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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया…..

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है कि श्री कोर्सेवाड़ा के निधन की सूचना से वे स्तब्ध हैं। सरल व्यक्तित्व, जनसरोकारों के प्रति संवेदनशीलता और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा उनकी विशेष पहचान रही। क्षेत्र की जनता के सुख-दुःख में सदैव साथ खड़े रहने वाले श्री कोर्सेवाड़ा का निधन हम सभी के लिए गहरी पीड़ा का विषय है। उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रभु श्रीराम से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकसंतप्त परिजनों और उनके सभी स्नेहीजनों को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।

बैलाडिला बुल्स ने 6-2 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह पक्की की, पहले सेमीफाइनल में संस्कारधानी का मुकाबला न्यायधानी से…

रायपुर: बैलाडिला बुल्स के लिए अपने आखिरी लीग मैच में इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। आज की जीत ही उसे सेमीफाइनल में पहुंचा सकती थी। टीम ने उम्दा प्रदर्शन करते हुए चक्रधर चैंपियंस को 6-2 से करारी शिकस्त देकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।

बैलाडिला बुल्स ने 6-2 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह पक्की की

इस परिणाम के साथ ही संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने भी टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में अपनी जगह पक्की कर ली। अब टॉप क्वालीफायर के रूप में न्यायधानी नाइट्स 31 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे संस्कारधानी का सामना करेगी, जबकि इसके बाद शाम 7:30 बजे बैलाडिला और मैनपाट के बीच दूसरा सेमीफाइनल होगा।

बैलाडिला बुल्स ने 6-2 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह पक्की की

मैच शुरू होने से पहले चिंगलेनसाना सिंह की टीम के सामने ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति थी, और उन्होंने शानदार प्रदर्शन करके दिखाया। आनंद ने पहले ही मिनट में गोल करके अपनी टीम के इरादे साफ कर दिए। उन्होंने शुरुआती हमले में एक ‘रिवर्स फ्लिक’ लगाई, जो सीधे नेट में जाकर लगी। बुल्स ने गोल करने के लिए जबरदस्त जज्बा दिखाया, खासकर पहले मैच में मिली हार के बाद। पहले क्वार्टर का सबसे अहम पल वह था जब डलेश्वर यादव ने युवराज वाल्मीकि के खिलाफ एक ‘पेनल्टी स्ट्रोक’ को बचा लिया, जिसने चैंपियंस को गोल करने से रोक दिया।

वहीं बुल्स ने अपने मिले मौके को गोल में बदल दिया। जसकरण सिंह ने लीग में अपना 7वां गोल किया और टीम की बढ़त को 2-0 कर दिया। कुछ मिनट बाद उन्होंने एक पेनल्टी कॉर्नर के जरिए अपना तीसरा गोल दागा।

इस अहम मुकाबले में जसकरण यहीं नहीं रुके। उन्होंने तीसरे क्वार्टर में एक पेनल्टी कॉर्नर के जरिए अपना चौथा गोल किया। आनंद भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने चैंपियंस के कुछ डिफेंडरों को छकाते हुए एक और गोल कर दिया। इसके तुरंत बाद गोपाल ने पेनल्टी कॉर्नर रिबाउंड पर गोल किया, जिससे उनका गोल अंतर +2 हो गया और सेमीफाइनल में उनकी जगह पक्की हो गई।

चक्रधर के लिए यह बहुत निराशाजनक रहा। हालांकि एस.वी. सुनील ने अपनी टीम के लिए मौके बनाए, लेकिन फॉरवर्ड लाइन के बीच तालमेल की कमी दिखी। कप्तान ने सर्कल के अंदर कुछ बेहतरीन पास दिए, लेकिन गेंद को गोल में मोड़ने (डिफ्लेक्ट करने) के लिए वहां कोई मौजूद नहीं था। किसी तरह दूसरे क्वार्टर में खोगेश्वर बाग ने एक गोल कर दिया। आखिरी क्वार्टर के अंत में वाल्मीकि ने रिवर्स हिट से गोल किया, लेकिन यह उन्हें सेमीफाइनल तक पहुंचाने के लिए काफी नहीं था। असल में, इन दो गोलों के अलावा, ‘चैंपियंस’ टीम सर्कल के अंदर बहुत कम बार पहुंच पाई।

*संस्कारधानी स्ट्राइकर्स ने मैनपाट टाइटन्स को 4-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई*

शमशेर की टीम ‘संस्कारधानी स्ट्राइकर्स’ ने मजबूत ‘मैनपाट टाइटन्स’ के खिलाफ उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया और अपने आखिरी लीग मैच में उन्हें 4-0 से हरा दिया। हालांकि उनका सेमीफाइनल में पहुंचना काफी हद तक ‘बुल्स’ और ‘चक्रधर’ के बीच होने वाले मैच पर निर्भर था, लेकिन कुल मिलाकर उन्होंने अपना काम बखूबी कर दिया था।

आशीष तानी पूर्ति ने हैट्रिक लगाई, जिससे उनके कुल गोलों की संख्या 12 हो गई। इससे स्ट्राइकर्स का गोल अंतर +2 बना रहा, जिससे सेमीफाइनल में पहुंचने की उनकी संभावना और मजबूत हो गई। मैच के चारों क्वार्टर की बात करें तो संस्कारधानी ने शुरुआत में काफी संभलकर खेला, लेकिन उनका सामना टाइटन्स से था, जिनके पास टूर्नामेंट की सबसे बेहतरीन डिफेंस लाइन है। लीग के 14वें मैच के पहले तक उन्होंने केवल 7 गोल खाए थे।

बैलाडिला बुल्स ने 6-2 से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह पक्की की

लेकिन दूसरे क्वार्टर की शुरुआत में ही आशीष ने एक जोरदार ड्रैग-फ्लिक के जरिए स्ट्राइकर्स के लिए गोल का खाता खोला, जिसे प्रदीप मोर भी नहीं रोक पाए। इसके बाद कुछ और मौके मिले, लेकिन उन्हें भुनाया नहीं जा सका और स्कोर स्ट्राइकर्स के पक्ष में 1-0 पर ही अटका रहा। आशीष ने एक बार फिर उसी अंदाज़ में गोल किया – इस बार तीसरे क्वार्टर में।

उन्होंने एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर अपनी टीम की बढ़त और बढ़ा दी, और इस बार टाइटन्स के डिफेंस के पास कोई मौका नहीं था। खेल के बिल्कुल आखिरी पलों में स्ट्राइकर्स को एक फील्ड गोल भी मिला। शाहरुख ने पास दिया और ओम कुमार यादव ने गेंद को गोल पोस्ट के अंदर पहुँचा दिया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की माताजी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया….

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पूज्य माताजी श्रीमती काशी बाई जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया है कि माताजी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। माँ का स्नेह और आशीर्वाद जीवन का सबसे बड़ा संबल होता है। उनका जाना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। दुःख की इस घड़ी में उनकी गहरी संवेदनाएँ केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान एवं समस्त शोकाकुल परिजनों के साथ हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बाबा महाकाल से दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने तथा शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

महतारी वंदन से बेटी पढ़ाओ को मिल रहा संबल, छत्तीसगढ़ सरकार की आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च के साथ बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बचत कर रही महिलाएं…..

रायपुर: प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर मे सतत सुधार तथा परिवार में उनकी निर्णायक भूमिका सुदृढ़ करने हेतु, समाज में महिलाओं के प्रति भेदभाव, असमानता एवं जागरूकता की कमी को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार करने तथा आर्थिक स्वावलंबन एवं महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना लागू किया गया है, जिसके अंतर्गत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना की शुरुआत आधिकारिक रूप से 1 मार्च 2024 को हुई थी और इसका औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को किया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा है कि मोदी की गारंटी का मतलब होता है, गारंटी पूरी होने की गारंटी।

यह योजना के तहत राज्य की सभी पात्र विवाहित महिलाओं को लाभ प्रदान की जा रही है इसके अलावा विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाएं भी इस योजना का लाभ ले रही हैं। छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना की आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए घरेलू जरूरतें पूरी करने के साथ बेटियों के भविष्य को संवारने का जरिया बन रही है। योजना से मिलने वाली राशि का एक हिस्सा वे सुकन्या समृद्धि खातों में जमा कर रही हैं, ताकि आगे चलकर बेटियों की उच्च शिक्षा और अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक संबल मिल सके। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर मजबूती दे रही है।

छत्तीसगढ़ सरकार की आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च के साथ बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बचत कर रही महिलाएं

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आर्थिक सशक्तिकरण हमारी सरकार के लिए केवल एक योजना या कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की प्रमुख प्राथमिकता है। हमारा विश्वास है कि जब परिवार की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा और पोषण से लेकर परिवार के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े निर्णयों तक उसकी भागीदारी और मजबूत होती है। इसलिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से सरकार माताओं-बहनों के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास दे रही है।

दंतेवाड़ा जिले के बोडरी गांव की प्रमिला पोतामी के लिए बेटी की पढ़ाई के लिए बचत करना पहले आसान नहीं था। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित मासिक सहायता ने उनके लिए बचत की राह खोली है। प्रमिला कहती हैं, “हमारी आमदनी इतनी नहीं है कि कुछ बचाकर रख सकें। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि बड़ी मददगार है। इस राशि का कुछ हिस्सा मैं सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करती हूं जो आगे चलकर बेटी की पढ़ाई में काम आएंगे। ”दक्षिण बस्तर का दंतेवाड़ा लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा है। ऐसे क्षेत्र में बेटी की शिक्षा के लिए बचत का यह प्रयास बदलती आकांक्षाओं और बेहतर भविष्य को नई उम्मीद दे रहा है। प्रमिला की तरह कुछ अन्य महिलाएं भी मासिक सहायता का हिस्सा बेटियों के नाम बचत करने में लगा रही हैं।

इस योजना से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है, इससे महिलाएं अपनी आय के स्रोत विकसित कर कर अपने परिवार का आर्थिक रूप से सहयोग कर रही हैं। इस योजना से महिलाओं को सशक्त बनाने में मदद मिल रही है, इससे महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक होने और उन्हें प्राप्त करने में मदद मिल रही है। रायपुर जिले के रावेली गांव की मीना निषाद ने भी अपनी बेटी महिमा के लिए सुकन्या समृद्धि खाता खुलवाया है। वह कहती हैं, “महतारी वंदन योजना से हर महीने एक हजार रुपये मिलते हैं। मैं यह राशि अपनी बेटी के सुकन्या समृद्धि खाते में जमा करती हूं। मैं चाहती हूं कि आगे चलकर यह बचत उसकी पढ़ाई और भविष्य की जरूरतों में काम आए।”सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के पर्री गांव की अंजू कुशवाहा भी इसी तरह बचत कर रही हैं। वह मासिक सहायता की कुछ राशि बेटी के सुकन्या खाते में जमा करती हैं और शेष रकम घरेलू खर्चों पर लगाती हैं। उनके मुताबिक, नियमित आर्थिक मदद से भविष्य के लिए थोड़ी-बहुत बचत कर पाने का भरोसा बढ़ा है।

वहीं, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के बघमरा गांव की दीपाली मरकाम इस राशि का इस्तेमाल बच्चों की स्कूली जरूरतों और बेटी के भविष्य के लिए बचत करने में कर रही हैं। उनका कहना है कि हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और जीवन में आगे बढ़ें, लेकिन सीमित घरेलू संसाधनों के बीच भविष्य के लिए पैसे बचाना आसान नहीं होता। मासिक सहायता से उन्हें बच्चों की पढ़ाई में योगदान देने और बेटी के लिए बचत करने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की नारी, शान हैं हमारी..

सुशासन की सरकार महतारी वंदन योजना के माध्यम से हर माह 1,000 यानी सालाना 12,000 की आर्थिक सहायता देकर प्रदेश की माता-बहनों के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने 8 अक्टूबर 2026 को योजना की 32 वीं किस्त के रूप में 67 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में डी बी टी के माध्यम से 632.40 करोड़ से अधिक की राशि अंतरित की गई है। अब तक 20,708 करोड़ से अधिक की राशि महतारी वंदन योजना के माध्यम से माता-बहनों को प्रदान की जा चुकी है।

छत्तीसगढ़ सरकार की आर्थिक सहायता से घरेलू खर्च के साथ बेटियों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बचत कर रही महिलाएं

महतारी वंदन योजना से रायपुर जिले के 5 लाख 13 हजार 534 हितग्राही, बिलासपुर जिले के 4 लाख 11 हजार 310 हितग्राही, दुर्ग के 3 लाख 89 हजार 507 हितग्राही, बलौदाबाजार-भाटापारा के 3 लाख 19 हजार 815 हितग्राही और महासमुंद जिले के 3 लाख 12 हजार 162 हितग्राहियों के खातों में डी बी टी के माध्यम से सुशासन की सरकार राशि अंतरित कर माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से सक्षम बना रही है।

वर्ष 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना बालिकाओं के भविष्य के लिए बचत का अवसर देती है। इसके माध्यम से मां-बाप बेटियों की शिक्षा और विवाह जैसी भविष्य की जरूरतों के लिए धन जमा कर सकते हैं। इन महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि नियमित आर्थिक सहायता से बेटियों की शिक्षा और भविष्य के लिए योजनाबद्ध बचत की शुरुआत करना संभव हो रहा है।

किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार का बड़ा निर्णय, प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को स्वीकृति….

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी को अधिक सुगम, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेश के किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े, उपार्जन केंद्रों में अनावश्यक प्रतीक्षा से राहत मिले और कम समय में अधिक किसान अपनी उपज का विक्रय कर सकें, इस उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्रदेश में 360 नए धान उपार्जन केंद्रों को स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही प्रदेश में धान उपार्जन केंद्रों की संख्या 2,740 से बढ़कर 3,100 हो गई है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि अन्नदाता किसानों की मेहनत का सम्मान और उनकी सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। धान खरीदी की प्रक्रिया में किसानों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति का उद्देश्य केवल केंद्रों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों के लिए धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल, सुलभ और सुविधाजनक बनाना है।

नए उपार्जन केंद्रों से किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

राज्य सरकार द्वारा 360 नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति से प्रदेश में धान खरीदी की व्यवस्था का व्यापक विस्तार होगा। नए केंद्रों के प्रारंभ होने से किसानों को अपने गांव अथवा आसपास के क्षेत्रों में धान विक्रय की सुविधा मिलेगी। इससे धान लेकर दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक जाने की आवश्यकता कम होगी और परिवहन पर होने वाले खर्च में भी बचत होगी।

अब तक जिन उपार्जन केंद्रों पर अधिक संख्या में किसानों के पहुंचने के कारण भीड़ और प्रतीक्षा की स्थिति बनती थी, वहां भी नए केंद्रों के प्रारंभ होने से दबाव कम होगा। किसानों का आवागमन विभिन्न केंद्रों में विभाजित होने से धान की तौल, गुणवत्ता परीक्षण और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में सहायता मिलेगी।

इस निर्णय से किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए कम समय देना पड़ेगा और वे अपने कृषि कार्यों तथा अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए अधिक समय निकाल सकेंगे। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों को इससे सुविधा मिलने की अपेक्षा है।

दो लाख से अधिक किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

प्रदेश में स्वीकृत 360 नए धान उपार्जन केंद्रों से दो लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इन किसानों को नए केंद्रों के माध्यम से टोकन प्राप्त करने और निर्धारित अवधि में धान विक्रय करने की सुविधा उपलब्ध होगी।

नए उपार्जन केंद्रों के संचालन से धान खरीदी की क्षमता का विस्तार होगा। एक ही समय में अधिक केंद्रों पर खरीदी होने से अधिक संख्या में किसानों का धान निर्धारित अवधि के भीतर खरीदा जा सकेगा। इससे पुराने केंद्रों पर किसानों की निर्भरता कम होगी और धान विक्रय के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा की समस्या में कमी आएगी।

राज्य सरकार का प्रयास है कि धान खरीदी की व्यवस्था ऐसी हो, जिसमें किसानों को कम दूरी तय करनी पड़े, कम समय लगे और उनकी उपज का विक्रय सुचारू रूप से संपन्न हो।

15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, 15 जनवरी तक चलेगी प्रक्रिया

राज्य सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की अवधि 15 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की है। निर्धारित अवधि में प्रदेश के पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जाएगी।

धान खरीदी प्रारंभ होने से पहले उपार्जन केंद्रों पर आवश्यक तैयारियां पूरी करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसानों को शुरुआत से ही व्यवस्थित सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

नए केंद्रों की स्वीकृति से खरीदी कार्य को अधिक विकेंद्रीकृत बनाने में सहायता मिलेगी। इससे सीमित केंद्रों पर किसानों की भीड़ एकत्र होने के बजाय विभिन्न केंद्रों पर धान खरीदी की प्रक्रिया समानांतर रूप से संचालित हो सकेगी।

‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप से घर बैठे मिलेगी सुविधा

धान विक्रय के लिए किसानों को समितियों में बार-बार आने और टोकन प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता कम करने के उद्देश्य से इस वर्ष भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन टोकन की व्यवस्था की गई है।

किसान अपने मोबाइल फोन से घर बैठे धान विक्रय के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। इससे किसानों को अपनी सुविधा के अनुसार टोकन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और टोकन लेने के लिए निर्धारित समय में समिति पहुंचने की बाध्यता नहीं रहेगी।

ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को धान विक्रय की पूर्व तैयारी करने में भी सुविधा होगी। वे निर्धारित तिथि के अनुसार धान के परिवहन एवं विक्रय की योजना बना सकेंगे। इससे उपार्जन केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ कम करने और खरीदी कार्य को व्यवस्थित बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

2 से 5 नवंबर तक ट्रायल रन, 10 नवंबर से मिलेंगे टोकन

धान खरीदी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए राज्य सरकार ने अग्रिम तैयारियों पर विशेष जोर दिया है। इसके अंतर्गत 2 नवंबर से 5 नवंबर 2026 तक समितियों में ट्रायल रन आयोजित किया जाएगा।

इस दौरान टोकन संबंधी प्रक्रियाओं और आवश्यक तकनीकी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाएगा, ताकि वास्तविक खरीदी प्रारंभ होने से पहले संभावित समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान किया जा सके।

किसानों के लिए 10 नवंबर 2026 से टोकन प्राप्त करने की व्यवस्था प्रारंभ होगी। इससे किसानों को 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी के लिए पहले से तैयारी करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

समय और परिवहन खर्च की बचत से किसानों को होगा आर्थिक लाभ

नए उपार्जन केंद्रों की स्थापना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य धान विक्रय से जुड़े किसानों के अतिरिक्त खर्च को कम करना भी है।

दूरस्थ उपार्जन केंद्रों तक धान पहुंचाने के लिए किसानों को परिवहन की व्यवस्था करनी पड़ती है। अधिक दूरी होने पर परिवहन खर्च बढ़ता है और समय भी अधिक लगता है। नए केंद्रों के माध्यम से धान विक्रय की सुविधा नजदीक उपलब्ध होने पर किसानों को इन दोनों स्तरों पर राहत मिलेगी।

इसी प्रकार, खरीदी केंद्रों पर भीड़ कम होने से किसानों को धान विक्रय के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी। इससे उनकी श्रमशक्ति और समय की बचत होगी।

राज्य सरकार की मंशा है कि किसानों को धान का निर्धारित मूल्य मिलने के साथ ही विक्रय प्रक्रिया में होने वाले अनावश्यक खर्च और परेशानियों से भी राहत मिले। धान खरीदी के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

किसानों की संतुष्टि और सुविधाजनक धान खरीदी पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। उनकी मेहनत से खेतों में उपजने वाला धान प्रदेश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध हो।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों को केवल उनकी उपज का उचित मूल्य देने तक सीमित नहीं है, बल्कि धान विक्रय की पूरी प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। 360 नए उपार्जन केंद्रों की स्वीकृति, ऑनलाइन टोकन की सुविधा और खरीदी से पहले व्यवस्थाओं का परीक्षण इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारा स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी अन्नदाता धान बेचने के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करे। किसानों के समय, श्रम और धन की बचत हो तथा उन्हें अपनी मेहनत का पूरा सम्मान मिले। हमारी सरकार धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया को किसान हितैषी बनाकर प्रत्येक अन्नदाता को सुविधाजनक और संतोषजनक अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सौगात से केरसई में महतारी सदन बनकर तैयार, महिलाओं को मिलेंगी सुविधाएं, जिले में 18 महतारी सदनों का हो रहा निर्माण, 29 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा प्रत्येक महतारी सदन…*

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सौगात से केरसई में महतारी सदन बनकर तैयार, महिलाओं को मिलेंगी सुविधाएं*

*जिले में 18 महतारी सदनों का हो रहा निर्माण, 29 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रहा प्रत्येक महतारी सदन*

जशपुरनगर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में जिले में महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में केरसई में महतारी सदन बनकर तैयार हो गया है। महतारी सदन के तैयार होने से क्षेत्र की महिलाओं को विभिन्न सामुदायिक एवं सामाजिक गतिविधियों के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

जिले में महिलाओं की सुविधा और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुल 18 महतारी सदनों का निर्माण कराया जा रहा है। प्रत्येक महतारी सदन के निर्माण पर 29 लाख रुपये की लागत निर्धारित है। इन भवनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को एक स्थान पर एकत्रित होकर बैठक, चर्चा और अन्य सामूहिक गतिविधियां संचालित करने की सुविधा मिल सकेगी।

महिलाओं को मिलेगा सुविधाजनक स्थान

महतारी सदन ग्रामीण महिलाओं के लिए उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित होंगे। यहां महिलाओं को आपसी संवाद, सामूहिक बैठक, जागरूकता कार्यक्रम तथा महिला समूहों की गतिविधियों के संचालन में सुविधा मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने और सामुदायिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।

केरसई में महतारी सदन का निर्माण पूरा होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। जिले के अन्य स्थानों पर भी महतारी सदनों का निर्माण होने से ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं की सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत महतारी सदन महिलाओं को सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

राष्ट्रीय एकता दिवस: अखंडता का संकल्प: सरदार पटेल और मजबूत भारत का सपना…..

रायपुर:  भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का पालन किया जाता है, फिर भी देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने वाली भावना है-राष्ट्रीय एकता। यह एकता केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि हर नागरिक स्वयं को देश के साझा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।

हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ-साथ आज के भारत में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी का एहसास कराता है।

*सरदार पटेल ने रखी एकीकृत भारत की मजबूत नींव*

वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बाद देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, समझदारी और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया,  जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोया। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया जाता है। सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि विभिन्न विचारों, हितों और पहचानों के बीच तालमेल बनाकर ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।

*आज विकास के साथ एकता को मजबूत करना भी जरूरी*

आज भारत के सामने चुनौती रियासतों को एकजुट करने की नहीं, बल्कि विकास के लाभों को देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक पहुँचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, केवल बुनियादी ढाँचे का विकास ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें, सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ हों और उनकी आवश्यकताओं को उचित महत्व दिया जाए।

लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय एकता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब तक पूरा राष्ट्र एकता की भावना से बंध नहीं जाता, तब तक देश में कोई विकास या आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसलिए, राष्ट्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रीय एकीकरण की रक्षा के लिए हमें एक मजबूत राष्ट्र की आवश्यकता है। अतः जाति, क्षेत्रवाद, धर्म आदि पर केंद्रित संकीर्ण सोच से दूर रहकर हमें विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए।

प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएँ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की नींव को मजबूत करता है।

*सहकारी संघवाद से मजबूत होगा देश*

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर मिलकर काम करने से विकास को गति मिलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाए। जब विभिन्न सरकारें और संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित को प्राथमिकता देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक स्वयं को देश की विकास यात्रा से जुड़ा हुआ महसूस करें।

*विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत*

भारत की एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक जैसी भाषा बोलें, एक जैसी परंपराएँ अपनाएँ या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक ताकत इस बात में है कि अलग-अलग पहचान और जीवनशैली वाले लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रह सकें। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी भी सूचना की सत्यता जाँचना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी कार्यक्रमों या संदेशों से कायम नहीं रह सकती। इसे मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान का होना आवश्यक है।

*‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’से बढ़ेगी आपसी समझ*

देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जाता है। शैक्षणिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतरराज्यीय यात्राएँ और विभिन्न क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित कर सकते हैं। 1 से 15 नवंबर 2026 तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर भारत पर्व का आयोजन भी किया जाएगा।

युवा देश का भविष्य हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देते हैं, तब एक मजबूत और समावेशी भारत का मार्ग प्रशस्त होता है।

*राष्ट्रीय एकता एक निरंतर जिम्मेदारी*

राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा कर्तव्य है। देश की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस एकता को और मजबूत बनाए।

राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि देश का प्रत्येक नागरिक एक जैसा सोचे, बल्कि यह है कि अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद सभी एक साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़े हों। सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।

राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और संगठित बनाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक साथ बांधे रखती है। अनेक भिन्नताओं के बावजूद, सभी लोग एक-दूसरे के साथ पारस्परिक सद्भाव में रहते हैं। हमारे देश जैसी विविधता अन्य देशों में नहीं पाई जाती। यहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों, धर्मो के लोग, जिनकी जीवनशैली, संस्कृति, भाषाएँ और रीति-रिवाज बिल्कुल भिन्न हैं, फिर भी एक साथ रहते हैं। भारत में ये सभी राष्ट्रीय एकता के धागे से बंधे हुए हैं।

सत्य साईं अस्पताल में सेवा दे रहीं छत्तीसगढ़ की बेटियों से मिले वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी…..

रायपुर: वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज सत्य साईं अस्पताल में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ अंचलों बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और पिथौरा से आई उन बेटियों से मुलाकात की, जो यहां सेवा दे रही हैं। उनसे मिलकर श्री चौधरी ने उनकी लगन और आत्मविश्वास को सराहा और कहा कि उन्हें देखकर गर्व का अनुभव हुआ।

रायपुर : सत्य साईं अस्पताल में सेवा दे रहीं छत्तीसगढ़ की बेटियों से मिले वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

इस अवसर पर श्री चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन से चर्चा कर आग्रह किया कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में अवसर मिलें, यह जरूरी है।

श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर में आ रहे नए संस्थानों में भी प्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए संस्थानों और प्रबंधन के साथ संवाद इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।

 

बस्तर ओलंपिक 2026 : 30 अक्टूबर तक पंजीयन का अंतिम अवसर, अब तक 72,811 लोगों ने कराया पंजीयन….

रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के बहुप्रतीक्षित बस्तर ओलंपिक 2026 का आगाज होने जा रहा है। “हमारा खेल, हमारा बस्तर, हमारी पहचान” की थीम पर आयोजित इस खेल महोत्सव में बस्तर की खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता और हुनर दिखाने का बड़ा मंच मिलेगा। 1 से 30 अक्टूबर तक पंजीयन की प्रक्रिया जारी है। खास बात यह है कि सुकमा जिले में खेलों को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब तक 72,811 खिलाड़ियों ने अपना पंजीयन करा लिया है।

सुकमा जिले के विकासखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें तो छिन्दगढ़ 31,989 पंजीयनों के साथ सबसे आगे है। वहीं कोंटा से 17063 और सुकमा विकासखंड से 23759 खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। जिले में कुल 22241 पुरुष और 50,570 महिला प्रतिभागियों की विभिन्न श्रेणियों में दर्ज भागीदारी खेलों के प्रति युवाओं और महिलाओं के बढ़ते रुझान को दर्शाती है। यह उत्साह बस्तर ओलंपिक के व्यापक प्रभाव और सफल आयोजन की उम्मीदों को और मजबूत कर रहा है।

11 खेलों में होगा प्रतिभा का प्रदर्शन। एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबॉल, कराते, कबड्डी, वॉलीबॉल और खो-खो सहित कुल 11 खेल विधाओं में खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। प्रतियोगिता में 14 से 17 वर्ष के जूनियर वर्ग के साथ सीनियर महिला एवं पुरुष वर्ग के खिलाड़ी भी हिस्सा लेंगे। मुकाबलों का पहला चरण 1 से 13 नवंबर तक विकासखंड स्तर पर, दूसरा चरण 16 से 25 नवंबर तक जिला स्तर पर और अंतिम चरण 7 से 11 दिसंबर तक संभाग स्तर पर आयोजित किया जाएगा।

बस्तर के खेल मैदानों से निकलेगी नई पहचान मिलेगी। जिला प्रशासन के द्वारा मोबाइल लिंक अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जबकि आधार कार्ड नंबर अनिवार्य रखा गया है। बस्तर ओलंपिक केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं की प्रतिभा को पहचान, अवसर और नई दिशा देने का अभियान है। अब बस्तर के हजारों खिलाड़ियों की निगाहें मैदान पर हैंकृजहां वे अपने हुनर का दम दिखाएंगे और खेल के जरिए बस्तर और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का सपना साकार करेंगे।

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 की तैयारियों का किया निरीक्षण….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने आज नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के प्रस्तावित आगमन को लेकर चल रही तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने नवा रायपुर स्थित सत्य साईं हॉस्पिटल, विकसित भारत संकल्प पार्क (पीपल वन) तथा तूता गांव क्षेत्र का दौरा कर कार्यक्रम की तैयारियों और व्यवस्थाओं की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आयोजन को भव्य, सुव्यवस्थित, सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 की तैयारियों का किया निरीक्षण

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्योत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली परंपराओं और विकास यात्रा को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस आयोजन में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का प्रस्तावित आगमन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यक्रम से जुड़ी सभी तैयारियां आपसी समन्वय के साथ समय-सीमा में पूरी की जाएं, ताकि आयोजन में शामिल होने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

आयोजन स्थलों पर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

निरीक्षण के दौरान वित्त मंत्री श्री चौधरी ने नवा रायपुर के विभिन्न कार्यक्रम स्थलों पर चल रही तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने आयोजन स्थलों की साफ-सफाई, आवागमन, पार्किंग, सुरक्षा तथा आगंतुकों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कार्यक्रम स्थलों पर नागरिकों के सुगम आवागमन और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाए।

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने नवा रायपुर में राज्योत्सव 2026 की तैयारियों का किया निरीक्षण

राज्योत्सव की गरिमा के अनुरूप हों सभी तैयारियां

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्योत्सव प्रदेशवासियों के लिए गौरव और उत्साह का अवसर है। ऐसे में आयोजन की प्रत्येक व्यवस्था सुव्यवस्थित और गरिमापूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि तैयारियों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी स्तर पर कमी पाए जाने पर उसका तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

श्री चौधरी ने कहा कि राज्योत्सव के दौरान प्रदेश की संस्कृति, परंपराओं और विकास की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के साथ आगंतुकों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से आयोजन की तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस दौरान नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।