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मेधावी विद्यार्थियों को इसरो, अहमदाबाद के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाएगा जिला प्रशासन सक्ती, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 15 नवंबर को होगी चयन परीक्षा….

रायपुर: जिला प्रशासन सक्ती द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को इसरो, अहमदाबाद के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जा रहा है। मई माह में हुए सफल एयरपोर्ट भ्रमण के बाद जिला प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की गतिविधियों को करीब से जानने और समझने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह शैक्षणिक भ्रमण पूरी तरह निःशुल्क होगा। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को इसरो में असली सैटेलाइट देखने, वैज्ञानिकों से मिलने और उनसे बातचीत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही अहमदाबाद के अन्य प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण कराया जाएगा।
इस शैक्षणिक भ्रमण के लिए चयन परीक्षा का आयोजन 15 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक किया जाएगा।

परीक्षा की अवधि 2 घंटे होगी, जिसमें 100 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा एप्टीट्यूड आधारित होगी, जिसमें सामान्य ज्ञान, तार्किक क्षमता, गणित एवं रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से संबंधित प्रश्न शामिल होंगे। विद्यार्थी पंजीकरण फॉर्म में अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा केंद्र का चयन कर सकते हैं। विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
इस शैक्षणिक भ्रमण के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी पात्र होंगे। पंजीकरण की अंतिम तिथि 9 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। भ्रमण की प्रस्तावित तिथि 22 से 26 नवंबर 2026 तक है।

ऑनलाइन पंजीकरण एवं अभ्यास प्रश्न बैंक की सुविधा

इच्छुक विद्यार्थी https://docs.google.com/forms/d/1BdB1DBCJLMhUAgYROXjq-GU1qA2VEfvzQPvgLilCYr8/viewform लिंक के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। फॉर्म में अभ्यास के लिए सैंपल प्रश्न बैंक भी उपलब्ध कराया गया है। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से पहले प्रश्न बैंक को अवश्य हल करें। विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की गई है कि पंजीकरण फॉर्म में सही मोबाइल नंबर (व्हाट्सऐप नंबर) दर्ज करें, क्योंकि परीक्षा एवं चयन संबंधी सूचनाएं इसी नंबर पर भेजी जाएंगी। साथ ही परीक्षा के दिन निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन सक्ती ने विद्यार्थियों से इस अवसर का लाभ उठाने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की है।

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न…..

रायपुर:  प्रदेश में दूसरी बार हो रहे सरगुजा ओलंपिक में सरगुजा संभाग के 6 जिलों के कुल 4 लाख 16 हजार 813 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें महिला खिलाड़ियों की संख्या पुरुषों से 69 हजार 45 अधिक है। सभी छह जिलों में विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न हो चुकी हैं। विकासखंड स्तरीय स्पर्धाओं के विजेता खिलाड़ी अब जिला स्तर पर अपना दमखम दिखाएंगे। जिला स्तर के विजेता आगामी नवम्बर में प्रस्तावित संभाग स्तरीय मुकाबलों में अपने जिलों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव की पहल पर सरगुजा क्षेत्र के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने तथा उनकी रचनात्मक और खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें खिलाड़ी के रूप में तैयार करने पिछले वर्ष से सरगुजा ओलंपिक का आयोजन प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से शासन और जनता के बीच मजबूत एवं प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने का भी लक्ष्य है। इस सोच को धरातल पर उतारने विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

पंजीयन में महिलाएं आगे, सूरजपुर से सर्वाधिक खिलाड़ी

इस साल के सरगुजा ओलंपिक के लिए 10 अगस्त से 10 सितम्बर 2026 तक पंजीयन किया गया था। इस दौरान 1 लाख 73 हजार 884 पुरुषों और 2 लाख 42 हजार 929 महिलाओं ने पंजीयन कराया। विभिन्न खेलों में भाग लेने के लिए पंजीकृत खिलाड़ियों में महिला खिलाड़ियों की संख्या पुरुष खिलाड़ियों से करीब 40 प्रतिशत अधिक है।

सरगुजा ओलंपिक में हिस्सेदारी के लिए सूरजपुर जिले से सर्वाधिक 99 हजार 322 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। वहीं बलरामपुर-रामानुजगंज के 91 हजार 995, सरगुजा के 90 हजार 116, जशपुर के 74 हजार 809, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के 33 हजार 676 और कोरिया के 26 हजार 895 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है।

विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं में दिखा दमखम, अब जिला स्तर पर मुकाबला

सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों में 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं के विजेता खिलाड़ी अब जिला स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी करेंगे। हॉकी और कुश्ती की प्रतियोगिताएं सीधे जिला स्तर पर आयोजित की जा रही हैं। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में जिला स्तरीय मुकाबले भी पूरे हो चुके हैं।

सरगुजा ओलंपिक के तहत जशपुर जिले में 29 अक्टूबर और 30 अक्टूबर को जिला स्तरीय मुकाबले निर्धारित हैं। वहीं सरगुजा, कोरिया और बलरामपुर-रामानुजगंज में 3 नवम्बर से 5 नवम्बर तथा सूरजपुर में 4 नवम्बर और 5 नवम्बर को जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। संभाग स्तरीय स्पर्धाओं का आयोजन 15 नवम्बर से 20 नवम्बर के मध्य प्रस्तावित है, जिसमें सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों के विजेता खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

12 खेलों में प्रतिस्पर्धा, सीनियर वर्ग में आयु सीमा नहीं

सरगुजा ओलंपिक में जूनियर और सीनियर, दो वर्गों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। जूनियर वर्ग में 14 वर्ष से 17 वर्ष तक के बालक-बालिकाएं भाग ले रहे हैं, जबकि सीनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों के लिए आयु का बंधन नहीं है। कुल 12 खेल विधाओं एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, कुश्ती, कराते, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और रस्साकशी में पुरूषों और महिलाओं की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने खेल प्रेमियों, अभिभावकों और नागरिकों से सरगुजा ओलंपिक की जिला स्तरीय और संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है।

समान नागरिक संहिता के प्रारूप तैयार करने में जनभागीदारी – बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव…

रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में नागरिकों और विभिन्न संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए आज बिलासपुर में संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक आयोजित की गई। देवकी नंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में आयोजित बैठक में आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और सुझाव रखे। विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में राज्य शासन द्वारा गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री शत्रुघ्न सिंह और श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्रीमती ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्री श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त श्री सुनील जैन के समक्ष समान नागरिक संहिता के प्रारूप तैयार करने बिलासपुर संभाग के आठ जिले से आए  प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे।

*पारिवारिक कानूनों में समानता और अधिकारों के संरक्षण पर जोर*

समिति के सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पारिवारिक विषयों से संबंधित दो दर्जन से अधिक कानून एवं प्रावधान प्रचलित हैं, जिनमें अनेक भिन्नताएं हैं। समान नागरिक संहिता पर विचार का उद्देश्य इन विषयों में समानता को बढ़ावा देना तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक सुदृढ़ बनाना है।

समिति के सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी अपने विभिन्न निर्णयों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता रेखांकित की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इसका संबंध विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक विषयों से है। उन्होंने बताया कि विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों और वर्तमान कानूनी व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

*पक्ष-विपक्ष में रखे विचार, परंपराओं और कानूनी सुधारों पर हुआ विमर्श*

परामर्श बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष और विपक्ष में खुलकर अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, विभिन्न समुदायों की प्रथाओं और आधुनिक कानूनी सुधारों से जुड़े अनेक पहलू सामने आए। समिति के सदस्यों ने आश्वस्त किया कि सभी सुझावों का अध्ययन कर प्रारूप तैयार किया जाएगा।

समान नागरिक संहिता के प्रारूप तैयार करने में जनभागीदारी - बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव

समिति छत्तीसगढ़ की वर्तमान विधिक स्थिति के साथ ही अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों एवं अन्य हितधारकों के सुझावों और विधिक अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक अनुशंसाएं भी दी जाएंगी।

*30 अक्टूबर तक वेबसाइट और ई-मेल से भी दे सकते हैं सुझाव*

बैठक में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की अवधारणा और इससे संबंधित प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई। आम नागरिक एवं संगठन 30 अक्टूबर तक आधिकारिक  वेबसाइट “ucc.cgstate.gov.in” (http://ucc.cgstate.gov.in) पर अपने सुझाव दे सकते हैं। सुझाव भेजने के लिए ई-मेल पता ucc-chhattisgarh@cg.gov.in भी उपलब्ध कराया गया है।

इस अवसर पर रजक समाज के अध्यक्ष श्री निलेश रजक,  मराठा समाज के अध्यक्ष-श्री शशांक चौहान,  जायसवाल समाज के अध्यक्ष श्री रमेश जायसवाल,  यादव समाज के अध्यक्ष श्री यशवंत यादव,  मुस्लिम समाज के श्री मुरजता वनक, राष्ट्रीय स्वयं सेवी संघ के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार शर्मा, साहू समाज से श्री ललित साहू, राजमहंत श्री दसोराम खाण्डे, प्रतिष्ठित नागरिक श्री सुधीर खंडेलवाल,  समाज सेवी/पत्रकार हबीब मेनन, वंदे मातरम मित्र मंडल बिलासपुर से श्री महेंद्र जैन, एडवोकेट नसीमुद्दीन अंसारी बिलासपुर, आदिवासी गोंडवाना समाज के अध्यक्ष श्री श्याम, विष्णु सोनी एल्डरमैन बिलासपुर, सूर्यकुमार खूंटे शिक्षाविद कोरबा, श्री विकास शर्मा जांजगीर, श्री वेदप्रकाश अग्रवाल बिलासपुर,  पूर्व विधायक जिला बिलासपुर श्री चंद्रप्रकाश बाजपेई के साथ ही सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, नागरिकों  की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।

कैंसर से जंग जीत चुके मरीजों की देखभाल पर फोकस, छत्तीसगढ़ में 49 डॉक्टरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण………

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कैंसर देखभाल सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और ECHO India ने संयुक्त पहल की है। इसके तहत चिकित्सा अधिकारियों के लिए Cancer Survivorship CCB ECHO Program का प्री-लॉन्च एवं ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 49 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से कैंसर का उपचार पूरा कर चुके मरीजों को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण और निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

कैंसर का उपचार पूरा होने के बाद भी मरीजों को नियमित फॉलो-अप, उपचार के दुष्प्रभावों के प्रबंधन, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता और पुनर्वास की जरूरत होती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों को कैंसर सर्वाइवरशिप केयर के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि मरीजों को उपचार के बाद भी समग्र देखभाल और उचित मार्गदर्शन मिल सके।

कार्यक्रम में NP-NCD के उप संचालक डॉ. संजीव मेश्राम राज्य सलाहकार सुश्री अभिलाषा शर्मा उपस्थित रहीं। दोनों अधिकारियों ने कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार के बाद मरीजों की देखभाल तथा नियमित फॉलो-अप के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार के बाद भी मरीजों को निरंतर स्वास्थ्य सेवाएं और समग्र देखभाल उपलब्ध कराना जरूरी है। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में कैंसर देखभाल सेवाओं को और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

CHIP Foundation की ओर से डॉ. शेखर गोवर्धन ने रिसोर्स पर्सन के रूप में योगदान दिया। संस्था इस कार्यक्रम के शैक्षणिक केंद्र (Academic Hub) के रूप में सहयोग कर रही है।

कार्यक्रम के अंतर्गत आठ मॉड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। इसके माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों की क्षमता विकसित की जाएगी, ताकि वे कैंसर से उबर चुके मरीजों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझकर उन्हें नियमित निगरानी, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं और उचित मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

ECHO India की ओर से डॉ. संदीप भल्ला (उपाध्यक्ष-प्रोजेक्ट्स), सुश्री अनिला गोस्वामी (उप महाप्रबंधक-प्रोजेक्ट्स) एवं डॉ. करण राय (वरिष्ठ महाप्रबंधक-मॉनिटरिंग, इवैल्यूएशन एवं रिसर्च) ने कार्यक्रम में सहभागिता की। छत्तीसगढ़ में इस पहल को सफलतापूर्वक शुरू करने में मार्गदर्शन और सहयोग के लिए डॉ. संदीप भल्ला एवं सुश्री अनिला गोस्वामी के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

यह पहल राज्य में कैंसर से उबर चुके मरीजों के लिए उपचार के बाद की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा उन्हें निरंतर और समग्र देखभाल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ में अवैध प्रवासियों के विरुद्ध होगी सख्त कार्रवाई – उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा….

रायपुर: छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक पूरे प्रदेश में दो माह का विशेष सघन जांच अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों, निर्माण स्थलों, किराए के मकानों, होटलों, धर्मशालाओं तथा अन्य संदिग्ध स्थानों की जांच की जाएगी। अवैध प्रवासियों को शरण देने, रोजगार उपलब्ध कराने, उन्हें दूसरे राज्यों से लाने और उनके फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में अवैध प्रवासियों के विरुद्ध होगी सख्त कार्रवाई - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में सभी जिलों के नोडल अधिकारियों की बैठक लेकर अवैध प्रवासियों की पहचान, उनकी गतिविधियों की निगरानी और रोकथाम के लिए व्यापक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सभी जिलों में एक साथ सुनियोजित अभियान चलाया जाए। प्रत्येक संदिग्ध मामले की गहराई से जांच कर उससे जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाया जाए।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि भारत को धर्मशाला नहीं बनने देना है। किसी व्यक्ति का लंबे समय से भारत में निवास करना अपने आप में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड जैसे पहचान संबंधी दस्तावेज नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि संदिग्ध व्यक्तियों की नागरिकता और निवास की वैधता का निर्धारण केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानक प्रक्रिया और प्रचलित कानूनों के अनुसार किया जाए। उन्होंने बांग्लादेश से आए लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी एकत्र कर उनका रिकॉर्ड तैयार करने के भी निर्देश दिए।

*औद्योगिक क्षेत्रों और निर्माण स्थलों पर होगी विशेष जांच*

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि सस्ते श्रम के लालच में कुछ औद्योगिक ठेकेदार, सड़क एवं भवन निर्माण ठेकेदार, कुटीर उद्योग तथा गुड़ उद्योग के संचालक अवैध प्रवासियों को काम और आश्रय उपलब्ध कराते हैं। ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच की जाए। उन्होंने व्यवसायियों और ठेकेदारों से अपील की कि वे बिना वैध दस्तावेजों वाले विदेशी नागरिकों को रोजगार पर न रखें तथा नियमानुसार श्रमिकों का सत्यापन सुनिश्चित करें। उन्होंने रायपुर, कोरबा और रायगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक नगरों के साथ प्रदेश के अन्य जिलों में भी संवेदनशील क्षेत्रों और संभावित हॉटस्पॉट का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए। इन स्थानों पर एक साथ सघन जांच अभियान चलाया जाएगा।

*किराएदारों, होटल और धर्मशाला संचालकों की भी होगी जांच*

उप मुख्यमंत्री ने मकान मालिकों को किराए पर मकान देने से पहले किराएदारों के आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने तथा उनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने किराएदारों की जानकारी साझा करने के लिए बनाए गए ऐप को सक्रिय करने और उसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। होटल, लॉज, धर्मशाला और अन्य आवासीय प्रतिष्ठानों में ठहरने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। अवैध प्रवासियों को जानबूझकर शरण देने या उन्हें लाने में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी।

*ग्राम सभाओं और पार्षदों के सहयोग से होगी पहचान*

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का सहयोग भी लिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी, वहीं नगरीय क्षेत्रों में पार्षदों के साथ बैठक कर ऐसे मामलों की पहचान और सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने गांव-गांव जाकर सामान बेचने वाले फेरीवालों तथा विभिन्न कार्यों के लिए बाहर से आने वाले व्यक्तियों की भी जांच करने के निर्देश दिए। ऐसे व्यक्तियों के कार्य प्रारंभ करने से पहले पुलिस अधीक्षक कार्यालय में पंजीयन की व्यवस्था करने तथा इसके लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल अधिकारी निर्धारित करने को कहा।

*अवैध प्रवासियों की जानकारी के लिए बनेगा विशेष सॉफ्टवेयर*

उप मुख्यमंत्री ने अवैध प्रवासियों की पहचान और निगरानी के लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित करने के निर्देश दिए। इसमें संदिग्ध व्यक्तियों से संबंधित जानकारी, दस्तावेजों के सत्यापन और विभिन्न जिलों में की गई जांच का विवरण संधारित किया जाएगा। इससे किसी व्यक्ति के संबंध में एक जिले में हुई जांच की जानकारी अन्य जिलों को भी उपलब्ध हो सकेगी और कार्रवाई में बेहतर समन्वय स्थापित होगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल ऐप के माध्यम से संचालित संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए।

*फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वालों पर होगी कार्रवाई*

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने फर्जी आधार कार्ड, पासपोर्ट तथा अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने वाले व्यक्तियों और इसमें संलिप्त सेवा केंद्रों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फर्जी पाए गए आधार कार्डों को संबंधित प्राधिकरण के माध्यम से नियमानुसार निष्क्रिय कराया जाए। जिन मामलों में अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों के पासपोर्ट बनाए जाने की आशंका है, उनकी तह तक जांच की जाए। दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें जारी कराने तक की पूरी प्रक्रिया में शामिल दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने अन्य राज्यों के ऐसे क्षेत्रों, जहां से संदिग्ध व्यक्तियों के पहचान पत्र बनाए जाने की जानकारी मिलती है, वहां की राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर विस्तृत जांच करने के निर्देश भी दिए।

*अवैध प्रवासियों की पहचान के बाद नियमानुसार होगी निर्वासन की कार्रवाई*

उप मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि संदिग्ध व्यक्तियों की त्वरित जांच कर उनकी नागरिकता एवं निवास संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए। अवैध प्रवासी पाए जाने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करते हुए आवश्यकता अनुसार होल्डिंग सेंटर में रखने और उसके बाद निर्वासन (डिपोर्टेशन) की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि किसी एक संदिग्ध व्यक्ति की पहचान तक ही जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे आश्रय देने, रोजगार उपलब्ध कराने, फर्जी दस्तावेज बनवाने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच की जाए।

उन्होंने मुंगेली और बेमेतरा जिलों में चोरी के मामलों तथा अन्य नौ आपराधिक प्रकरणों में अवैध प्रवासियों की संदिग्ध संलिप्तता के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए ऐसे मामलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध प्रवास और इससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोकथाम के लिए पुलिस और संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध घुसपैठ से स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसर प्रभावित होने और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसी आशंकाओं को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से प्रत्येक मामले में तथ्यात्मक जांच और कानूनी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।

*संदिग्ध अवैध प्रवासियों की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800-233-1905 पर दें*

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने प्रदेशवासियों से भी इस अभियान में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के अवैध रूप से देश में रहने की जानकारी या संदेह होने पर नागरिक टोल फ्री नंबर 1800-233-1905 पर सूचना दे सकते हैं। प्राप्त सूचनाओं की संबंधित एजेंसियों द्वारा जांच की जाएगी।

बैठक में गृह सचिव सुश्री नेहा चंपावत ने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान और जांच केंद्रीय गृह मंत्रालय की निर्धारित मानक प्रक्रिया के अनुसार की जाए। बाहर से आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जाए तथा सभी संबंधित एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।

पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम ने अब तक की गई कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक प्रकरण को केवल एक व्यक्ति तक सीमित न रखा जाए। उसकी विस्तृत जांच कर उससे जुड़े पूरे नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों तथा अन्य सहयोगियों की पहचान की जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों को मानक प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में सचिव सुश्री नेहा चंपावत, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) श्री अमित कुमार, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री ओ.पी. पाल सहित सभी जिलों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी….

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती-किसानी को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कृषि विविधीकरण तथा कृषि आधारित सहायक आजीविका गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है। शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेकर प्रदेश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य गतिविधियों को अपनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जशपुर जिले के ग्राम सोगड़ा निवासी प्रगतिशील महिला किसान श्रीमती संजीता एक्का इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय मत्स्य पालन, बत्तख पालन और सुकर पालन को अपनाकर अपने परिवार के लिए आय के नए अवसर विकसित किए हैं।

सीमित आमदनी से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

श्रीमती संजीता एक्का अपने पति श्री ईश्वर राम एक्का के साथ मिलकर खेती-किसानी और विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रही हैं। पहले उनका परिवार मुख्य रूप से खरीफ सीजन में धान की खेती पर निर्भर था। खेती से होने वाली सीमित आमदनी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने आय के वैकल्पिक साधनों की तलाश शुरू की।

संजीता ने पारंपरिक खेती के साथ सबसे पहले मत्स्य पालन को अपनाया। इस गतिविधि से बेहतर लाभ मिलने पर उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने बत्तख पालन तथा सुकर पालन को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया। आज वे खेती के साथ इन सहायक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं, जिससे परिवार की आय के स्रोतों में विविधता आई है और केवल एक फसल पर निर्भरता कम हुई है।

मत्स्य पालन से मिली नई दिशा, बत्तख और सुकर पालन ने बढ़ाए आय के अवसर

श्रीमती संजीता एक्का बताती हैं कि पहले वे अपने पति के साथ केवल धान की खेती करती थीं, लेकिन इससे अपेक्षाकृत कम लाभ मिलता था। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन शुरू किया, जिससे उन्हें धान की खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने लगा। इस अनुभव ने उन्हें कृषि आधारित अन्य व्यवसायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मत्स्य पालन के साथ बत्तख और सुकर पालन शुरू करने से उनकी आजीविका को नया आधार मिला है। अलग-अलग गतिविधियों से आय अर्जित करने के अवसर बढ़ने के साथ खेती में होने वाले मौसमी उतार-चढ़ाव पर निर्भरता भी कम हुई है। संजीता का मानना है कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय अपनी भूमि, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सहायक व्यवसाय भी अपनाने चाहिए।

धान के बाद आलू और गेहूं की खेती, लीची की बागवानी से भविष्य की तैयारी

संजीता एक्का ने खेती में फसल विविधीकरण को भी विशेष महत्व दिया है। वे बरसात के मौसम में धान की खेती करती हैं, जबकि गर्मी के मौसम में आलू और गेहूं जैसी फसलों का उत्पादन करती हैं। इससे कृषि भूमि का अलग-अलग मौसम में बेहतर उपयोग हो रहा है और अतिरिक्त आमदनी की संभावनाएं बढ़ी हैं।

 धान की पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर मत्स्य, बत्तख और सुकर पालन से संजीता एक्का ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

इसके साथ ही उन्होंने अपने खेत में लीची के पौधे लगाकर बागवानी की भी शुरुआत की है। लीची के पौधे भविष्य में फल उत्पादन से अतिरिक्त आय का साधन बन सकते हैं। वहीं, पौधरोपण से मिट्टी के कटाव को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।संजीता का मानना है कि खेती में नए प्रयोग और विविध फसलों को अपनाना किसानों की आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय कृषि, पशुपालन और बागवानी को साथ लेकर चलने से उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।

सोलर फेंसिंग से खेती की सुरक्षा, आधुनिक तकनीक का भी कर रहीं उपयोग

कृषि गतिविधियों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए संजीता एक्का ने अपने खेत के पास सोलर फेंसिंग भी लगवाई है। इससे फसलों की सुरक्षा में मदद मिल रही है। खेती में आधुनिक तकनीक और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर वे कृषि कार्यों को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं।

शासन की विभिन्न योजनाओं और जिला प्रशासन से मिले सहयोग का लाभ उठाकर वे मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और फसल विविधीकरण जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं। उनकी यह पहल दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और स्वयं की मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार, अन्य किसानों को भी कर रहीं प्रेरित

श्रीमती संजीता एक्का ने अपनी प्रगति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि शासन की योजनाओं से किसानों को खेती के साथ अन्य आजीविका गतिविधियां अपनाने में सहयोग मिल रहा है। वे अपने अनुभवों के आधार पर गांव के अन्य किसानों को भी धान की खेती के साथ मत्स्य पालन, पशुपालन, बागवानी और अन्य फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि किसान यदि अपनी परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप खेती में बदलाव लाएं, तो आय के नए साधन विकसित कर सकते हैं।

महिला सशक्तीकरण और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रेरक मिसाल

संजीता एक्का की सफलता यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार और विविधीकरण अपनाकर ग्रामीण परिवार आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर न केवल पारंपरिक खेती के स्वरूप में बदलाव किया है, बल्कि मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सुकर पालन और बागवानी को जोड़कर आजीविका का एक विविधतापूर्ण मॉडल भी विकसित किया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को दिए जा रहे प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण की संभावनाएं मजबूत हो रही हैं। संजीता एक्का जैसी प्रगतिशील महिला किसानों की पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण है।

आज संजीता एक्का की पहचान केवल एक किसान के रूप में नहीं, बल्कि नई सोच और मेहनत से अपनी आजीविका को मजबूत बनाने वाली महिला के रूप में हो रही है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि खेती में बदलाव की पहल छोटे स्तर से भी की जा सकती है। दृढ़ संकल्प, मेहनत और योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की खुशहाली के साथ गांव की आर्थिक प्रगति में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में साकार हो रहे गरीब परिवारों के पक्के आवास के सपने, जयानंदन दास को मिला सुरक्षित आशियाना….

रायपुर: हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसके सिर पर अपनी पक्की छत हो, जहां वह परिवार के साथ सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सके। आर्थिक अभाव के कारण अनेक जरूरतमंद परिवारों के लिए यह सपना वर्षों तक अधूरा रह जाता है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ऐसे ही परिवारों के सपनों को साकार कर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटया निवासी जयानंदन दास का वर्षों पुराना पक्के घर का सपना साकार हुआ है। कभी मिट्टी के कच्चे मकान में अनेक परेशानियों के बीच जीवन गुजारने वाले जयानंदन दास आज अपने पक्के आवास में परिवार के साथ सुरक्षित और सुकून भरा जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

कच्चे मकान में हर बरसात बन जाती थी चुनौती

जयानंदन दास बताते हैं कि पहले उनका परिवार मिट्टी के कच्चे मकान में रहता था। बरसात का मौसम आते ही परेशानियां बढ़ जाती थीं। छत से पानी टपकने, दीवारों में सीलन और मकान के क्षतिग्रस्त होने का डर हमेशा बना रहता था। घर में चूहों की समस्या भी परेशान करती थी। बारिश के दौरान घर और घरेलू सामान को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होती थी। कभी मकान की टूट-फूट तो कभी मरम्मत की जरूरत के कारण परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। सीमित संसाधनों के कारण पक्का मकान बनवाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा था, लेकिन बेहतर और सुरक्षित घर की उम्मीद उन्होंने कभी नहीं छोड़ी।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से उनकी यह उम्मीद हकीकत में बदल गई। योजना के तहत आवास का लाभ मिलने के बाद उन्होंने अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा कर लिया है। अब उनका परिवार मजबूत छत के नीचे सुरक्षित महसूस करता है। बरसात में पानी टपकने, सीलन और बार-बार मरम्मत कराने जैसी परेशानियों से उन्हें राहत मिली है। जयानंदन दास के लिए यह आवास केवल रहने का स्थान नहीं, बल्कि वर्षों की कठिनाइयों से मुक्ति और बेहतर भविष्य की नई शुरुआत है।

पक्का घर मिलने से लौटी खुशियां, मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद

अपने पक्के आवास को लेकर जयानंदन दास बेहद खुश हैं। वे स्थानीय बोली में अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहते हैं, “पहिली मिट्टी के घर रहिस सर, बहुत समस्या रहिस। बरखा पानी म परेशानी होवत रहिस, चूहे घर मन घलो दिक्कत रहिस। अब पक्का घर बन गे हे, पानी ले बचत हन, अब मरम्मत के चिंता नइ हे। प्रधानमंत्री आवास योजना ले मोला आवास मिलिस हे, एकर बर विष्णु भईया ला बहुत-बहुत धन्यवाद।”
जयानंदन दास बताते हैं कि पक्का मकान बनने से उनके परिवार की वर्षों पुरानी चिंता दूर हो गई है। अब बारिश के मौसम में पहले जैसी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने बताया कि गांव के अन्य पात्र परिवारों को भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है और उनके पक्के घर बन रहे हैं। उन्होंने इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा सुरक्षित जीवन का आधार

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराकर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर जीवन के लिए स्थायी आधार प्रदान करना भी है। पक्के मकान मिलने से परिवारों को मौसम की मार, असुरक्षित आवास और बार-बार मरम्मत की परेशानियों से राहत मिल रही है।

सरगुजा जिले के जयानंदन दास की सफलता की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है। कभी बरसात में टपकती छत और मिट्टी की दीवारों के बीच जीवन गुजारने वाला उनका परिवार आज अपने पक्के घर में सुकून से रह रहा है। उनके चेहरे की खुशी और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त आभार इस बात को दर्शाते हैं कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं किस तरह जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। जयानंदन दास का पक्का आशियाना सुरक्षित जीवन, आत्मसम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीदों का नया आधार बन गया है।

चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी वर्षा की गतिविधियां, किसानों के लिए मौसम आधारित सलाह जारी….

रायपुर: द क्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने से विकसित हो रही चक्रवाती परिस्थितियों का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी 28 एवं 29 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में वर्षा होने तथा कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को फसलों, सब्जियों, फलदार पौधों और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।

पूर्वानुमान के अनुसार 27 अक्टूबर को प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में वर्षा की गतिविधियां अधिक रहने की संभावना है। 28 एवं 29 अक्टूबर को सभी जिलों में वर्षा का पूर्वानुमान है। वर्षा के कारण रात के तापमान में वृद्धि होने से आगामी कुछ दिनों तक ठंड का प्रभाव कम रहने की संभावना है।

मौसम की संभावित स्थिति को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई अगले दो से तीन दिनों तक टालें। जिन किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं तथा खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था करें। फसलों में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार करें। तिवरा एवं अलसी की उत्तेरा फसल लेने वाले किसान फिलहाल बुवाई स्थगित रखें। रबी फसलों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है।

सब्जियों एवं फलदार पौधों की सुरक्षा के लिए भी विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तेज हवा और वर्षा की संभावना को देखते हुए लौकी, करेला जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा देने की व्यवस्था करें तथा जिन केले के पौधों में फूल या फल आ चुके हैं, उन्हें बांस से सहारा दें। रबी मौसम की सब्जियों की बुवाई नवंबर के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करने की सलाह दी गई है।

वहीं पशुपालक अपने पशुओं को सूखे एवं सुरक्षित स्थानों पर रखें, उनके लिए चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा वज्रपात की आशंका के दौरान पशुओं को चराते समय पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें। किसानों से अपील की गई है कि वे आगामी दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और खेतों में जल निकासी सहित फसलों एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए समय रहते आवश्यक प्रबंध करें।

सात दिनों में सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को पूरा करना होगा जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया…..

रायपुर: सरगुजा संभाग में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान और पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। संभाग के सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम को सात दिनों के भीतर जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। सभी स्वास्थ्य संस्थानों को नियमानुसार प्राधिकार (ऑथराइजेशन) प्राप्त करने के साथ ही अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) से संबद्धता सुनिश्चित करनी होगी। सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने आज अंबिकापुर में आयोजित अंतरविभागीय बैठक में इस संबंध में सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन के नियमों का उल्लंघन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

संभागायुक्त श्री दुग्गा ने कमिश्नर कार्यालय में आयोजित बैठक में संभाग के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को निर्देशित किया कि शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित नियमों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों, क्लीनिकों और नर्सिंग होम से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सुरक्षित संग्रहण एवं वैज्ञानिक तरीके से निष्पादन जनस्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेन्द्र कुमार दुग्गा ने दिए सख्त निर्देश, नियमों का उल्लंघन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों पर होगी कार्रवाई

संभागायुक्त ने सभी सीएमएचओ को अपने-अपने जिलों के शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन में पाई जाने वाली कमियों को तत्काल दूर कराया जाए। निर्धारित नियमों और प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सात दिनों के भीतर सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों की आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराने और निर्देशों के अनुपालन की नियमित समीक्षा करने को कहा।

बैठक में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के नियमित संग्रहण एवं निष्पादन की व्यवस्था को निर्बाध बनाए रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। संभागायुक्त श्री दुग्गा ने अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी से संबंधित देयकों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भुगतान में विलंब के कारण अपशिष्ट संग्रहण एवं निष्पादन की व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। पर्यावरण प्रदूषण की रोकथाम और आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए सभी संबंधित विभाग और स्वास्थ्य संस्थान आपसी समन्वय से कार्य करें।

बैठक में कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रतिनिधि, उपायुक्त (विकास) श्री आर.के. खुटे, संयुक्त संचालक स्वास्थ्य डॉ. कपिलदेव पैकरा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

सीएम हेल्पलाइन 1076 से जय को मिली राहत, जन्म प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि हुई दूर….

रायपुर: सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान और शासकीय सेवाओं को सुलभ बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। दुर्ग जिले के धमधा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत ओटेबंद निवासी श्री जय कुमार गायकवाड़ को जन्म प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि सुधारने के लिए दर्ज शिकायत पर राहत मिली है। ग्राम पंचायत द्वारा आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई कर उन्हें संशोधित जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया।

तहसील अहिवारा अंतर्गत ग्राम ओटेबंद निवासी श्री जय कुमार गायकवाड़ अपने जन्म प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि के कारण परेशान थे। समस्या के समाधान के लिए उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संबंधित ग्राम पंचायत तक पहुंचने के बाद नाम सुधार की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। आवेदक द्वारा प्रस्तुत आवेदन, शपथ पत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई।

दस्तावेजों के आधार पर जारी हुआ संशोधित जन्म प्रमाण पत्र

ग्राम पंचायत द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत 19 अगस्त 2025 को संशोधित जन्म प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर आवेदक को उपलब्ध कराया गया। प्रमाण पत्र में नाम की त्रुटि दूर होने से श्री गायकवाड़ को राहत मिली। अब वे शासकीय एवं अन्य आवश्यक कार्यों में संशोधित प्रमाण पत्र का उपयोग कर सकेंगे।

आम नागरिकों की समस्याओं के निराकरण का सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 नागरिकों को अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे प्रशासन तक पहुंचाने की सुविधा प्रदान कर रही है। प्राप्त शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई कर समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। श्री जय कुमार गायकवाड़ की समस्या का निराकरण इसका एक उदाहरण है। जनसमस्याओं का समयबद्ध समाधान, शासकीय सेवाओं में पारदर्शिता और नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से राहत दिलाना राज्य शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।