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*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सौगात से केरसई में महतारी सदन बनकर तैयार, महिलाओं को मिलेंगी सुविधाएं, जिले में 18 महतारी सदनों का हो रहा निर्माण, 29 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा प्रत्येक महतारी सदन…*

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सौगात से केरसई में महतारी सदन बनकर तैयार, महिलाओं को मिलेंगी सुविधाएं*

*जिले में 18 महतारी सदनों का हो रहा निर्माण, 29 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा प्रत्येक महतारी सदन*

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में जिले में महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में केरसई में महतारी सदन बनकर तैयार हो गया है। महतारी सदन के तैयार होने से क्षेत्र की महिलाओं को विभिन्न सामुदायिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

जिले में महिलाओं की सुविधा और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुल 18 महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। प्रत्येक महतारी सदन के निर्माण पर 29 लाख रुपये की लागत निर्धारित है। इन भवनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को एक स्थान पर एकत्रित होकर बैठक, चर्चा और अन्य सामूहिक गतिविधियां संचालित करने की सुविधा मिल सकेगी।

महिलाओं को मिलेगा सुविधाजनक स्थान

महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के लिए उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित होंगे। यहां महिलाओं को आपसी संवाद, सामूहिक बैठक, जागरूकता कार्यक्रम तथा महिला समूहों की गतिविधियों के संचालन में सुविधा मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने और सामुदायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

केरसई में महतारी सदन का निर्माण पूरा होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जिले के अन्य स्थानों पर भी महतारी सदनों का निर्माण होने से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं की सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत महतारी सदन महिलाओं को सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राष्ट्रीय एकता दिवस: अखंडता का संकल्प: सरदार पटेल और मजबूत भारत का सपना…..

रायपुर:  भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का पालन किया जाता है, फिर भी देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने वाली भावना है-राष्ट्रीय एकता। यह एकता केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि हर नागरिक स्वयं को देश के साझा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।

हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ-साथ आज के भारत में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी का एहसास कराता है।

*सरदार पटेल ने रखी एकीकृत भारत की मजबूत नींव*

वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बाद देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, समझदारी और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया,  जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोया। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया जाता है। सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि विभिन्न विचारों, हितों और पहचानों के बीच तालमेल बनाकर ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।

*आज विकास के साथ एकता को मजबूत करना भी जरूरी*

आज भारत के सामने चुनौती रियासतों को एकजुट करने की नहीं, बल्कि विकास के लाभों को देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक पहुँचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, केवल बुनियादी ढाँचे का विकास ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें, सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ हों और उनकी आवश्यकताओं को उचित महत्व दिया जाए।

लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय एकता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब तक पूरा राष्ट्र एकता की भावना से बंध नहीं जाता, तब तक देश में कोई विकास या आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसलिए, राष्ट्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रीय एकीकरण की रक्षा के लिए हमें एक मजबूत राष्ट्र की आवश्यकता है। अतः जाति, क्षेत्रवाद, धर्म आदि पर केंद्रित संकीर्ण सोच से दूर रहकर हमें विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएँ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की नींव को मजबूत करता है।

*सहकारी संघवाद से मजबूत होगा देश*

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर मिलकर काम करने से विकास को गति मिलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाए। जब विभिन्न सरकारें और संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित को प्राथमिकता देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक स्वयं को देश की विकास यात्रा से जुड़ा हुआ महसूस करें।

*विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत*

भारत की एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक जैसी भाषा बोलें, एक जैसी परंपराएँ अपनाएँ या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक ताकत इस बात में है कि अलग-अलग पहचान और जीवनशैली वाले लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रह सकें। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी भी सूचना की सत्यता जाँचना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी कार्यक्रमों या संदेशों से कायम नहीं रह सकती। इसे मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान का होना आवश्यक है।

*‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’से बढ़ेगी आपसी समझ*

देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जाता है। शैक्षणिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतरराज्यीय यात्राएँ और विभिन्न क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित कर सकते हैं। 1 से 15 नवंबर 2026 तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर भारत पर्व का आयोजन भी किया जाएगा।

युवा देश का भविष्य हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देते हैं, तब एक मजबूत और समावेशी भारत का मार्ग प्रशस्त होता है।

*राष्ट्रीय एकता एक निरंतर जिम्मेदारी*

राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा कर्तव्य है। देश की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस एकता को और मजबूत बनाए।

राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि देश का प्रत्येक नागरिक एक जैसा सोचे, बल्कि यह है कि अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद सभी एक साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़े हों। सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।

राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और संगठित बनाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक साथ बांधे रखती है। अनेक भिन्नताओं के बावजूद, सभी लोग एक-दूसरे के साथ पारस्परिक सद्भाव में रहते हैं। हमारे देश जैसी विविधता अन्य देशों में नहीं पाई जाती। यहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों, धर्मो के लोग, जिनकी जीवनशैली, संस्कृति, भाषाएँ और रीति-रिवाज बिल्कुल भिन्न हैं, फिर भी एक साथ रहते हैं। भारत में ये सभी राष्ट्रीय एकता के धागे से बंधे हुए हैं।

सत्य साईं अस्पताल में सेवा दे रहीं छत्तीसगढ़ की बेटियों से मिले वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी…..

रायपुर: वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज सत्य साईं अस्पताल में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और पिथौरा से आई उन बेटियों से मुलाकात की, जो यहां सेवा दे रही हैं। उनसे मिलकर श्री चौधरी ने उनकी लगन और आत्मविश्वास को सराहा और कहा कि उन्हें देखकर गर्व का अनुभव हुआ।

रायपुर : सत्य साईं अस्पताल में सेवा दे रहीं छत्तीसगढ़ की बेटियों से मिले वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

इस अवसर पर श्री चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में अवसर मिलें, यह जरूरी है।

श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर में आ रहे नए संस्थानों में भी प्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए संस्थानों और प्रबंधन के साथ संवाद इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।

 

बस्तर ओलंपिक 2026 : 30 अक्टूबर तक पंजीयन का अंतिम अवसर, अब तक 72,811 लोगों ने कराया पंजीयन….

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के बहुप्रतीक्षित बस्तर ओलंपिक 2026 का आगाज होने जा रहा है। “हमारा खेल, हमारा बस्तर, हमारी पहचान” की थीम पर आयोजित इस खेल महोत्सव में बस्तर की खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता और हुनर दिखाने का बड़ा मंच मिलेगा। 1 से 30 अक्टूबर तक पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। खास बात यह है कि सुकमा जिले में खेलों को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब तक 72,811 खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन करा लिया है।

सुकमा जिले के विकासखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो छिन्दगढ़ 31,989 पंजीयनों के साथ सबसे आगे है। वहीं कोंटा से 17063 और सुकमा विकासखंड से 23759 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। जिले में कुल 22241 पुरुष और 50,570 महिला प्रतिभागियों की विभिन्न श्रेणियों में दर्ज भागीदारी खेलों के प्रति युवाओं और महिलाओं के बढ़ते रुझान को दर्शाती है। यह उत्साह बस्तर ओलंपिक के व्यापक प्रभाव और सफल आयोजन की उम्मीदों को और मजबूत कर रहा है।

11 खेलों में होगा प्रतिभा का प्रदर्शन। एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, कराते, कबड्डी, वॉलीबॉल और खो-खो सहित कुल 11 खेल विधाओं में खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता में 14 से 17 वर्ष के जूनियर वर्ग के साथ सीनियर महिला एवं पुरुष वर्ग के खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे। मुकाबलों का पहला चरण 1 से 13 नवंबर तक विकासखंड स्तर पर, दूसरा चरण 16 से 25 नवंबर तक जिला स्तर पर और अंतिम चरण 7 से 11 दिसंबर तक संभाग स्तर पर आयोजित किया जाएगा।

बस्तर के खेल मैदानों से निकलेगी नई पहचान मिलेगी। जिला प्रशासन के द्वारा मोबाइल लिंक अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जबकि आधार कार्ड नंबर अनिवार्य रखा गया है। बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं की प्रतिभा को पहचान, अवसर और नई दिशा देने का अभियान है। अब बस्तर के हजारों खिलाड़ियों की निगाहें मैदान पर हैंकृजहां वे अपने हुनर का दम दिखाएंगे और खेल के जरिए बस्तर और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का सपना साकार करेंगे।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 की तैयारियों का किया निरीक्षण….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन को लेकर चल रही तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने नवा रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल, विकसित भारत संकल्प पार्क (पीपल वन) तथा तूता गांव क्षेत्र का दौरा कर कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आयोजन को भव्य, सुव्यवस्थित, सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 की तैयारियों का किया निरीक्षण

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली परंपराओं और विकास यात्रा को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस आयोजन में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का प्रस्तावित आगमन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यक्रम से जुड़ी सभी तैयारियां आपसी समन्वय के साथ समय-सीमा में पूरी की जाएं, ताकि आयोजन में शामिल होने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आयोजन स्थलों पर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने नवा रायपुर के विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर चल रही तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने आयोजन स्थलों की साफ-सफाई, आवागमन, पार्किंग, सुरक्षा तथा आगंतुकों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यक्रम स्थलों पर नागरिकों के सुगम आवागमन और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाए।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 की तैयारियों का किया निरीक्षण

राज्योत्सव की गरिमा के अनुरूप हों सभी तैयारियां

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्योत्सव प्रदेशवासियों के लिए गौरव और उत्साह का अवसर है। ऐसे में आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि तैयारियों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी स्तर पर कमी पाए जाने पर उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

श्री चौधरी ने कहा कि राज्योत्सव के दौरान प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और विकास की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ आगंतुकों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से आयोजन की तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस दौरान नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रख्यात लोक कलाकार विक्रम यादव के निधन पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जताया गहरा शोक….

रायपुर: वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ़ के प्रख्यात बीन एवं बाँस वादक तथा तुलसी सम्मान से सम्मानित लोक कलाकार श्री विक्रम यादव के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि श्री विक्रम यादव जी का निधन छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि श्री विक्रम यादव जी ने अपनी विशिष्ट कला, प्रतिभा और साधना से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दी। बीन एवं बाँस वादन की पारंपरिक कला के संरक्षण और संवर्धन में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा है। लोककला के प्रति उनका समर्पण और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उनके प्रयास सदैव स्मरणीय रहेंगे।

श्री चौधरी ने दिवंगत लोक कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके निधन से छत्तीसगढ़ ने लोक संस्कृति के एक समर्पित साधक को खो दिया है। दुःख की इस घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएं शोकसंतप्त परिजनों एवं प्रशंसकों के साथ हैं।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।

*कार्तिक मास में भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु, पमशाला के श्री राधा-कृष्ण मंदिर में चल रहा भजन-कीर्तन, ईब नदी तट स्थित मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम गूंज रहे भक्ति के स्वर, क्षेत्र की कीर्तन मंडलियां ले रही हैं भाग…*

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*कार्तिक मास में भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु, पमशाला के श्री राधा-कृष्ण मंदिर में चल रहा भजन-कीर्तन*

*ईब नदी तट स्थित मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम गूंज रहे भक्ति के स्वर, क्षेत्र की कीर्तन मंडलियां ले रही हैं भाग*

जशपुरनगर। कार्तिक मास के पावन अवसर पर ईब नदी तट स्थित श्री राधा-कृष्ण मंदिर, पमशाला में महीने भर चलने वाले भजन-कीर्तन कार्यक्रम का शुभारंभ हो गया है। 27 अक्टूबर से 24 नवंबर तक आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर भगवान श्री राधा-कृष्ण की आराधना कर रहे हैं। मंदिर परिसर में प्रतिदिन भजन-कीर्तन से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन सुबह 8 बजे और शाम 5 बजे से भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें क्षेत्र की विभिन्न कीर्तन मंडलियां शामिल होकर भक्ति गीतों की प्रस्तुति दे रही हैं। भजन-कीर्तन के माध्यम से श्रद्धालु भगवान की भक्ति में रम रहे हैं और मंदिर परिसर भक्तिमय स्वर से गूंज रहा है।

*भजन-कीर्तन में शामिल होने श्रद्धालुओं से अपील*

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी एवं अखिल भारतीय कंवर समाज की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती कौशल्या साय ने श्रद्धालुओं और क्षेत्र की भजन-कीर्तन मंडलियों से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।अखिल भारतीय कंवर समाज, पमशाला के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समाज के लोग जुटे हुए हैं। कार्तिक मास के दौरान आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक साधना से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।

*24 नवंबर तक चलेगा यह धार्मिक आयोजन*

श्री राधा-कृष्ण मंदिर पमशाला में 24 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह और शाम भजन-कीर्तन जारी रहेगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। क्षेत्र के श्रद्धालु इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान श्री राधा-कृष्ण की भक्ति में समय व्यतीत कर रहे हैं।

मेधावी विद्यार्थियों को इसरो, अहमदाबाद के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाएगा जिला प्रशासन सक्ती, कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए 15 नवंबर को होगी चयन परीक्षा….

रायपुर: जिला प्रशासन सक्ती द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को इसरो, अहमदाबाद के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जा रहा है। मई माह में हुए सफल एयरपोर्ट भ्रमण के बाद जिला प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान की गतिविधियों को करीब से जानने और समझने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह शैक्षणिक भ्रमण पूरी तरह निःशुल्क होगा। इस भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को इसरो में असली सैटेलाइट देखने, वैज्ञानिकों से मिलने और उनसे बातचीत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही अहमदाबाद के अन्य प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण कराया जाएगा।
इस शैक्षणिक भ्रमण के लिए चयन परीक्षा का आयोजन 15 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक किया जाएगा।

परीक्षा की अवधि 2 घंटे होगी, जिसमें 100 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा एप्टीट्यूड आधारित होगी, जिसमें सामान्य ज्ञान, तार्किक क्षमता, गणित एवं रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से संबंधित प्रश्न शामिल होंगे। विद्यार्थी पंजीकरण फॉर्म में अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा केंद्र का चयन कर सकते हैं। विद्यार्थियों का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
इस शैक्षणिक भ्रमण के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी पात्र होंगे। पंजीकरण की अंतिम तिथि 9 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। भ्रमण की प्रस्तावित तिथि 22 से 26 नवंबर 2026 तक है।

ऑनलाइन पंजीकरण एवं अभ्यास प्रश्न बैंक की सुविधा

इच्छुक विद्यार्थी https://docs.google.com/forms/d/1BdB1DBCJLMhUAgYROXjq-GU1qA2VEfvzQPvgLilCYr8/viewform लिंक के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। फॉर्म में अभ्यास के लिए सैंपल प्रश्न बैंक भी उपलब्ध कराया गया है। विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से पहले प्रश्न बैंक को अवश्य हल करें। विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की गई है कि पंजीकरण फॉर्म में सही मोबाइल नंबर (व्हाट्सऐप नंबर) दर्ज करें, क्योंकि परीक्षा एवं चयन संबंधी सूचनाएं इसी नंबर पर भेजी जाएंगी। साथ ही परीक्षा के दिन निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचना सुनिश्चित करें। जिला प्रशासन सक्ती ने विद्यार्थियों से इस अवसर का लाभ उठाने तथा अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की है।

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न…..

रायपुर:  प्रदेश में दूसरी बार हो रहे सरगुजा ओलंपिक में सरगुजा संभाग के 6 जिलों के कुल 4 लाख 16 हजार 813 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें महिला खिलाड़ियों की संख्या पुरुषों से 69 हजार 45 अधिक है। सभी छह जिलों में विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न हो चुकी हैं। विकासखंड स्तरीय स्पर्धाओं के विजेता खिलाड़ी अब जिला स्तर पर अपना दमखम दिखाएंगे। जिला स्तर के विजेता आगामी नवम्बर में प्रस्तावित संभाग स्तरीय मुकाबलों में अपने जिलों का प्रतिनिधित्व करेंगे।

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न

सरगुजा ओलंपिक में 4.16 लाख खिलाड़ियों का पंजीयन, विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं संपन्न

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव की पहल पर सरगुजा क्षेत्र के युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ने तथा उनकी रचनात्मक और खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें खिलाड़ी के रूप में तैयार करने पिछले वर्ष से सरगुजा ओलंपिक का आयोजन प्रारंभ किया गया है। इसके माध्यम से शासन और जनता के बीच मजबूत एवं प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने का भी लक्ष्य है। इस सोच को धरातल पर उतारने विकासखंड, जिला और संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

पंजीयन में महिलाएं आगे, सूरजपुर से सर्वाधिक खिलाड़ी

इस साल के सरगुजा ओलंपिक के लिए 10 अगस्त से 10 सितम्बर 2026 तक पंजीयन किया गया था। इस दौरान 1 लाख 73 हजार 884 पुरुषों और 2 लाख 42 हजार 929 महिलाओं ने पंजीयन कराया। विभिन्न खेलों में भाग लेने के लिए पंजीकृत खिलाड़ियों में महिला खिलाड़ियों की संख्या पुरुष खिलाड़ियों से करीब 40 प्रतिशत अधिक है।

सरगुजा ओलंपिक में हिस्सेदारी के लिए सूरजपुर जिले से सर्वाधिक 99 हजार 322 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। वहीं बलरामपुर-रामानुजगंज के 91 हजार 995, सरगुजा के 90 हजार 116, जशपुर के 74 हजार 809, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के 33 हजार 676 और कोरिया के 26 हजार 895 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है।

विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताओं में दिखा दमखम, अब जिला स्तर पर मुकाबला

सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों में 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर के बीच विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं के विजेता खिलाड़ी अब जिला स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी करेंगे। हॉकी और कुश्ती की प्रतियोगिताएं सीधे जिला स्तर पर आयोजित की जा रही हैं। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में जिला स्तरीय मुकाबले भी पूरे हो चुके हैं।

सरगुजा ओलंपिक के तहत जशपुर जिले में 29 अक्टूबर और 30 अक्टूबर को जिला स्तरीय मुकाबले निर्धारित हैं। वहीं सरगुजा, कोरिया और बलरामपुर-रामानुजगंज में 3 नवम्बर से 5 नवम्बर तथा सूरजपुर में 4 नवम्बर और 5 नवम्बर को जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। संभाग स्तरीय स्पर्धाओं का आयोजन 15 नवम्बर से 20 नवम्बर के मध्य प्रस्तावित है, जिसमें सरगुजा संभाग के सभी छह जिलों के विजेता खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

12 खेलों में प्रतिस्पर्धा, सीनियर वर्ग में आयु सीमा नहीं

सरगुजा ओलंपिक में जूनियर और सीनियर, दो वर्गों में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। जूनियर वर्ग में 14 वर्ष से 17 वर्ष तक के बालक-बालिकाएं भाग ले रहे हैं, जबकि सीनियर वर्ग में महिला एवं पुरुष खिलाड़ियों के लिए आयु का बंधन नहीं है। कुल 12 खेल विधाओं एथलेटिक्स, तीरंदाजी, बैडमिंटन, फुटबॉल, हॉकी, कुश्ती, कराते, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बास्केटबॉल और रस्साकशी में पुरूषों और महिलाओं की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने खेल प्रेमियों, अभिभावकों और नागरिकों से सरगुजा ओलंपिक की जिला स्तरीय और संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है।

समान नागरिक संहिता के प्रारूप तैयार करने में जनभागीदारी – बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव…

रायपुर: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में नागरिकों और विभिन्न संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए आज बिलासपुर में संभाग स्तरीय समूह चर्चा एवं परामर्श बैठक आयोजित की गई। देवकी नंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में आयोजित बैठक में आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार और सुझाव रखे। विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में राज्य शासन द्वारा गठित समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी श्री शत्रुघ्न सिंह और श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्रीमती ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्री श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त श्री सुनील जैन के समक्ष समान नागरिक संहिता के प्रारूप तैयार करने बिलासपुर संभाग के आठ जिले से आए  प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे।

*पारिवारिक कानूनों में समानता और अधिकारों के संरक्षण पर जोर*

समिति के सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और इसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पारिवारिक विषयों से संबंधित दो दर्जन से अधिक कानून एवं प्रावधान प्रचलित हैं, जिनमें अनेक भिन्नताएं हैं। समान नागरिक संहिता पर विचार का उद्देश्य इन विषयों में समानता को बढ़ावा देना तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक सुदृढ़ बनाना है।

समिति के सदस्य श्री शत्रुघ्न सिंह ने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने भी अपने विभिन्न निर्णयों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता रेखांकित की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता के अंतर्गत किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था और रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। इसका संबंध विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक विषयों से है। उन्होंने बताया कि विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों और वर्तमान कानूनी व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप तैयार किया जाएगा।

*पक्ष-विपक्ष में रखे विचार, परंपराओं और कानूनी सुधारों पर हुआ विमर्श*

परामर्श बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष और विपक्ष में खुलकर अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, विभिन्न समुदायों की प्रथाओं और आधुनिक कानूनी सुधारों से जुड़े अनेक पहलू सामने आए। समिति के सदस्यों ने आश्वस्त किया कि सभी सुझावों का अध्ययन कर प्रारूप तैयार किया जाएगा।

समान नागरिक संहिता के प्रारूप तैयार करने में जनभागीदारी - बिलासपुर में आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव

समिति छत्तीसगढ़ की वर्तमान विधिक स्थिति के साथ ही अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का भी अध्ययन कर रही है। नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों एवं अन्य हितधारकों के सुझावों और विधिक अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक अनुशंसाएं भी दी जाएंगी।

*30 अक्टूबर तक वेबसाइट और ई-मेल से भी दे सकते हैं सुझाव*

बैठक में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की अवधारणा और इससे संबंधित प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई। आम नागरिक एवं संगठन 30 अक्टूबर तक आधिकारिक  वेबसाइट “ucc.cgstate.gov.in” (http://ucc.cgstate.gov.in) पर अपने सुझाव दे सकते हैं। सुझाव भेजने के लिए ई-मेल पता ucc-chhattisgarh@cg.gov.in भी उपलब्ध कराया गया है।

इस अवसर पर रजक समाज के अध्यक्ष श्री निलेश रजक,  मराठा समाज के अध्यक्ष-श्री शशांक चौहान,  जायसवाल समाज के अध्यक्ष श्री रमेश जायसवाल,  यादव समाज के अध्यक्ष श्री यशवंत यादव,  मुस्लिम समाज के श्री मुरजता वनक, राष्ट्रीय स्वयं सेवी संघ के अध्यक्ष श्री प्रदीप कुमार शर्मा, साहू समाज से श्री ललित साहू, राजमहंत श्री दसोराम खाण्डे, प्रतिष्ठित नागरिक श्री सुधीर खंडेलवाल,  समाज सेवी/पत्रकार हबीब मेनन, वंदे मातरम मित्र मंडल बिलासपुर से श्री महेंद्र जैन, एडवोकेट नसीमुद्दीन अंसारी बिलासपुर, आदिवासी गोंडवाना समाज के अध्यक्ष श्री श्याम, विष्णु सोनी एल्डरमैन बिलासपुर, सूर्यकुमार खूंटे शिक्षाविद कोरबा, श्री विकास शर्मा जांजगीर, श्री वेदप्रकाश अग्रवाल बिलासपुर,  पूर्व विधायक जिला बिलासपुर श्री चंद्रप्रकाश बाजपेई के साथ ही सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, नागरिकों  की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।