पहले आठ हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट लैंडिंग कर दर्शकों को रोमांचित किया। इसके पश्चात एमआई-17 हेलीकॉप्टर से स्लिदरिंग का प्रदर्शन किया गया। हवा में स्थिर हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे नीचे उतरते जवानों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्धारित स्थान तक पहुंचने की अपनी दक्षता प्रदर्शित की। सेंध लेक के सामने कमांडोज ने रेस्क्यू एवं कॉम्बैट ऑपरेशन का प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपनी परिचालन क्षमता, त्वरित कार्रवाई और कठिन परिस्थितियों में मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के कौशल का परिचय दिया। इसके पश्चात जवानों ने मंच को सलामी दी। उनके अनुशासित और साहसिक प्रदर्शन पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।

*सारंग के पांच हेलीकॉप्टरों की फॉर्मेशन और क्रॉसओवर करतब ने थाम दीं दर्शकों की सांसें*

एयर-शो का सबसे प्रमुख आकर्षण भारतीय वायु सेना की विश्वप्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम की शानदार प्रस्तुति रही। ग्रुप कैप्टन श्री अभिजीत कुमार के नेतृत्व में टीम के पांच हेलीकॉप्टरों ने नवा रायपुर के आसमान में एक के बाद एक आकर्षक फॉर्मेशन और रोमांचकारी हवाई करतब प्रस्तुत किए। पायलटों ने अत्यंत सटीक नियंत्रण, संतुलन और बेहतरीन समन्वय के साथ हेलीकॉप्टरों को उड़ाकर अपने अद्भुत कौशल का परिचय दिया।

आसमान में एक साथ उड़ते पांच हेलीकॉप्टरों की आकर्षक फॉर्मेशन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कभी हेलीकॉप्टर एक-दूसरे के बेहद करीब आते दिखाई दिए, तो कभी अलग-अलग दिशाओं में उड़ान भरते हुए पुनः निर्धारित फॉर्मेशन में एक साथ आ गए। प्रदर्शन के दौरान हेलीकॉप्टरों का बेहद नजदीक से एक-दूसरे को क्रॉस करने वाला रोमांचकारी ‘क्रॉसओवर’ करतब विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। तेज गति से एक-दूसरे के सामने से गुजरते हेलीकॉप्टरों को देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह गए। इस करतब में पायलटों के मन की एकाग्रता, उड़ान पर नियंत्रण और आपसी तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला।

*सारंग के कॉकपिट से गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’, दर्शकों का उत्साह हुआ दोगुना*

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सारंग टीम ने प्रदेश के प्रति अपने विशेष स्नेह और सम्मान का भी परिचय दिया। हवाई प्रदर्शन के दौरान ग्रुप कैप्टन श्री अभिजीत कुमार ने हेलीकॉप्टर के कॉकपिट से छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय उद्घोष ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ के माध्यम से प्रदेशवासियों का आत्मीय अभिवादन किया। आसमान से गूंजे इस उद्घोष ने उपस्थित जनसमूह के उत्साह को दोगुना कर दिया। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय वायु सेना के जांबाजों द्वारा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान और जनभावनाओं को सम्मान देने का यह क्षण दर्शकों के लिए विशेष रूप से यादगार बन गया।

*तिरंगे की मनमोहक फॉर्मेशन और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से देशभक्ति के रंग में रंगा आसमान*

हवाई प्रदर्शन के अंतिम चरण में सारंग टीम ने ‘वंदे मातरम्’ गीत की गूंज के बीच तिरंगे की मनमोहक फॉर्मेशन प्रस्तुत की। आसमान में तिरंगे के रंगों की आकर्षक छटा, हेलीकॉप्टरों का अद्भुत तालमेल और देशभक्ति गीत की गूंज ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। शौर्य, साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण इस प्रस्तुति के साथ एयर-शो का भव्य एवं यादगार समापन हुआ। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशवासियों को भारतीय वायु सेना की उत्कृष्टता और राष्ट्रसेवा के गौरवशाली स्वरूप को निकट से देखने का अवसर प्रदान किया।

*विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा चुकी है सारंग टीम*

उल्लेखनीय है कि भारतीय वायु सेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम विश्व की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों वाली एयरोबेटिक प्रदर्शन टीम है। यह टीम अपने सुनियोजित हवाई करतबों, आकर्षक फॉर्मेशनों और अद्भुत उड़ान कौशल के माध्यम से भारतीय वायु सेना की सटीकता, अनुशासन, व्यावसायिकता तथा उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का परिचय देती है। सारंग टीम जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, मॉरिशस, रूस और मिस्र सहित दुनिया के अनेक देशों में अपने शानदार 1500 हवाई प्रदर्शनों से भारत की प्रतिष्ठा और गौरव को नई ऊंचाइयां प्रदान कर चुकी है।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित यह भव्य एयर-शो प्रदेशवासियों के लिए विशेष गौरव और उत्साह का अवसर बना। आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम, गरुड़ कमांडोज और सारंग टीम की साहसिक प्रस्तुतियों ने राज्य स्थापना दिवस के उत्सव को और अधिक भव्य एवं यादगार बना दिया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित सांसदगण, विधायकगण, निगम-मंडल के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहे रोजगार के नए अवसर, रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा

रायपुर, 02 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी दिशा में राज्य शासन द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य सौंपने की पहल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत बनाने का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उदाहरण रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं हैं, जो रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। समूह को इस कार्य से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

*महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की प्राथमिकताओं में महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और बच्चों एवं माताओं के पोषण स्तर में सुधार शामिल है। महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट निर्माण से जोड़ने की पहल इन दोनों उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ा रही है। इससे एक ओर ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है।

वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिले में महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रेडी-टू-ईट निर्माण जैसी गतिविधियां महिलाओं को नियमित आय अर्जित करने के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वितरण जैसे कार्यों का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

*अप्रैल 2026 से रेडी-टू-ईट निर्माण कर रही हैं सरस्वती समूह की महिलाएं*

रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य मिला। इसके बाद समूह की सभी 10 महिलाएं इस गतिविधि से जुड़कर नियमित रूप से कार्य कर रही हैं। पहले महिलाओं के पास आय अर्जित करने के सीमित अवसर थे, लेकिन अब वे समूह के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।

श्रीमती चौहान बताती हैं कि रेडी-टू-ईट निर्माण से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही समूह की महिलाओं को सामूहिक निर्णय लेने, कार्यों का प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों के संचालन का अनुभव भी प्राप्त हो रहा है।

*आधुनिक मशीनों से तैयार किया जा रहा पूरक पोषण आहार*

सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार तैयार करती हैं। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की मशीनों के माध्यम से सफाई की जाती है। इसके बाद सामग्री की भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी की जाती है। तैयार सामग्री को निर्धारित अनुपात में मिक्सिंग मशीन के माध्यम से मिलाया जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है।

समूह द्वारा तैयार पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समूह की महिलाएं उत्पादन से लेकर पैकिंग और वितरण तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इससे उन्हें खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अनुभव प्राप्त हो रहा है और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

*हर महीने 50 हजार रुपये तक का मुनाफा, परिवारों को मिल रहा आर्थिक संबल*

समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण एवं वितरण से सरस्वती स्व-सहायता समूह को प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। यह आय समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक बन रही है। नियमित आजीविका गतिविधि मिलने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा की भावना बढ़ी है और वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय योगदान दे रही हैं।

समूह की सफलता यह दर्शाती है कि महिलाओं को उचित अवसर, संस्थागत सहयोग और आजीविका के साधन उपलब्ध होने पर वे सामूहिक उद्यम के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं। बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को संगठित कर उन्हें उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को विस्तार दे रही है।

*जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला समूहों का चयन*

रायगढ़ जिले में वर्तमान में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण हेतु 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

चयनित महिला स्व-सहायता समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। इससे समूहों को खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों के संचालन और आवश्यक संसाधन विकसित करने में आर्थिक सहायता मिल रही है। शासन की यह पहल महिलाओं को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमशीलता और आर्थिक प्रबंधन से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है।

*महिला सशक्तिकरण के साथ पोषण सुरक्षा की दिशा में दोहरा लाभ*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महिला सशक्तिकरण की पहल और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में आजीविका संवर्धन के प्रयास ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण से जुड़ी महिलाएं अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयासों से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने में भी योगदान दे रही हैं।

डूमरमुड़ा का सरस्वती स्व-सहायता समूह इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं और आजीविका के अवसरों का लाभ मिलने से ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल एवं परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना सकती हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण की यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण स्वरोजगार और पोषण सुरक्षा के उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राज्योत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, कला और भक्ति संगीत के रंगों से सराबोर हुए दर्शक,राज्यपाल रमेन डेका ने किया कलाकारों का सम्मान

रायपुर, 02 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के दूसरे दिन नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मैदान में कला, संस्कृति, आस्था और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य मंच पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत से परिचित कराया। वहीं छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, शास्त्रीय नृत्य और आधुनिक संगीत की प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव की शाम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने दूसरे दिन प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को सम्मानित कर बधाई दी।

मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत विशेष नाट्य प्रस्तुति ‘मैं अयोध्या हूं’ से हुई। एक घंटे की इस नाट्य प्रस्तुति में अयोध्या की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रभावशाली अभिनय एवं कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाट्य मंचन में भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवंत किया और राम मंदिर निर्माण के इतिहास, आस्था और संस्कृति के इस अनूठे संगम ने दर्शकों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया।

*स्वास्ति मेहुल की सुरीली आवाज से सजी सांस्कृतिक संध्या*

राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या में राम आयेंगे फेम प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुश्री स्वास्ति मेहुल ने अपनी सुरीली आवाज और भक्ति प्रस्तुति से राज्योत्सव की शाम को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से आम जन को भक्ति मय माहौल बना दिया। ‘राम आएंगे…….’ में जहां लोग झूमते नजर आए और ‘कान्हा आन बसो वृंदावन…’ ने लोगों को वृंदावन की कृष्ण भक्ति धारा में विभोर कर दिया।

*कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों से सभी को नचाया*

छत्तीसगढ़ी पार्श्व गायिका कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों से सभी का मन मोह लिया। मोला ले दे ना राजा सोन के नथनी….., मोर मन झूमे……और कर ले तै मया के चिन्हारी….. गानों को सुन कर श्रोता बरबस ही अपनी जगह पर ही झूमने लगे। कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों की मिठास से सभी को सम्मोहित कर लिया।

*शिल्पग्राम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति*

राज्योत्सव के मुख्य मंच के साथ ही शिल्पग्राम में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक छटा बिखरी। यहां आयोजित 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, पंडवानी, सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, सूफी संगीत, गजल और लोकमंच जैसी विविध कलाओं का आकर्षक संगम देखने को मिला।

शिल्पग्राम के मंच पर श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी ने लोकसंगीत एवं नृत्य तथा सुश्री सुष्मिता दास ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी। दुर्ग की सुश्री समप्रिया पूजा निषाद ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायन परंपरा को जीवंत किया। बिलासपुर के श्री अंकित निर्मलकर ने सूफी, गजल एवं सुगम गायन के माध्यम से संगीत के विविध रंग बिखेरे।

गरियाबंद की सुश्री मिलवंतीन बाई ने पारंपरिक सुआ नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत की। रायपुर की सुश्री मेघा बोस ताम्रकार ने लोकसंगीत की प्रस्तुति दी। वहीं सुश्री आंचल पाण्डेय और श्रीमती विनीता त्रिपाठी ने कथक नृत्य के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की सुंदर अभिव्यक्ति की। धमतरी की सुश्री रुखमनी दीवान और श्री तेजराम साहू ने लोकमंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोकजीवन, परंपराओं और सामाजिक संस्कृति को प्रस्तुत किया। श्री आदित्य मिश्रा बैंड की संगीतमय प्रस्तुति ने भी सांस्कृतिक आयोजन में विशेष रंग भरे।

*पंडवानी और सुआ नृत्य में दिखी छत्तीसगढ़ की लोकआस्था और परंपराओं की झलक*

शिल्पग्राम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं की विशेष झलक देखने को मिली। पंडवानी गायन के माध्यम से महाभारत की कथाओं को विशिष्ट गायन और अभिनय शैली में प्रस्तुत किया गया। वहीं पारंपरिक सुआ नृत्य ने छत्तीसगढ़ के सामूहिक जीवन, लोकआस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। ओडिसी और कथक नृत्य की प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। सूफी संगीत, गजल और सुगम गायन ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संगीत के विविध रंग जोड़े।

*स्थानीय कलाकारों को मिला प्रतिभा प्रदर्शन का बड़ा मंच*

राज्योत्सव के दूसरे दिन आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। राज्यस्तरीय मंच पर लोककलाओं की प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं को नई पहचान दी। राज्योत्सव के माध्यम से प्रदेश की लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिल रही है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से ओड़गी में सड़क-पुल निर्माण को मिली स्वीकृति

रायपुर, 2 नवंबर 2026/ सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत खालबहारा में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से खालबहारा मेन रोड से पंचायत भवन तक 1.50 किलोमीटर लंबे मार्ग का पुल-पुलियों सहित निर्माण स्वीकृत हुआ है। लोक निर्माण विभाग ने इस कार्य के लिए 1 करोड़ 65 लाख 85 हजार रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है।

इस मार्ग के निर्माण से ग्रामवासियों को पंचायत भवन तक पहुंचने में सुविधा होगी। पंचायत भवन ग्रामीणों के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न कामों और बैठकों का प्रमुख केंद्र होता है। सड़क बनने से वहां तक आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने में सहूलियत मिलेगी। मार्ग में पुल-पुलियों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे सड़क संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

राज्य शासन ने यह स्वीकृति वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल कार्य के अंतर्गत प्रदान की है। स्वीकृति आदेश के अनुसार निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले तकनीकी स्वीकृति और निविदा सहित निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। साथ ही, कार्य शासकीय भूमि पर और उपलब्ध बजट की सीमा के भीतर कराया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार स्थानीय आवागमन और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। खालबहारा में स्वीकृत यह निर्माण कार्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्माण पूरा होने पर ग्रामवासियों को पंचायत भवन तक पहुंचने के लिए बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा।

राज्योत्सव पर इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली जंगल सफारी और अचानकमार में बफर सफारी शुरू,वन मंत्री केदार कश्यप ने किया शुभारंभ, वन्यजीव पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर…

 

रायपुर, 2 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्थापना दिवस पर दो नई सफारी सेवाओं की शुरुआत की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली जंगल सफारी और मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर सफारी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आज इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सफारी का शुभारंभ एवं अचानकमार टाइगर रिजर्व के बफर सफारी अंतर्गत केवंची गेट का वर्चुअल माध्यम से बटन दबाकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव जी एवं विधायक श्री धर्मजीत सिंह जी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। दोनों स्थानों पर पर्यटकों के लिए सफारी की बुकिंग शुरू हो गई है। इन सेवाओं से वन पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

*इंद्रावती में पहली बार जंगल सफारी, स्थानीय ग्रामीण संभालेंगे संचालन*

लंबे समय तक नक्सलवाद और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित रहे बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार जंगल सफारी शुरू की गई है। सफारी का प्रवेश द्वार बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर उलूर गांव में बनाया गया है। पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम होते हुए उलूर पहुंच सकेंगे। यहां सफारी के लिए चार जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। पर्यटकों को प्रशिक्षित गाइड के साथ चाय-नाश्ते की सुविधा भी मिलेगी।

सफारी संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों को सौंपी गई है। इसके लिए युवाओं को कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सफारी से स्थानीय युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में रोजगार मिलेगा। वहीं होम-स्टे, पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तथा स्थानीय कारीगरों के लिए आय के नए अवसर विकसित होंगे। इंद्रावती टाइगर रिजर्व बाघ, राजकीय पशु वन भैंसा और गिद्ध सहित विभिन्न वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। जंगल सफारी शुरू होने से पर्यटकों को क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

*अचानकमार में केंवची गेट से 50 किलोमीटर लंबी बफर सफारी शुरू*

मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से पहली बार बफर सफारी शुरू की गई है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से अमरकंटक मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-45 स्थित इस गेट के खुलने से पर्यटकों को सफारी का नया विकल्प मिलेगा। रिजर्व में शिवतराई गेट से पहले से सफारी संचालित है। केंवची गेट से सफारी शुरू होने से अमरकंटक-अचानकमार-रतनपुर पर्यटन सर्किट को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल 914.017 वर्ग किलोमीटर में फैले अचानकमार टाइगर रिजर्व में 626.195 वर्ग किलोमीटर कोर और 287.822 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र है। केंवची गेट से लगभग 50 किलोमीटर लंबे सफारी मार्ग में भैरोसांगफाटर, सेमर वॉच टॉवर, कचांदी, जलांगो तिराहा, दरियाबूट पेट्रोलिंग कैंप और आमाडोब बैरियर शामिल हैं। सफारी के लिए एक जिप्सी और तीन महारानी वाहन उपलब्ध रहेंगे। जिप्सी का किराया 3,500 रुपए तथा महारानी वाहन का किराया 5,000 रुपए प्रति राउंड निर्धारित है।

अचानकमार में पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, चीतल, सांभर और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को देखने का अवसर मिलेगा। सिहावल सागर, माझी डोंगरी वॉच टॉवर और जल्दा ग्रासलैंड भी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। पर्यटकों के ठहरने के लिए केंवची गेट के पास पर्यटन विभाग का सोनभद्र रिसोर्ट तथा निजी रिसोर्ट उपलब्ध हैं।

दोनों टाइगर रिजर्व में सफारी सेवाओं के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय स्तर पर होटल, होम-स्टे, परिवहन, गाइड सेवा, खानपान और हस्तशिल्प से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

राज्य स्थापना दिवस पर विशेष : छत्तीसगढ़ के 26 वर्ष- संघर्ष, संकल्प और सर्वांगीण विकास की स्वर्णिम गाथा…

रायपुर: एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत का 26वां राज्य बना था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह सपना साकार हुआ था। 1 नवंबर 2000 को जब मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नए राज्य के रूप में मानचित्र पर आया था, तब संसाधनों की कमी, प्रशासनिक चुनौतियों और पिछड़ेपन के बीच एक भविष्य गढ़ने की चुनौती सामने थी। आज अपनी स्थापना के 26 गौरवशाली वर्ष पूरे करते हुए छत्तीसगढ़ ने विकास के क्षेत्र में जो मील के पत्थर स्थापित किए हैं, वे न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि दृढ़ इच्छाशक्ति और जनसहभागिता से किसी भी राज्य की तकदीर कैसे बदली जा सकती है।

बजट और अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक छलांग

राज्य के गठन के शुरुआती दौर में सीमित वित्तीय संसाधनों के साथ करीब 7,000-8,000 करोड़ रुपये से शुरू हुआ छत्तीसगढ़ का बजट आज बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि राज्य की आर्थिकी तेजी से मजबूत हुई है। देश के ‘धान के कटोरे’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह प्रदेश आज अपनी खनिज संपदा (कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट), इस्पात, सीमेंट और ऊर्जा उत्पादन के बूते देश के औद्योगिक नक्शे पर एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। वैश्विक निवेश और आधुनिक उद्योगों के विस्तार से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है।

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण साय सरकार की प्रमुख पहचान के रूप में उभरा है। महतारी वंदन योजना की 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं को 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे खातों में दी जा चुकी है। प्रदेश में 13.85 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन में प्रदेश के 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के लिए संपत्ति की रजिस्ट्री में पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत और स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत दी गई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत हमारे किसान

प्रधानमंत्री आवास (ग्रामीण) में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में औसतन करीब 1,600 आवास प्रतिदिन पूरे किए जा रहे हैं। ढाई वर्षों में पुराने और नए स्वीकृत आवास मिलाकर 11 लाख से अधिक घर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। किसानों को 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से  धान बेचने की सुविधा दी गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना को मिलाकर किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपए की राशि दी गई। खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे सुधार किसानों के लिए काफी सुविधाजनक रहे।

बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। बस्तर की 485 बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपए की लागत के 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान के साथ विकास की गति को तेज करने तथा दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के राज्य सरकार के प्रयासों को केंद्र सरकार का सहयोग मिल रहा है।
आधारभूत संरचना और संपर्क का विस्तार

बीते ढाई दशकों में छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व बदलाव आया है। गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने (ग्रामीण सड़क नेटवर्क में लगभग 98 गुना वृद्धि) से लेकर राजधानी रायपुर और नवा रायपुर (अटल नगर) जैसी आधुनिक शहरी बसाहट ने राज्य के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। दूर-दराज के आदिवासी और वन अंचलों तक बिजली, पानी, पक्की सड़कें और डिजिटल कनेक्टिविटी (मोबाइल व इंटरनेट) पहुंच चुकी है, जिससे गांवों और शहरों के बीच की दूरियां सिमटी हैं। नवा रायपुर में डाटा सेंटर और आधुनिक तकनीक परियोजनाएं नई अर्थव्यवस्था से जुड़ रही हैं। सरकार सुशासन, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत कर रही है।  छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का केंद्र रोजगार सृजन और युवाओं के लिए अवसरों का विस्तार है। प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, कृषि उत्पादन और बेहतर अधोसंरचना निवेश के लिए अनुकूल आधार प्रदान करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ ने 450 से अधिक ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट 2026 लाने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना। जन विश्वास सुधारों के जरिए 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसे सुधार किए गए हैं। नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे 1.72लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर निर्मित होंगे।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास

मानव संसाधन विकास के बिना किसी भी राज्य की तरक्की अधूरी है। पिछले 26 वर्षों में इस दिशा में भी क्रांतिकारी कार्य हुए हैं। राज्य में साक्षरता दर बढ़कर करीब 79 प्रतिशत  तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं का दायरा बढ़ाते हुए जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में कई गुना इजाफा हुआ है, जिससे आम जनता को घर के नजदीक बेहतर इलाज मिलने लगा है। इसके अलावा, ‘बिहान’ योजना जैसी पहलों के माध्यम से राज्य की लाखों महिलाओं (स्व-सहायता समूहों) को आजीविका और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़कर समाज की मुख्यधारा में मजबूती से स्थापित किया गया है।

मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इजाफा

राजधानी रायपुर के नवा रायपुर क्षेत्र में मेडिसिटी हब विकसित किया जा रहा है, जिसमें 5,000 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने की योजना है। रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में 700 बिस्तरों का अस्पताल तथा प्रदेश में 4 नए मेडिकल कॉलेजों का विस्तार किया जा रहा है। राज्य में शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना, श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना, दाई दीदी मोबाइल क्लीनिक योजना, और बच्चों के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) जैसी योजनाएं संचालित हो रही हैं।

“स्वस्थ छत्तीसगढ़”की परिकल्पना हो रहा है साकार

मुख्यमंत्री  श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को गति प्रदान करते हुए गुणवत्तापूर्ण उपचार की उपलब्धता दूरस्थ क्षेत्रों तक सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण एवं सेवाओं की पहुंच में सुधार के माध्यम से “स्वस्थ छत्तीसगढ़” की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है, जो “विकसित छत्तीसगढ़” के लक्ष्य की प्राप्ति का आधार बनेगा। आज प्रदेश में आईआईएम, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, एनआईटी, एम्स, लॉ यूनिवर्सिटी जैसी कई बड़ी संस्थाएं खुल गई हैं. इसके अलावा स्कूली शिक्षा में भी काफी विकास हुआ है हालांकि अभी इस दिशा में और काम करने की आवश्यकता है

सुरक्षा, शांति और बस्तर की नई सुबह

छत्तीसगढ़ के विकास मार्ग में सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में निर्णायक और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा बलों के साहस, दूरदराज के क्षेत्रों में नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना और साथ ही वहां शिक्षा, स्वास्थ्य व विकास योजनाओं के पहुंचने से लाल आतंक का दायरा तेजी से सिमटा है। बस्तर और सरगुजा के संवेदनहीन समझे जाने वाले कई इलाकों में अब विकास की किरणें पहुंच रही हैं, जिससे वहां के नागरिकों के जीवन में एक नया सवेरा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित हो रहा है।

संस्कृति और आधुनिकता का अनूठा संगम

छत्तीसगढ़ ने अपनी आधुनिक विकास यात्रा के दौरान अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आदिवासी धरोहर को पूरी सहेजकर रखा है। बस्तर की लोक संस्कृति, कर्मा-सुआ नृत्य, पारंपरिक त्यौहार और छत्तीसगढ़ी भाषा-खानपान आज देश-दुनिया में अपनी अनूठी पहचान बना चुके हैं। डिजिटल माध्यमों और मेलों (जैसे राज्योत्सव) के जरिए स्थानीय कला और शिल्प को वैश्विक मंच मिल रहा है।   धान का कटोरा कहे जाने वाले इस राज्य ने अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, बस्तरिया परंपरा, हरेली, सिरपुर के इतिहास और लोककला को सहेजते हुए आधुनिक तकनीक और औद्योगिक क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।

शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय  का निर्माण नवा रायपुर (अटल नगर) में किया गया है। इसमें 14 से 15 विषय-आधारित गैलरी बनाई गई हैं, जिनमें बस्तर का घोटुल संस्थान, पारंपरिक कृषि, शिकार, चिकित्सा पद्धति, लोकनृत्य और रीतियां (जैसे नवाखानी और उरिदखानी) को दर्शाया गया है। यह संग्रहालय हलबा विद्रोह, परलकोट विद्रोह, भूमकाल आंदोलन और रानी चो-रिस (महिला नेतृत्व वाला विद्रोह) जैसे ऐतिहासिक आदिवासी संघर्षों और वीरों की गाथाओं को वर्चुअल रियलिटी और वीएफएक्स तकनीक के जरिए जीवंत करता है। संग्रहालय में जनजातियों के परंपरागत वाद्ययंत्रों, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, उनमें कृषि की परंपरागत तकनीकें एवं उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन, उनमें आग जलाने की पद्धतियां, लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई (पौधों से बीज अलग करना), कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणों व परंपरागत तकनीकों, सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में घोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला, जनजातियों में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि के जीवंत प्रदर्शन किया गया है।

विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण ओर अग्रसर

छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदलने की क्षमता रखता है। राज्य का लक्ष्य किसानों को समृद्ध करना, महिलाओं को सशक्त बनाना और युवाओं को अवसर देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प ले रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के तहत विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए अग्रसर है।

बस्तर के जंगलों में मौजूद सुरक्षा कैंप अब दूरदराज के गांव वालों के लिए सेवा और विकास के केंद्र बन रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा‘ शुरू की गई है। बस्तर में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 नागरिकों की संतुष्टि और वास्तविक समाधान ही पैमाना

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का मूल मंत्र होना चाहिए संवेदनशीलता, समयबद्धता और समाधान। अंतिम लक्ष्य यही है कि नागरिक को यह भरोसा हो कि उसने सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है, तो उसकी बात सुनी भी जाएगी और नियमानुसार उसका समाधान भी होगा। शासकीय कार्यालय में आने वाले नागरिक के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार हो। उसकी बात सुनी जाए और समयबद्ध जवाब दिया जाए। काम नियमानुसार संभव है तो अनावश्यक विलंब न हो। यदि काम संभव नहीं है तो नागरिक को स्पष्ट कारण बताया जाए। लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति न्यूनतम होनी चाहिए। जनता से अच्छा व्यवहार भी अधिकारी-कर्मचारी के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण पैमाना होना चाहिए।

26 वर्षों की यह युवा यात्रा इस बात का गवाह है कि छत्तीसगढ़ ने तमाम भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों को पार करते हुए प्रगति के नए आयाम रचे हैं। हालांकि, इस सफर में अभी किसानों की समृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों के विस्तार और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं के शत-प्रतिशत लाभ को पहुंचाने की दिशा में निरंतर काम जारी है। ‘विकसित छत्तीसगढ़के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा यह राज्य आने वाले समय में देश के सबसे विकसित और सशक्त राज्यों में अपनी एक अलग मिसाल पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राज्योत्सव 2026 की सांस्कृतिक संध्या में गीत-संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां…..

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की सांस्कृतिक संध्या गीत-संगीत, नृत्य और सुरों की शानदार प्रस्तुतियों से सराबोर रही। सांस्कृतिक कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के साथ देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं का खूबसूरत संगम देखने को मिला। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर शाम तक गीत-संगीत की मधुर धुनों पर दर्शक झूमते नजर आए।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोक संगीत की मिठास घोल दी अनुराग शर्मा ने

सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय गायक अनुराग शर्मा ने प्रसिद्ध गीत ‘गीत कोनो गाहु तोर नाम के’ की सुमधुर प्रस्तुति के साथ की। उनके गीत ने कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और लोक संगीत की मिठास घोल दी। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनकी प्रस्तुति का स्वागत किया। इसके उपरांत रिदम क्वीन बैंड ने अपनी शानदार संगीतमय प्रस्तुति से सांस्कृतिक संध्या में उत्साह और उमंग का संचार किया। बैंड के कलाकारों ने संगीत की आकर्षक धुनों और बेहतरीन तालमेल से दर्शकों को खूब रोमांचित किया।

लावणी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति

सांस्कृतिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र राज्य के प्रसिद्ध पारंपरिक लावणी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, लयबद्ध नृत्य और भावपूर्ण मुद्राओं के माध्यम से महाराष्ट्र की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति ने राज्योत्सव के मंच पर देश की सांस्कृतिक विविधता और एकता का सुंदर संदेश दिया।

आरू साहू के लोक संस्कृति के रंग में रंगे लोग

छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय लोक गायिका आरू साहू ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत भक्तिमय गीत से की। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी मधुर आवाज और छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

अनुराग शर्मा, आरू साहू और बॉलीवुड गायिका पलक मुच्छल के गीतों पर झूमे दर्शक

बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका पलक मुच्छल की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दी

सांस्कृतिक संध्या में बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका पलक मुच्छल की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा। उनके लोकप्रिय गीतों की मधुर धुनों पर युवा दर्शक जमकर झूमे और गीतों का भरपूर आनंद लिया। पलक मुच्छल की सुरीली आवाज और शानदार मंचीय प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। युवाओं में उनकी प्रस्तुति को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

अनुराग शर्मा, आरू साहू और बॉलीवुड गायिका पलक मुच्छल के गीतों पर झूमे दर्शक

राज्योत्सव की इस रंगारंग सांस्कृतिक संध्या ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत के साथ अन्य राज्यों की परंपराओं को भी एक मंच पर प्रस्तुत किया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुतियों और दर्शकों के उत्साह ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

राज्योत्सव में लोककला के रंग, सुरों की गूंज और थिरकते कदमों ने बांधा समां….

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के अवसर पर नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मेला मैदान का शिल्पग्राम मंच रविवार को लोककला, संगीत और नृत्य के अद्भुत संगम का साक्षी बना। कहीं लोकगीतों की सुरीली तान गूंजी, तो कहीं पंडवानी की ओजस्वी कथा ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। गिटार की मधुर धुनों, फ्यूजन बैंड की आधुनिक संगीत शैली और शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव के उल्लास को दोगुना कर दिया। विभिन्न विधाओं के कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं की खूबसूरत छटा बिखेरी।

शिल्पग्राम मंच पर सजी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक महफिल, पंडवानी से लेकर फ्यूजन बैंड तक कलाकारों ने बिखेरा कला का जादू

राज्योत्सव के अंतर्गत शिल्पग्राम मंच पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से उत्सव में चार चांद लगा दिए। पारंपरिक लोककला और आधुनिक संगीत का यह अनूठा संगम राज्योत्सव के विशेष आकर्षणों में शामिल रहा।

पंडवानी की ओजस्वी प्रस्तुति में जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की गौरवशाली लोकपरंपरा

छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात लोकगाथा पंडवानी की प्रस्तुति राज्योत्सव के प्रमुख आकर्षणों में रही। दुर्ग के श्री चेतन देवांगन और रायपुर की सुश्री दुर्गा साहू ने पंडवानी की प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से महाभारत की कथाओं और छत्तीसगढ़ की समृद्ध वाचिक परंपरा को मंच पर साकार किया। कथा, संगीत और अभिनय के अनूठे समन्वय ने लोककला की इस विशिष्ट विधा की खूबसूरती को सामने रखा।

शिल्पग्राम मंच पर सजी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक महफिल, पंडवानी से लेकर फ्यूजन बैंड तक कलाकारों ने बिखेरा कला का जादू

गिटार की धुनों और फ्यूजन बैंड ने बिखेरे आधुनिक संगीत के रंग

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रायपुर के श्री शिवेन्द्र मण्डावी ने लोकसंगीत एवं गिटार वादन की प्रस्तुति दी। रायपुर के श्री राजीव श्रीवास्तव के नेतृत्व में रिदम ट्विंस बैंड तथा श्री संतोष कुमार सिन्हा के फ्यूजन बैंड की प्रस्तुतियों ने संगीत की आधुनिक शैलियों से दर्शकों को रूबरू कराया। पारंपरिक और आधुनिक संगीत के इस मेल ने शिल्पग्राम मंच को सुरों और तालों से सराबोर कर दिया।

शास्त्रीय नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने बिखेरी भारतीय कला की अनुपम छटा

सुश्री अनुप्रिया सुल्ताना ने शास्त्रीय नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति से भारतीय नृत्य परंपरा की सुंदरता को मंच पर साकार किया। नृत्य की भावपूर्ण मुद्राओं, लयबद्ध पदचाप और कलात्मक अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण जोड़ा।

ढोलमारू और लोकमंच की प्रस्तुतियों में दिखी छत्तीसगढ़ की माटी की महक

दुर्ग की श्रीमती रजनी रजक ने लोकमंच एवं ढोलमारू की प्रस्तुति के माध्यम से लोकजीवन की भावनाओं और पारंपरिक कथाओं को जीवंत किया। वहीं बिलासपुर की कुमारी वंदिता साहू ने लोकसंगीत की मधुर प्रस्तुति दी। सुश्री पायल साहू ने लोकमंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोककला के विविध रंग बिखेरे। इन प्रस्तुतियों में प्रदेश की लोकपरंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और माटी की सौंधी महक का सुंदर समावेश देखने को मिला।

शिल्पग्राम मंच पर सजी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक महफिल, पंडवानी से लेकर फ्यूजन बैंड तक कलाकारों ने बिखेरा कला का जादू

राज्योत्सव बना लोककलाकारों की प्रतिभा और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव

राज्योत्सव के शिल्पग्राम मंच पर आयोजित इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत की। पंडवानी की कथा परंपरा, लोकसंगीत की मिठास, ढोलमारू की लोकगाथा, शास्त्रीय नृत्य की कलात्मकता और आधुनिक बैंड की संगीत प्रस्तुतियों ने उत्सव को बहुरंगी स्वरूप प्रदान किया।

विकसित छत्तीसगढ़ से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया….

रायपुर: केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प ही विकसित भारत के निर्माण को नई गति प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे साकार करने में छत्तीसगढ़ जैसे समृद्ध संसाधनों, गौरवशाली संस्कृति और अपार संभावनाओं वाले राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं, अधोसंरचना विकास, औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसरों के विस्तार से विकास की नई संभावनाएं साकार हो रही हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया आज छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव 2026 के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे।  केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर राज्योत्सव का विधिवत शुभारंभ किया।

अटल जी ने छत्तीसगढ़ निर्माण का जो सपना देखा, वह आज हो रहा साकार : डॉ. मांडविया

केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के पीछे स्थानीय जनता की आकांक्षाओं को नई पहचान देने और विकास की संभावनाओं को साकार करने की भावना थी। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर प्रदेश के विकास की मजबूत नींव रखी थी। आज मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश उसी संकल्प को आगे बढ़ाते हुए विकास के नए पथ पर अग्रसर है।

विकसित छत्तीसगढ़ से साकार होगा विकसित भारत का संकल्प : केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

डॉ. मांडविया ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, समृद्ध लोकपरंपराएं, प्राकृतिक संपदा और यहां के लोगों की कर्मठता प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। एक समय बस्तर की चर्चा मुख्य रूप से नक्सलवाद के कारण होती थी, लेकिन आज वहां खेल, पर्यटन, संस्कृति और विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। बस्तर की प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सहेजते हुए आगे बढ़ना आवश्यक है। जब देश के सभी राज्य अपनी विशिष्ट क्षमताओं और संसाधनों के आधार पर विकसित होंगे, तभी विकसित भारत का संकल्प पूर्ण होगा।

अटल जी ने निभाया छत्तीसगढ़ निर्माण का वादा : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास की यात्रा को स्मरण करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ की जनता से  राज्य निर्माण का वादा किया था। प्रदेशवासियों ने उनके नेतृत्व पर विश्वास जताया और उन्होंने अपना वादा पूरा करते हुए 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का स्वरूप प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी को नमन करते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में निर्मित छत्तीसगढ़ आज विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। राज्य गठन के समय प्रदेश में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की अनेक चुनौतियां थीं। बीते वर्षों में इन क्षेत्रों में व्यापक विस्तार हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ कर गरीब परिवारों को रियायती दर पर खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था ने प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की।

प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक सफलता

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक बस्तर के विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रहा। प्राकृतिक सौंदर्य, वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद नक्सलवाद के कारण बस्तर के अनेक क्षेत्रों तक विकास की सुविधाएं अपेक्षित रूप से नहीं पहुंच सकीं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के दृढ़ संकल्प एवं मार्गदर्शन में नक्सलवाद का उन्मूलन हुआ। सुरक्षा बलों के अदम्य साहस, पराक्रम और बस्तरवासियों के सहयोग से आज बस्तर नक्सलवाद की चुनौती से निकलकर शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर की जनता शांति और विकास चाहती है। राज्य सरकार का संकल्प है कि बस्तर के दूरस्थ से दूरस्थ गांव तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार जैसी आवश्यक सुविधाएं पहुंचें। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने इस अभियान में सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान को नमन किया।

मोदी की गारंटी पूरी कर रही सरकार :  गरीबों, किसानों और महिलाओं के जीवन में आ रहा सकारात्मक बदलाव

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटियों को पूरा करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1,600 पक्के आवास तैयार हो रहे हैं। यह केवल मकानों का निर्माण नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य के सपनों को साकार करने का अभियान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की खुशहाली राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रदेश में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। किसानों को लंबित बोनस का भुगतान कर उनके प्रति किए गए वादे को भी पूरा किया गया है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने किया तीन दिवसीय राज्योत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनी है। इस योजना के अंतर्गत 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पहुंच रही सहायता राशि से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में उन्हें आर्थिक संबल मिला है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में चरण पादुका योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है। भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

श्री रामलला दर्शन योजना से  श्रद्धालुओं का अयोध्या दर्शन का सपना हुआ साकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है और यहां के जनजीवन में भगवान श्रीराम के प्रति गहरी आस्था है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण और प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा से प्रदेशवासियों में अपार उत्साह है।

उन्होंने बताया कि श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के श्रद्धालुओं को भी इस पवित्र तीर्थयात्रा का अवसर प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज शासकीय एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर 21 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। यह प्रदेश में स्वास्थ्य शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर के उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना हुई है। युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अधिक से अधिक अवसर प्राप्त हों।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने किया तीन दिवसीय राज्योत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ

समारोह को संबोधित करते हुए संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। पंडवानी, पंथी, ददरिया सहित यहां की लोककलाएं हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश की लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। पंडवानी की महान साधिका स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में राज्य अलंकरण की शुरुआत की गई है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, सिरपुर, राजिम, रामगढ़ की प्राचीन गुफाएं और मैनपाट जैसे पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखते हैं। पर्यटन के विस्तार से स्थानीय युवाओं, महिलाओं, हस्तशिल्पकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित होंगे।

केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने किया तीन दिवसीय राज्योत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा, राज्य सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायकगण, विभिन्न निगमों, मंडलों एवं आयोगों के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

राज्योत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का स्टॉल बना आकर्षण का केंद्र, छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को जानने उमड़ रही लोगों की भीड़….

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित भव्य राज्योत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा लगाया गया स्टॉल लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। राज्योत्सव के पहले ही दिन विभागीय स्टॉल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिक, युवा, विद्यार्थी और पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों, धार्मिक पर्यटन केंद्रों तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा संचालित रिसॉर्ट्स और पर्यटक आवास सुविधाओं के संबंध में उत्साहपूर्वक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

राज्योत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का स्टॉल छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि को प्रदर्शित कर रहा है। यहां पहुंचने वाले लोग प्रदेश के प्रसिद्ध जलप्रपातों, घने वनों, वन्यजीव अभयारण्यों, प्राचीन मंदिरों, पुरातात्विक स्थलों और धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्रों के बारे में जानकारी ले रहे हैं। विशेष रूप से बस्तर, सरगुजा और प्रदेश के अन्य पर्यटन क्षेत्रों के प्रति लोगों में उत्साह देखा जा रहा है।

चित्रकोट से सिरपुर तक, छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के प्रति बढ़ रहा आकर्षण

विभागीय स्टॉल पर आने वाले पर्यटक बस्तर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, ऐतिहासिक सिरपुर, भोरमदेव मंदिर, मैनपाट, बारनवापारा अभयारण्य, डोंगरगढ़ और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों के संबंध में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। पर्यटकों में इन स्थलों तक पहुंचने के मार्ग, आवागमन की सुविधाओं, ठहरने की व्यवस्था और भ्रमण के उपयुक्त समय के बारे में जानने की विशेष उत्सुकता दिखाई दे रही है।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और विविधता लोगों को आकर्षित कर रही है। राज्योत्सव में आने वाले अनेक परिवार प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा की योजना बनाने के उद्देश्य से विभागीय स्टॉल पर पहुंच रहे हैं।

पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स और आवास सुविधाओं के बारे में विशेष रुचि

राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा संचालित रिसॉर्ट्स और पर्यटक आवास सुविधाओं के संबंध में भी लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। पर्यटक विभिन्न पर्यटन स्थलों पर उपलब्ध ठहरने की सुविधाओं, रिसॉर्ट्स की विशेषताओं, आवास व्यवस्था, किराए और आरक्षण प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स की जानकारी लेने पर्यटकों में दिख रहा जबरदस्त उत्साह

विशेष रूप से चित्रकोट सहित प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटन मंडल द्वारा उपलब्ध कराई जा रही आवासीय सुविधाओं के प्रति लोगों की रुचि दिखाई दे रही है। पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स के संबंध में जानकारी प्राप्त करने वाले लोग परिवार के साथ छुट्टियां बिताने और प्राकृतिक वातावरण में पर्यटन का आनंद लेने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के प्रति भी उत्साह

पर्यटन के साथ-साथ प्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति भी लोगों में उत्सुकता दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराएं, पारंपरिक उत्सव, लोकनृत्य और प्राचीन स्थापत्य कला प्रदेश की पहचान हैं। राज्योत्सव के माध्यम से लोगों को छत्तीसगढ़ की इसी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को और अधिक निकट से जानने का अवसर मिल रहा है।

राज्य की सांस्कृतिक विविधता और पर्यटन संभावनाएं एक-दूसरे की पूरक हैं। प्रदेश के धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों के साथ यहां की लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का विषय है।

छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित करने की दिशा में निरंतर प्रयास—मंत्री श्री राजेश अग्रवाल

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध वन संपदा, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहरों, धार्मिक आस्था के केंद्रों और जीवंत जनजातीय संस्कृति का अद्भुत संगम है। इन विशेषताओं के कारण छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं।

पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स की जानकारी लेने पर्यटकों में दिख रहा जबरदस्त उत्साह

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्योत्सव जैसे आयोजन प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के स्टॉल पर लोगों की उत्साहपूर्ण भागीदारी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य पर्यटन स्थलों का विकास करने के साथ-साथ पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

*पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, स्थानीय रोजगार के अवसर भी होंगे सृजित*

प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। पर्यटन स्थलों पर आवास, खानपान, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और पर्यटन मार्गदर्शन जैसी सेवाओं से स्थानीय समुदायों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।

पर्यटन स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स की जानकारी लेने पर्यटकों में दिख रहा जबरदस्त उत्साह

राज्योत्सव में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के स्टॉल के प्रति लोगों का उत्साह प्रदेश में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की दृष्टि से सकारात्मक संकेत है। राज्योत्सव में आने वाले लोगों को पर्यटन स्थलों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी मिलने से आने वाले समय में प्रदेश के विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने की संभावनाएं हैं।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का यह आयोजन प्रदेश की विकास यात्रा, सांस्कृतिक गौरव और पर्यटन संभावनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का स्टॉल इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध सांस्कृतिक पहचान के प्रति लोगों की बढ़ती रुचि का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।