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राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग की प्रदर्शनी में किसानों को मिल रही खेती से जुड़ी जानकारियां, एक ही जगह पर 20 से अधिक धान की किस्में, दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन….

रायपुर: नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर किसानों को आधुनिक खेती, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और फसल विविधीकरण की जानकारी दी जा रही है। धान का कटोरा कहे जाने वाले प्रदेश में कृषि विरासत को सहेजने के साथ उन्नत धान प्रजातियों, दलहन-तिलहन, मोटे अनाज और फल-उद्यानिकी को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक समृद्धि के नए रास्ते खोले जा रहे हैं। शासन की किसान हितैषी योजनाएं उनके जीवन में खुशहाली ला रही हैं

स्टॉल पर राज्य के विभिन्न जिलों की माटी और जलवायु के अनुकूल पारंपरिक सुगंधित धान किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इनमें कोरिया का श्री कमल, सूरजपुर का श्याम जीरा, बलरामपुर का ठाकुर भोग, सरगुजा का विष्णु भोग, जशपुर का शीतल भोग, बिलासपुर का समुंद चीनी, कोरबा का जटा शंकर, रायगढ़ का जौ फूल, कबीरधाम का गंगा प्रसाद, मुंगेली का सुकला फूल, जांजगीर-चांपा का चिन्नौर, बेमेतरा की छत्री, बलौदाबाजार-भाटापारा का मुनि भोग, राजनांदगांव का कपूर सार, दुर्ग का कालिका मोद, रायपुर व बालोद का दुबराज, महासमुंद का कुबरी मोहर, धमतरी की तुलसी मंजरी, गरियाबंद की इलायची, कांकेर का बादशाह भोग, नारायणपुर का अमृत भोग, कोंडागांव का राजा भोग, बीजापुर का कदम फूल, दंतेवाड़ा का आत्मा शीतल, बस्तर का लोकती मच्छी और सुकमा का गंगा बारू शामिल हैं।

एक ही जगह पर 20 से अधिक धान की किस्में, दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन

इसके अलावा औषधीय गुणों से भरपूर और उच्च गुणवत्ता वाली 20 से अधिक धान की प्रजातियां भी रखी गई हैं। इनमें विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919, मधुराज, महामाया, तरुण भोग, छत्तीसगढ़ देवभोग, बादशाह भोग सलेक्शन-1, छत्तीसगढ़ सुगंधित भोग, छत्तीसगढ़ भाव्या, छत्तीसगढ़ जिंक राईस-1 (सी.जी. जिंक राइस एमएस), गठूवान, महाराजी, विष्णु भोग, दुबराज सलेक्शन-1, रेड राइस, ब्लैक राईस, प्रोटीन युक्त प्रोटेजिन, इंदिरा एरोबिक-1, बस्तर धान-1, स्वर्णा सब-1, सांभा सब-1, आई.आर.-64, पीकेवी एचएमटी तथा एमटीयू-3626, एमटीयू-1318, एमटीयू-1075, एमटीयू-1239 और एमटीयू-1223 प्रमुख हैं। कृषि विशेषज्ञ किसानों को इन किस्मों की उत्पादकता, पोषण और बाजार मांग के बारे में विस्तार से समझा रहे हैं।

फसल विविधीकरण को गति देने के लिए स्टॉल पर राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के बारे में भी बताया जा रहा है। इस योजना के तहत खरीफ मौसम में धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी एवं कपास की फसल लेने वाले किसानों को 15,000 रुपए प्रति एकड़ तथा पहले से इन वैकल्पिक फसलों की खेती कर रहे किसानों को 10,000 रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। इससे प्रेरित होकर किसान दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं। इनके प्रमाणित बीज भी प्रदर्शनी में रखे गए हैं।

दलहन संवर्ग में चना एवं तिवड़ा की उन्नत किस्मों जैसे महातिवड़ा, प्रतीक (तिवड़ा/लाथाइरस), छत्तीसगढ़ लोचन चना, छत्तीसगढ़ चना (सी.जी. चना-2), आरवीजी-210, जेजी-24, जीएनजी-2171 और इंदिरा चना-1 की विशेषताओं से किसानों को अवगत कराया जा रहा है। इसी तरह मूंग व उड़द की प्रज्ञा, पैरिमूँग, एमएच-421, टी-9 और इंदिरा उड़द (इंदिरा प्रथम-1), अरहर की सी.जी. अरहर-1 व बीडीएन-711, मसूर की सी.जी. मसूर-1 व आरवीएल-31, मटर की इंदिरा मटर-1, काशी नंदिनी, आर्किल व पीएफडी-11-05 तथा कुल्थी की इंदिरा कुलथी-1 व सी.जी. कुलथी-3 (बिलासा) किस्मों के बीज और खेती की तकनीक बताई जा रही है। रबी की सफल खेती के लिए गेहूं की दो उन्नत किस्में अवंति और कनिष्का भी सुझाई जा रही हैं।

तिलहन फसलों में अलसी की 12 किस्में रखी गई हैं, जिनमें अधिक भूरा, कम भूरा, आर-2607, आर-2717, वाईएल.एस-23, आर-552, आर-17, किरण, आर-2695, आरएलसी-187, कार्तिका व इंदिरा अलसी (आरएलसी-92) शामिल हैं। सरसों की तीन प्रमुख किस्मों आजाद महक, सुरेखा और आरएच-1975 के साथ सी.जी. सरसों व पीपीएस-1 को भी स्थान दिया गया है। इसी तरह कुसुम (सैफ्लावर) की तीन किस्में आईजीकेवी कुसुम, छत्तीसगढ़ कुसुम-1 और छत्तीसगढ़ कुसुम-2, सूरजमुखी की उन्नत संकर प्रजातियां सीओएच-4, सन एच-1 और सीओएच-3, सोयाबीन की सी.जी. सोया-1 व जेएस-20-98, रामतिल की जीए-10 व बीएन-03 तथा तिल की जीटी-10 और टीकेजी-55 किस्में उपलब्ध हैं। लघु धान्य सी.जी. कोदो-2 की तकनीक से भी किसानों को परिचित कराया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : राज्य स्थापना के 26 वर्ष : नए छत्तीसगढ़ की सशक्त होती तस्वीर, दशा और दिशा….

रायपुर:  1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ राज्य ने अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इन 26 वर्षों की विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्राकृतिक संसाधनों, समृद्ध वन संपदा, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध इस प्रदेश ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। राज्य गठन के बाद से शासन और प्रशासन के निरंतर प्रयासों ने प्रदेश को आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, सड़क, रेल संपर्क और जनकल्याण के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आधारभूत संरचना से विकास को मिली नई गति

छत्तीसगढ़ में पिछले 26 वर्षों के दौरान सड़क, बिजली, पेयजल, संचार और परिवहन सहित विभिन्न सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों के विकास से दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों से जोड़ने में मदद मिली है। रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारा और रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने वाली हैं।

रेल संपर्क के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जैसे प्रमुख रेल केंद्रों के साथ अब बस्तर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास तेज हुए हैं। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन के विस्तार तथा ताड़ोकी-रावघाट और अभनपुर-कुरूद रेलखंडों का शुभारंभ इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रावघाट तक पहली बार रेल पहुंचना बस्तर के लिए ऐतिहासिक कदम है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन के साथ व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच के नए अवसर मिलेंगे।

जनजातीय विकास और जनकल्याणकारी अभियानों से बदलती तस्वीर

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। इसलिए प्रदेश के समग्र विकास में जनजातीय समुदायों का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। शासन द्वारा इस दिशा में विभिन्न योजनाओं और विशेष अभियानों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, सड़क और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है।

नियद नेल्लानार योजना

बस्तर के माओवादी प्रभावित और दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की व्यक्तिगत हितग्राही योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना है।

पी एम जनमन योजना

विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय समूहों (PVTGs) के परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए संचालित इस अभियान के तहत पक्के आवास, पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों के लिए यह योजना विकास के नए अवसर लेकर आई है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

जनजातीय बहुल गांवों में आधारभूत और सामाजिक सुविधाओं की कमी दूर करने के उद्देश्य से शुरू इस अभियान के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के समन्वय से योजनाओं का लाभ गांवों तक पहुंचाने का प्रयास है। इनके साथ वन अधिकारों का संरक्षण, लघु वनोपज के संग्रहण एवं मूल्य संवर्धन, कौशल प्रशिक्षण, महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने जैसे प्रयास जनजातीय परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहे हैं।

कृषि, सिंचाई, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण,  स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक निवेश के क्षेत्रों में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति 2024-30 के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहन, रोजगार के अवसरों का सृजन और स्थानीय युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में पहल की जा रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अधिक व्यापक और रोजगारोन्मुख बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

संकल्प विकसित छत्तीसगढ़ का

केंद्र के विकसित भारत अभियान की तर्ज़ पर प्रदेश सरकार विकसित छत्तीसगढ़ राज्य बनाने के संकल्प के साथ सतत विकास के नए सोपान गढ़ रहा है। जनकल्याण का यह सफर छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्धियों का पड़ाव होने के साथ विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनने के नए संकल्प का अवसर भी है। प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, आधुनिक आधारभूत संरचना और लोककल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण, सहकारिता के दम पर बस्तर ने रचा इतिहास, ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार 2026 से सम्मानित….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के 26 वें राज्य स्थापना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर बस्तर जिले ने सहकारिता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सहकारिता के मूल सिद्धांतों को निष्ठापूर्वक अपनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को नई दिशा देने वाली लोहण्डीगुड़ा विकासखंड की प्राथमिक कुडूक मछुआ सहकारी समिति मर्यादित चित्रकोट को राज्य शासन द्वारा प्रतिष्ठित ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण 2026 से विभूषित किया गया। राज्योत्सव के अवसर पर मुख्य अतिथि देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह के करकमलों से यह गरिमामय सम्मान श्री धनसिंह बघेल ने ग्रहण किया।

विगत करीब 17 वर्ष पहले 23 मार्च 2009 को पंजीकृत यह समिति आज बस्तर के 62 मछुआ परिवारों के लिए एक मजबूत जीवनरेखा बन चुकी है। विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर पर्यटन और मत्स्याखेट को अपनी मुख्य गतिविधि बनाते हुए समिति ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। शासन या बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय समिति ने अपनी स्वयं की अर्जित आय से न केवल 7 कार्यशील नौकाओं की खरीद की, बल्कि अपने कार्यालय भवन का निर्माण भी सफलतापूर्वक पूरा कराया।

चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण

पर्यटन सेवा के क्षेत्र में समिति ने सुरक्षा और किफायती दर का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया है। चित्रकोट जलप्रपात में पर्यटकों को मात्र 50 रुपए प्रति व्यक्ति की दर से सुरक्षित नौका विहार कराया जा रहा है, जिसकी बदौलत पर्यटकों का विश्वास तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में जहां 30,775 सैलानियों ने नौका विहार का आनंद लिया था, वहीं पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा दोगुने से अधिक बढ़कर वर्ष 2025-26 में 70 हजार से ज्यादा तक पहुंच गया, जिससे समिति को 35 लाख रुपए से अधिक का उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ।

पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और सदस्यों की कड़ी मेहनत के दम पर समिति ने वर्ष 2025-26 के दौरान साढ़े पांच लाख रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जिसमें से सदस्यों को ढाई प्रतिशत की दर से लाभांश भी वितरित किया गया। बीते 31 मार्च 2026 की वित्तीय स्थिति के अनुसार समिति का संचित लाभ 37 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। ग्रामीण सहकारिता, आजीविका संवर्धन और पर्यटन प्रबंधन का यह बेजोड़ संगम आज पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है।

 

अटल जी के सपनों से विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प तक, संस्कृति, स्वाभिमान और विकास की गौरवशाली यात्रा: मंत्री राजेश अग्रवाल…..

रायपुर: छत्तीसगढ़ की माटी में इतिहास की गहराई है, संस्कृति की मिठास है, परंपराओं की सुगंध है और भविष्य की असीम संभावनाएं हैं। यहां के लोकगीतों में जीवन का संगीत है, लोकनृत्यों में उत्साह की उमंग है और जनजातीय परंपराओं में   प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का अद्भुत दर्शन समाहित है। यह वह धरती है, जहां श्रम को सम्मान, प्रकृति को आराधना और संस्कृति को जीवन का आधार माना जाता है। छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट भाषा, लोकजीवन, परंपराओं और गौरवशाली विरासत से निर्मित एक जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।

आज जब हम छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव के भव्य समापन के साक्षी बने हैं, तब मन गर्व, आत्मीयता और कृतज्ञता से भर उठता है। यह उत्सव केवल रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और समारोहों का आयोजन नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा, अस्मिता, स्वाभिमान और विकास यात्रा का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया। नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और यही शक्ति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की प्रेरणा भी है।

अटल जी का ऐतिहासिक निर्णय, छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान का नया अध्याय

छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का स्मरण पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के उल्लेख के बिना अधूरा है। उनके नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह ऐतिहासिक निर्णय इस अंचल की वर्षों पुरानी आकांक्षाओं, सांस्कृतिक पहचान और विकास की अपेक्षाओं को साकार करने वाला था।

अटल जी ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान, यहां की जनभावनाओं और विकास की संभावनाओं को समझते हुए अलग राज्य के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। उनका यह निर्णय छत्तीसगढ़ की जनता के लिए एक ऐतिहासिक सौगात बना। आज राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण होने पर हम अटल जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ को अपनी नियति स्वयं गढ़ने और विकास की नई इबारत लिखने का अवसर प्रदान किया।

अटल जी ने जिस छत्तीसगढ़ की आधारशिला रखी थी, उसे समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में स्थापित करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। राज्योत्सव का प्रत्येक आयोजन हमें उनके इस ऐतिहासिक योगदान की याद दिलाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़ता छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो संकल्प देश के सामने रखा है, उसमें छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्राकृतिक संसाधनों, कृषि संपदा, वन संपदा, खनिज संपदा, सांस्कृतिक विविधता और परिश्रमी मानव संसाधन से समृद्ध हमारा प्रदेश विकास की व्यापक संभावनाओं से परिपूर्ण है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विरासत के संरक्षण और विकास को एक-दूसरे का पूरक मानते हुए आगे बढ़ने की सोच को नई दिशा मिली है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में भी अपनी लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ आधुनिक विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हमारा विश्वास है कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल भौतिक अधोसंरचना का विस्तार नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। हमारी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे, गांव समृद्ध हों, किसान खुशहाल हों, महिलाएं सशक्त बनें और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें, यही विकसित छत्तीसगढ़ की हमारी परिकल्पना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संस्कृति और विकास को नई दिशा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनकल्याणकारी विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में लोककला, लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों और पर्यटन स्थलों का संरक्षण एवं संवर्धन महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां की लोककलाओं, उत्सवों, धार्मिक आस्थाओं और विविध सांस्कृतिक परंपराओं से भी है। बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा हो, पंथी नृत्य की आध्यात्मिक चेतना हो, राउत नाचा का उल्लास हो, पंडवानी की अद्भुत कथावाचन शैली हो या सुआ और करमा गीतों की मधुरता, हमारी  संस्कृति का प्रत्येक स्वर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को अभिव्यक्त करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश की इस अमूल्य विरासत को संरक्षित करने, कलाकारों को प्रोत्साहित करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और परंपराओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिले।

राज्योत्सव 2026: तीन दिनों में साकार हुआ छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक वैभव

नवा रायपुर में 1 से 3 नवंबर तक आयोजित राज्योत्सव 2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, लोकजीवन और विकास की उपलब्धियों का भव्य संगम बना। तीन दिवसीय आयोजन में प्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और प्रतिभाओं को अपनी विशिष्ट पहचान के साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

राज्योत्सव के मंच पर लोककलाओं और शास्त्रीय कलाओं की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता का सुंदर परिचय दिया। पंडवानी, पंथी, सुआ, जनजातीय लोकनृत्यों, कथक और ओडिसी जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की व्यापकता और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोकपरंपराओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

शिल्पग्राम में स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों और पारंपरिक शिल्पकला ने उत्सव को विशेष पहचान दी। वहीं लोकप्रिय गायकों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह में संगीत के विविध रंग बिखेरे। यह आयोजन परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम का प्रतीक बना।

राज्योत्सव में विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों की झलक प्रस्तुत की। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से नागरिकों को प्रदेश में संचालित योजनाओं और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मिली।

इस आयोजन को प्रदेश की सांस्कृतिक गरिमा और जनभावनाओं के अनुरूप स्वरूप प्रदान करने के लिए विभिन्न विभागों, कलाकारों, आयोजन से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं ने समन्वित प्रयास किए।

हमारा प्रयास रहा कि राज्योत्सव केवल एक औपचारिक शासकीय आयोजन न होकर जनभागीदारी, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान का उत्सव बने। प्रदेश के स्थानीय कलाकारों, लोकनर्तकों, शिल्पकारों और सांस्कृतिक दलों को मंच प्रदान करना इस आयोजन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल रहा।

हम मानते हैं कि संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की दिशा भी है। जब लोककलाकारों को मंच मिलता है, पारंपरिक शिल्प को सम्मान मिलता है और नई पीढ़ी अपनी विरासत से परिचित होती है, तब संस्कृति का वास्तविक संरक्षण होता है। राज्योत्सव ने इस भावना को साकार करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

राज्योत्सव 2026 का समापन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के इस ऐतिहासिक उत्सव को विशेष महत्व प्रदान किया।

समापन समारोह के अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रदेश की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभा, परिश्रम, सृजनशीलता और सामाजिक योगदान के प्रति पूरे प्रदेश की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

राज्य अलंकरण समारोह हमारी उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें कला, साहित्य, संस्कृति, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मान प्रदान किया जाता है। ऐसे सम्मान नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा और क्षमता के माध्यम से समाज तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति में राज्योत्सव का समापन छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा और भविष्य की विकास आकांक्षाओं को एक सूत्र में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अवसर बना।

लोक-कलाकार हमारी सांस्कृतिक पहचान के सच्चे संवाहक

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी जीवंतता है। हमारी संस्कृति केवल पुस्तकों और संग्रहालयों में सुरक्षित विरासत नहीं, बल्कि गांवों की चौपालों, लोकगीतों, पर्वों, उत्सवों और जनजीवन में आज भी जीवित है।

हमारे लोक कलाकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस अमूल्य धरोहर को आगे बढ़ाते आए हैं। पंडवानी की कथावाचन परंपरा, पंथी का आध्यात्मिक संदेश, करमा की सामूहिकता, सुआ गीतों की मधुरता, राउत नाचा का उत्साह और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराएं हमारी सांस्कृतिक समृद्धि की पहचान हैं।

मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि लोककलाकारों का सम्मान और संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। कलाकार केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, मूल्यों और परंपराओं के संवाहक हैं। उन्हें अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है।

अटल जी की विरासत, मोदी जी का संकल्प और विकसित छत्तीसगढ़ का भविष्य

छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा हमें अतीत की उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ भविष्य के प्रति अपने दायित्वों का भी स्मरण कराती है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस राज्य के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए विकास के नए अवसर सृजित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न राज्योत्सव का यह आयोजन हमारे लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा का अवसर बना है।

हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे, लोककलाओं को नई पहचान मिले, कलाकारों को सम्मान मिले और पर्यटन के माध्यम से प्रदेश की समृद्धि के नए द्वार खुलें।

राज्योत्सव का समापन नहीं, नए संकल्पों की शुरुआत

इस सफल आयोजन में सहभागी बने सभी कलाकारों, शिल्पकारों, सांस्कृतिक दलों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा एवं व्यवस्था से जुड़े कर्मियों, मीडिया प्रतिनिधियों और प्रदेशवासियों के प्रति मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। विशेष रूप से संस्कृति विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित आयोजन से जुड़े सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।

छत्तीसगढ़ की माटी हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। हमारी लोक-संस्कृति हमें एकता का संदेश देती है और हमारी विकास यात्रा हमें निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प प्रदान करती है।

आइए, राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर हम सभी मिलकर संकल्प लें कि अटल जी के सपनों के छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप एक समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली राज्य बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित….

रायपुर: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों एवं संस्थाओं को प्रतिष्ठित राज्य अलंकरण पुरस्कारों से सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस समारोह में साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, कृषि, समाजसेवा, जनजातीय उत्थान, महिला सशक्तिकरण, सहकारिता, श्रम, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मान प्रदान किया गया।

राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों एवं संस्थाओं का विवरण

शहीद वीरनारायण सिंह स्मृति सम्मान आदिवासी सामाजिक चेतना तथा उनके उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के श्री डुमन लाल ध्रुव को प्रदान किया गया।

यति यतनलाल सम्मान अहिंसा एवं गोरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दुर्ग जिले के विश्व गीता धेनू गोविन्द पक्षी सेवा धाम, कुम्हारी को प्रदान किया गया।

गुण्डाधूर सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कोरबा जिले की सुश्री संजू देवी को प्रदान किया गया।

मिनीमाता सम्मान महिला उत्थान एवं जनजागृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोक आस्था सेवा संस्थान, गरियाबंद (सुश्री लता नेताम) को प्रदान किया गया।

गुरु घासीदास सामाजिक चेतना एवं अनुसूचित जाति उत्थान सम्मान सामाजिक चेतना एवं दलित उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सुखचंद भास्कर को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित

ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बस्तर जिले की प्राथमिक कुडुक मछुवा सहकारी समिति मर्यादित, चित्रकोट (श्री धनसिंह बघेल) को प्रदान किया गया।

हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषा नाटकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर को प्रदान किया गया।

महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन, विशेष रूप से तीरंदाजी के लिए बालोद जिले के श्री टोमन कुमार को प्रदान किया गया।

पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिलासपुर जिले के तेजस्विनी सेवा प्रतिष्ठान, नेहरू नगर को प्रदान किया गया।

पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायगढ़ जिले के डॉ. बिहारीलाल साहू को प्रदान किया गया।

चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. एम. श्रीराम मूर्ति को प्रदान किया गया।

दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले की श्रीमती रेखा जलक्षत्री को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित

डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री पुन्नीदास भट्ट को प्रदान किया गया।

महाराजा अग्रसेन सम्मान सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए रायगढ़ जिले के श्री बाबूलाल अग्रवाल को प्रदान किया गया।

चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री प्रमोद कुमार साहू को प्रदान किया गया।

चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री बरुण सखाजी एवं सुश्री रसिका पांडेय को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार अंग्रेजी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री शिशिर रॉय चौधरी को प्रदान किया गया।

धन्वन्तरि सम्मान आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा तथा शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के डॉ. दिनेश कुमार नाग को प्रदान किया गया।

श्रीमती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार मछली पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए बालोद जिले के श्री प्रदीप कुमार सोनी को प्रदान किया गया।

राजेश्री महंत वैष्णवदास जी महाराज संस्कृत भाषा पुरस्कार संस्कृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. बहुरन सिंह पटेल को प्रदान किया गया।

डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा पुरस्कार आदिवासियों की सेवा और आर्थिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नवा रायपुर (श्री सी. श्रीनिवास यंगम) को प्रदान किया गया।

स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार श्रम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलौदाबाजार जिले के अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, यूनिट कुकुरडीह, सीमेंट वर्क्स, सरकीपार को प्रदान किया गया।

पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए रायपुर जिले के श्री सुरेश कुमार ध्रुव, उप पुलिस अधीक्षक को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर अप्रवासी भारतीयों द्वारा सामाजिक कल्याण, साहित्य, मानव संसाधन, निकाय अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा जिले की श्रीमती दीपाली सरावगी को प्रदान किया गया।

किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय, पटकथा एवं निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री सैयद ताहिर अली (करन खान) को प्रदान किया गया।

लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दुर्ग जिले की श्रीमती साधना यादव को प्रदान किया गया।

देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आरंग, रायपुर जिले के श्री सी.एल. रात्रे को प्रदान किया गया।

खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री चंद्रभूषण वर्मा को प्रदान किया गया।

लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दुर्ग जिले के श्री दुर्गा प्रसाद पारकार को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित

किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री मोहन सुंदरानी को प्रदान किया गया।

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान विधि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मयूर विहार, दिल्ली के श्री कौस्तुभ शुक्ला एवं रायपुर जिले के श्री हेमन्त कुमार मिश्र को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

माता बहादुर कलारिन सम्मान महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष एवं नारी उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कांकेर जिले की श्रीमती बुलबुल बैदया को प्रदान किया गया।

पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री अनंत विजय को प्रदान किया गया।

डॉ. तीज़न बाई सम्मान पंडवानी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पाहंदा, दुर्ग जिले के श्री चेतन लाल देवांगन को प्रदान किया गया।

चेंदरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सत्येन्द्र कुमार उपाध्याय ‘सन्नी’ को प्रदान किया गया।

संत रविदास सम्मान सामाजिक समरसता तथा साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बालोद जिले के श्री जगदीश प्रसाद देशमुख को प्रदान किया गया।

राज्य अलंकरण समारोह छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर बना। इन पुरस्कारों के माध्यम से राज्य की लोककला, संस्कृति, साहित्य, सामाजिक समरसता, जनजातीय परंपराओं और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को प्रतिष्ठित पहचान मिली।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह ने प्रदेश की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही नई पीढ़ी को समाज और राज्य के विकास में रचनात्मक योगदान देने की प्रेरणा दी।

राज्यपाल रमेन डेका ने आसमान में देखा भारतीय वायु सेना का अद्भुत शौर्य, साहस और कौशल

, 2 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर नवा रायपुर का आसमान आज भारतीय वायु सेना के अदम्य शौर्य, साहस, अनुशासन और अद्भुत उड़ान कौशल का साक्षी बना। सेंध लेक में आयोजित भारतीय वायु सेना की विश्वप्रसिद्ध सारंग एयरोबेटिक डिस्प्ले टीम के भव्य एयर-शो में राज्यपाल श्री रमेन डेका शामिल हुए। इस अवसर पर आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम, गरुड़ कमांडोज और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम के जांबाजों ने अपने साहसिक करतबों, सटीक नियंत्रण और उत्कृष्ट समन्वय से उपस्थित जनसमूह को रोमांचित कर दिया। पांच हेलीकॉप्टरों की आकर्षक फॉर्मेशन, हैरतअंगेज हवाई करतबों, आसमान में तिरंगे की मनमोहक छटा और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना से सराबोर कर दिया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने भारतीय वायु सेना के जांबाजों के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रतिष्ठित सारंग टीम का यह आयोजन हम सभी के लिए गौरव और प्रसन्नता का विषय है। वायु वीरों ने जिस साहस, अनुशासन, आत्मविश्वास और सटीक समन्वय के साथ अपने कौशल का प्रदर्शन किया है, वह प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। यह आयोजन केवल रोमांचकारी हवाई करतबों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय वायु सेना की उत्कृष्ट क्षमता, कठिन प्रशिक्षण, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना का जीवंत परिचय है। उन्होंने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कामना की, कि हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास, प्रगति और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहे। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस की खुशियों के बीच भारतीय वायु सेना के जांबाजों का यह अद्भुत प्रदर्शन प्रदेशवासियों के उत्साह और गौरव को और अधिक बढ़ा रहा है।

*अनुशासन, आपसी विश्वास और टीम भावना का अनुपम उदाहरण है सारंग टीम*

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि सारंग का अर्थ मोर होता है। जिस प्रकार मोर हमारे देश की विशिष्ट पहचान और सुंदरता का प्रतीक है, उसी प्रकार सारंग टीम भारतीय वायु सेना की गरिमा, उत्कृष्ट कौशल और अनुशासन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हवाई प्रदर्शन के दौरान हेलीकॉप्टरों की विभिन्न फॉर्मेशन और साहसिक करतब भले ही देखने में सहज और सुंदर दिखाई देते हों, लेकिन इनके पीछे विस्तृत योजना, निरंतर अभ्यास, गहरी एकाग्रता और असाधारण समन्वय होता है। प्रत्येक पायलट को अपनी भूमिका के साथ-साथ अपने साथियों की गतिविधियों का भी पूरा ध्यान रखना पड़ता है। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक-दूसरे पर अटूट विश्वास और सटीक तालमेल ही ऐसी अद्भुत प्रस्तुतियों को संभव बनाता है। उन्होंने कहा कि सारंग टीम का प्रदर्शन हमें यह महत्वपूर्ण संदेश देता है कि अनुशासन, समर्पण, सामूहिक प्रयास और आपसी विश्वास से कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। यह प्रदर्शन युवाओं को उत्कृष्टता प्राप्त करने, अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने और सामूहिक प्रयासों से सफलता हासिल करने की प्रेरणा देता है।

*आकाशगंगा के जांबाजों ने आसमान से उतरकर दिखाया अद्भुत साहस और सटीक नियंत्रण*

एयर-शो का रोमांचकारी शुभारंभ भारतीय वायु सेना की प्रसिद्ध आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम ने किया। खुले आसमान से छलांग लगाते हुए टीम के जांबाजों ने अपने पैराशूट को कुशलतापूर्वक नियंत्रित कर अदम्य साहस, संतुलन और सटीकता का परिचय दिया। निर्धारित दिशा और गति के अनुरूप पैराशूट को नियंत्रित करते हुए स्काईडाइवर्स ने सेंध लेक के सामने निर्धारित स्थान पर सटीक लैंडिंग की। उनके इस साहसिक प्रदर्शन को देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे और सफल लैंडिंग के बाद पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस प्रस्तुति ने भारतीय वायु सेना के जवानों की शारीरिक दक्षता, मानसिक एकाग्रता और दृढ़ता और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत की।

*गरुड़ कमांडोज ने किया रेस्क्यू और कॉम्बैट ऑपरेशन का प्रभावशाली प्रदर्शन*

आकाशगंगा टीम के प्रदर्शन के बाद भारतीय वायु सेना के गरुड़ कमांडोज ने अपने अदम्य साहस और विशेष ऑपरेशन की दक्षता का परिचय दिया। कमांडोज ने एयर-शो से पहले आठ हजार फीट की ऊंचाई से पैराशूट लैंडिंग कर दर्शकों को रोमांचित किया। इसके पश्चात एमआई-17 हेलीकॉप्टर से स्लिदरिंग का प्रदर्शन किया गया। हवा में स्थिर हेलीकॉप्टर से रस्सियों के सहारे नीचे उतरते जवानों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्धारित स्थान तक पहुंचने की अपनी दक्षता प्रदर्शित की। सेंध लेक के सामने कमांडोज ने रेस्क्यू एवं कॉम्बैट ऑपरेशन का प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपनी परिचालन क्षमता, त्वरित कार्रवाई और कठिन परिस्थितियों में मिशन को सफलतापूर्वक पूरा करने के कौशल का परिचय दिया। इसके पश्चात जवानों ने मंच को सलामी दी। उनके अनुशासित और साहसिक प्रदर्शन पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साहवर्धन किया।

*सारंग के पांच हेलीकॉप्टरों की फॉर्मेशन और क्रॉसओवर करतब ने थाम दीं दर्शकों की सांसें*

एयर-शो का सबसे प्रमुख आकर्षण भारतीय वायु सेना की विश्वप्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम की शानदार प्रस्तुति रही। ग्रुप कैप्टन श्री अभिजीत कुमार के नेतृत्व में टीम के पांच हेलीकॉप्टरों ने नवा रायपुर के आसमान में एक के बाद एक आकर्षक फॉर्मेशन और रोमांचकारी हवाई करतब प्रस्तुत किए। पायलटों ने अत्यंत सटीक नियंत्रण, संतुलन और बेहतरीन समन्वय के साथ हेलीकॉप्टरों को उड़ाकर अपने अद्भुत कौशल का परिचय दिया।

आसमान में एक साथ उड़ते पांच हेलीकॉप्टरों की आकर्षक फॉर्मेशन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कभी हेलीकॉप्टर एक-दूसरे के बेहद करीब आते दिखाई दिए, तो कभी अलग-अलग दिशाओं में उड़ान भरते हुए पुनः निर्धारित फॉर्मेशन में एक साथ आ गए। प्रदर्शन के दौरान हेलीकॉप्टरों का बेहद नजदीक से एक-दूसरे को क्रॉस करने वाला रोमांचकारी ‘क्रॉसओवर’ करतब विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। तेज गति से एक-दूसरे के सामने से गुजरते हेलीकॉप्टरों को देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह गए। इस करतब में पायलटों के मन की एकाग्रता, उड़ान पर नियंत्रण और आपसी तालमेल का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला।

*सारंग के कॉकपिट से गूंजा ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’, दर्शकों का उत्साह हुआ दोगुना*

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सारंग टीम ने प्रदेश के प्रति अपने विशेष स्नेह और सम्मान का भी परिचय दिया। हवाई प्रदर्शन के दौरान ग्रुप कैप्टन श्री अभिजीत कुमार ने हेलीकॉप्टर के कॉकपिट से छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय उद्घोष ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’ के माध्यम से प्रदेशवासियों का आत्मीय अभिवादन किया। आसमान से गूंजे इस उद्घोष ने उपस्थित जनसमूह के उत्साह को दोगुना कर दिया। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय वायु सेना के जांबाजों द्वारा छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान और जनभावनाओं को सम्मान देने का यह क्षण दर्शकों के लिए विशेष रूप से यादगार बन गया।

*तिरंगे की मनमोहक फॉर्मेशन और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज से देशभक्ति के रंग में रंगा आसमान*

हवाई प्रदर्शन के अंतिम चरण में सारंग टीम ने ‘वंदे मातरम्’ गीत की गूंज के बीच तिरंगे की मनमोहक फॉर्मेशन प्रस्तुत की। आसमान में तिरंगे के रंगों की आकर्षक छटा, हेलीकॉप्टरों का अद्भुत तालमेल और देशभक्ति गीत की गूंज ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। शौर्य, साहस, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण इस प्रस्तुति के साथ एयर-शो का भव्य एवं यादगार समापन हुआ। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशवासियों को भारतीय वायु सेना की उत्कृष्टता और राष्ट्रसेवा के गौरवशाली स्वरूप को निकट से देखने का अवसर प्रदान किया।

*विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा चुकी है सारंग टीम*

उल्लेखनीय है कि भारतीय वायु सेना की सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम विश्व की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों वाली एयरोबेटिक प्रदर्शन टीम है। यह टीम अपने सुनियोजित हवाई करतबों, आकर्षक फॉर्मेशनों और अद्भुत उड़ान कौशल के माध्यम से भारतीय वायु सेना की सटीकता, अनुशासन, व्यावसायिकता तथा उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का परिचय देती है। सारंग टीम जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, मॉरिशस, रूस और मिस्र सहित दुनिया के अनेक देशों में अपने शानदार 1500 हवाई प्रदर्शनों से भारत की प्रतिष्ठा और गौरव को नई ऊंचाइयां प्रदान कर चुकी है।

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर नवा रायपुर में आयोजित यह भव्य एयर-शो प्रदेशवासियों के लिए विशेष गौरव और उत्साह का अवसर बना। आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम, गरुड़ कमांडोज और सारंग टीम की साहसिक प्रस्तुतियों ने राज्य स्थापना दिवस के उत्सव को और अधिक भव्य एवं यादगार बना दिया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित सांसदगण, विधायकगण, निगम-मंडल के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहे रोजगार के नए अवसर, रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह को हर महीने 50 हजार रुपये का मुनाफा

रायपुर, 02 नवम्बर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी दिशा में राज्य शासन द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य सौंपने की पहल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत बनाने का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उदाहरण रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं हैं, जो रेडी-टू-ईट पोषण आहार का निर्माण कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं। समूह को इस कार्य से प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

*महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन की प्राथमिकताओं में महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और बच्चों एवं माताओं के पोषण स्तर में सुधार शामिल है। महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट निर्माण से जोड़ने की पहल इन दोनों उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ा रही है। इससे एक ओर ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास ही रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने में सहायता मिल रही है।

वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में जिले में महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और स्व-सहायता समूहों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रेडी-टू-ईट निर्माण जैसी गतिविधियां महिलाओं को नियमित आय अर्जित करने के साथ उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और वितरण जैसे कार्यों का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और वे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

*अप्रैल 2026 से रेडी-टू-ईट निर्माण कर रही हैं सरस्वती समूह की महिलाएं*

रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद समूह की महिलाओं को आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए। अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण का कार्य मिला। इसके बाद समूह की सभी 10 महिलाएं इस गतिविधि से जुड़कर नियमित रूप से कार्य कर रही हैं। पहले महिलाओं के पास आय अर्जित करने के सीमित अवसर थे, लेकिन अब वे समूह के माध्यम से सामूहिक रूप से कार्य करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।

श्रीमती चौहान बताती हैं कि रेडी-टू-ईट निर्माण से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे अपनी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आय अर्जित कर रही हैं। इससे परिवार के दैनिक खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है। साथ ही समूह की महिलाओं को सामूहिक निर्णय लेने, कार्यों का प्रबंधन करने और आर्थिक गतिविधियों के संचालन का अनुभव भी प्राप्त हो रहा है।

*आधुनिक मशीनों से तैयार किया जा रहा पूरक पोषण आहार*

सरस्वती स्व-सहायता समूह की महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार तैयार करती हैं। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन एवं अन्य आवश्यक सामग्रियों की मशीनों के माध्यम से सफाई की जाती है। इसके बाद सामग्री की भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी की जाती है। तैयार सामग्री को निर्धारित अनुपात में मिक्सिंग मशीन के माध्यम से मिलाया जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है।

समूह द्वारा तैयार पोषण आहार का वितरण आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में समूह की महिलाएं उत्पादन से लेकर पैकिंग और वितरण तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इससे उन्हें खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अनुभव प्राप्त हो रहा है और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

*हर महीने 50 हजार रुपये तक का मुनाफा, परिवारों को मिल रहा आर्थिक संबल*

समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान के अनुसार रेडी-टू-ईट पोषण आहार के निर्माण एवं वितरण से सरस्वती स्व-सहायता समूह को प्रतिमाह लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा प्राप्त हो रहा है। यह आय समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक बन रही है। नियमित आजीविका गतिविधि मिलने से महिलाओं में आर्थिक सुरक्षा की भावना बढ़ी है और वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय योगदान दे रही हैं।

समूह की सफलता यह दर्शाती है कि महिलाओं को उचित अवसर, संस्थागत सहयोग और आजीविका के साधन उपलब्ध होने पर वे सामूहिक उद्यम के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं। बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों को संगठित कर उन्हें उत्पादन आधारित गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाओं को विस्तार दे रही है।

*जिले के 2,709 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 महिला समूहों का चयन*

रायगढ़ जिले में वर्तमान में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण हेतु 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों में पूरक पोषण आहार की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

चयनित महिला स्व-सहायता समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। इससे समूहों को खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों के संचालन और आवश्यक संसाधन विकसित करने में आर्थिक सहायता मिल रही है। शासन की यह पहल महिलाओं को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उद्यमशीलता और आर्थिक प्रबंधन से जोड़ने का भी माध्यम बन रही है।

*महिला सशक्तिकरण के साथ पोषण सुरक्षा की दिशा में दोहरा लाभ*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महिला सशक्तिकरण की पहल और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रायगढ़ जिले में आजीविका संवर्धन के प्रयास ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण से जुड़ी महिलाएं अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयासों से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं तक पूरक पोषण आहार पहुंचाने में भी योगदान दे रही हैं।

डूमरमुड़ा का सरस्वती स्व-सहायता समूह इस बात का उदाहरण है कि शासकीय योजनाओं और आजीविका के अवसरों का लाभ मिलने से ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल एवं परिश्रम के बल पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बना सकती हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण की यह पहल महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण स्वरोजगार और पोषण सुरक्षा के उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

राज्योत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, कला और भक्ति संगीत के रंगों से सराबोर हुए दर्शक,राज्यपाल रमेन डेका ने किया कलाकारों का सम्मान

रायपुर, 02 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के दूसरे दिन नवा रायपुर स्थित राज्योत्सव मैदान में कला, संस्कृति, आस्था और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य मंच पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत से परिचित कराया। वहीं छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, शास्त्रीय नृत्य और आधुनिक संगीत की प्रस्तुतियों ने राज्योत्सव की शाम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल श्री रमेन डेका ने दूसरे दिन प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को सम्मानित कर बधाई दी।

मुख्य मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत विशेष नाट्य प्रस्तुति ‘मैं अयोध्या हूं’ से हुई। एक घंटे की इस नाट्य प्रस्तुति में अयोध्या की ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को प्रभावशाली अभिनय एवं कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। नाट्य मंचन में भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपराओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय से भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवंत किया और राम मंदिर निर्माण के इतिहास, आस्था और संस्कृति के इस अनूठे संगम ने दर्शकों को देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया।

*स्वास्ति मेहुल की सुरीली आवाज से सजी सांस्कृतिक संध्या*

राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या में राम आयेंगे फेम प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुश्री स्वास्ति मेहुल ने अपनी सुरीली आवाज और भक्ति प्रस्तुति से राज्योत्सव की शाम को भक्ति के रस में सराबोर कर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति से आम जन को भक्ति मय माहौल बना दिया। ‘राम आएंगे…….’ में जहां लोग झूमते नजर आए और ‘कान्हा आन बसो वृंदावन…’ ने लोगों को वृंदावन की कृष्ण भक्ति धारा में विभोर कर दिया।

*कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों से सभी को नचाया*

छत्तीसगढ़ी पार्श्व गायिका कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों से सभी का मन मोह लिया। मोला ले दे ना राजा सोन के नथनी….., मोर मन झूमे……और कर ले तै मया के चिन्हारी….. गानों को सुन कर श्रोता बरबस ही अपनी जगह पर ही झूमने लगे। कंचन जोशी ने छत्तीसगढ़ी गानों की मिठास से सभी को सम्मोहित कर लिया।

*शिल्पग्राम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति*

राज्योत्सव के मुख्य मंच के साथ ही शिल्पग्राम में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मनमोहक छटा बिखरी। यहां आयोजित 11 सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत, पंडवानी, सुआ नृत्य, ओडिसी, कथक, सूफी संगीत, गजल और लोकमंच जैसी विविध कलाओं का आकर्षक संगम देखने को मिला।

शिल्पग्राम के मंच पर श्रीमती प्रसन्ना अवस्थी ने लोकसंगीत एवं नृत्य तथा सुश्री सुष्मिता दास ने ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति दी। दुर्ग की सुश्री समप्रिया पूजा निषाद ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायन परंपरा को जीवंत किया। बिलासपुर के श्री अंकित निर्मलकर ने सूफी, गजल एवं सुगम गायन के माध्यम से संगीत के विविध रंग बिखेरे।

गरियाबंद की सुश्री मिलवंतीन बाई ने पारंपरिक सुआ नृत्य के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत की। रायपुर की सुश्री मेघा बोस ताम्रकार ने लोकसंगीत की प्रस्तुति दी। वहीं सुश्री आंचल पाण्डेय और श्रीमती विनीता त्रिपाठी ने कथक नृत्य के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा की सुंदर अभिव्यक्ति की। धमतरी की सुश्री रुखमनी दीवान और श्री तेजराम साहू ने लोकमंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोकजीवन, परंपराओं और सामाजिक संस्कृति को प्रस्तुत किया। श्री आदित्य मिश्रा बैंड की संगीतमय प्रस्तुति ने भी सांस्कृतिक आयोजन में विशेष रंग भरे।

*पंडवानी और सुआ नृत्य में दिखी छत्तीसगढ़ की लोकआस्था और परंपराओं की झलक*

शिल्पग्राम में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं की विशेष झलक देखने को मिली। पंडवानी गायन के माध्यम से महाभारत की कथाओं को विशिष्ट गायन और अभिनय शैली में प्रस्तुत किया गया। वहीं पारंपरिक सुआ नृत्य ने छत्तीसगढ़ के सामूहिक जीवन, लोकआस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया। ओडिसी और कथक नृत्य की प्रस्तुतियों ने भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया। सूफी संगीत, गजल और सुगम गायन ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संगीत के विविध रंग जोड़े।

*स्थानीय कलाकारों को मिला प्रतिभा प्रदर्शन का बड़ा मंच*

राज्योत्सव के दूसरे दिन आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला। राज्यस्तरीय मंच पर लोककलाओं की प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध परंपराओं को नई पहचान दी। राज्योत्सव के माध्यम से प्रदेश की लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिल रही है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से ओड़गी में सड़क-पुल निर्माण को मिली स्वीकृति

रायपुर, 2 नवंबर 2026/ सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत खालबहारा में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से खालबहारा मेन रोड से पंचायत भवन तक 1.50 किलोमीटर लंबे मार्ग का पुल-पुलियों सहित निर्माण स्वीकृत हुआ है। लोक निर्माण विभाग ने इस कार्य के लिए 1 करोड़ 65 लाख 85 हजार रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है।

इस मार्ग के निर्माण से ग्रामवासियों को पंचायत भवन तक पहुंचने में सुविधा होगी। पंचायत भवन ग्रामीणों के लिए स्थानीय स्तर पर विभिन्न कामों और बैठकों का प्रमुख केंद्र होता है। सड़क बनने से वहां तक आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के लोगों को दैनिक जरूरतों के लिए आने-जाने में सहूलियत मिलेगी। मार्ग में पुल-पुलियों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे सड़क संपर्क को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

राज्य शासन ने यह स्वीकृति वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल कार्य के अंतर्गत प्रदान की है। स्वीकृति आदेश के अनुसार निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पहले तकनीकी स्वीकृति और निविदा सहित निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। साथ ही, कार्य शासकीय भूमि पर और उपलब्ध बजट की सीमा के भीतर कराया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विस्तार स्थानीय आवागमन और सार्वजनिक सुविधाओं तक पहुंच को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है। खालबहारा में स्वीकृत यह निर्माण कार्य इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। निर्माण पूरा होने पर ग्रामवासियों को पंचायत भवन तक पहुंचने के लिए बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा।

राज्योत्सव पर इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली जंगल सफारी और अचानकमार में बफर सफारी शुरू,वन मंत्री केदार कश्यप ने किया शुभारंभ, वन्यजीव पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर…

 

रायपुर, 2 नवंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्थापना दिवस पर दो नई सफारी सेवाओं की शुरुआत की गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बीजापुर जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली जंगल सफारी और मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से बफर सफारी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आज इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सफारी का शुभारंभ एवं अचानकमार टाइगर रिजर्व के बफर सफारी अंतर्गत केवंची गेट का वर्चुअल माध्यम से बटन दबाकर उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव जी एवं विधायक श्री धर्मजीत सिंह जी वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। दोनों स्थानों पर पर्यटकों के लिए सफारी की बुकिंग शुरू हो गई है। इन सेवाओं से वन पर्यटन के विस्तार के साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

*इंद्रावती में पहली बार जंगल सफारी, स्थानीय ग्रामीण संभालेंगे संचालन*

लंबे समय तक नक्सलवाद और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित रहे बस्तर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पहली बार जंगल सफारी शुरू की गई है। सफारी का प्रवेश द्वार बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर उलूर गांव में बनाया गया है। पर्यटक बीजापुर से भोपालपटनम होते हुए उलूर पहुंच सकेंगे। यहां सफारी के लिए चार जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है। पर्यटकों को प्रशिक्षित गाइड के साथ चाय-नाश्ते की सुविधा भी मिलेगी।

सफारी संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय ग्रामीणों को सौंपी गई है। इसके लिए युवाओं को कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। सफारी से स्थानीय युवाओं को गाइड और वाहन चालक के रूप में रोजगार मिलेगा। वहीं होम-स्टे, पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीण परिवारों तथा स्थानीय कारीगरों के लिए आय के नए अवसर विकसित होंगे। इंद्रावती टाइगर रिजर्व बाघ, राजकीय पशु वन भैंसा और गिद्ध सहित विभिन्न वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। जंगल सफारी शुरू होने से पर्यटकों को क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा से परिचित होने का अवसर मिलेगा।

*अचानकमार में केंवची गेट से 50 किलोमीटर लंबी बफर सफारी शुरू*

मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व में केंवची गेट से पहली बार बफर सफारी शुरू की गई है। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही से अमरकंटक मार्ग पर राष्ट्रीय राजमार्ग-45 स्थित इस गेट के खुलने से पर्यटकों को सफारी का नया विकल्प मिलेगा। रिजर्व में शिवतराई गेट से पहले से सफारी संचालित है। केंवची गेट से सफारी शुरू होने से अमरकंटक-अचानकमार-रतनपुर पर्यटन सर्किट को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल 914.017 वर्ग किलोमीटर में फैले अचानकमार टाइगर रिजर्व में 626.195 वर्ग किलोमीटर कोर और 287.822 वर्ग किलोमीटर बफर क्षेत्र है। केंवची गेट से लगभग 50 किलोमीटर लंबे सफारी मार्ग में भैरोसांगफाटर, सेमर वॉच टॉवर, कचांदी, जलांगो तिराहा, दरियाबूट पेट्रोलिंग कैंप और आमाडोब बैरियर शामिल हैं। सफारी के लिए एक जिप्सी और तीन महारानी वाहन उपलब्ध रहेंगे। जिप्सी का किराया 3,500 रुपए तथा महारानी वाहन का किराया 5,000 रुपए प्रति राउंड निर्धारित है।

अचानकमार में पर्यटकों को बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, चीतल, सांभर और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को देखने का अवसर मिलेगा। सिहावल सागर, माझी डोंगरी वॉच टॉवर और जल्दा ग्रासलैंड भी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। पर्यटकों के ठहरने के लिए केंवची गेट के पास पर्यटन विभाग का सोनभद्र रिसोर्ट तथा निजी रिसोर्ट उपलब्ध हैं।

दोनों टाइगर रिजर्व में सफारी सेवाओं के विस्तार से पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय स्तर पर होटल, होम-स्टे, परिवहन, गाइड सेवा, खानपान और हस्तशिल्प से जुड़े रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे वन संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलेगा।