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राज्योत्सव में प्रतिभाओं को मिला सम्मान : राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ी हुए सम्मानित…..

रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित वीर शहीद धनंजय सिंह राजपूत स्टेडियम में भव्य जिला स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन हर्षाेल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर जिले का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया, इनमें देवकी यादव, नीतू साहू और बैडमिंटन खिलाड़ी हर्ष शर्मा शामिल है। इसके साथ ही सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, अभिव्यक्ति कौशल एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय भाषण एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न विकासखंडों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए किया गया है। भाषण प्रतियोगिता के प्राथमिक स्तर पर पथरिया विकासखंड की संजना साहू एवं देविका प्रजापति ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मुंगेली विकासखंड की तारिणी साहू द्वितीय स्थान पर रहीं। माही कुलमित्र ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पूर्व माध्यमिक स्तर पर पथरिया के श्री अभिजीत राजपूत ने प्रथम, मुंगेली के श्री दिव्यांश ठाकुर ने द्वितीय तथा लोरमी की कु. राधिका शर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्तर पर मुंगेली की कु. सुधा साहू एवं लोरमी की कु. सांझी शर्मा ने प्रथम स्थान हासिल किया। पथरिया की कु. सरस्वती साहू ने द्वितीय तथा लोरमी की कु. दीपा साकत ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

चित्रकला प्रतियोगिता के प्राथमिक स्तर पर लोरमी के श्री सुदर्शन केवर्त ने प्रथम, मुंगेली की लवली मानिकपुरी ने द्वितीय तथा पथरिया की भावना साहू ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पूर्व माध्यमिक स्तर पर मुंगेली की रीना साहू प्रथम, पथरिया की उर्वी गुप्ता द्वितीय तथा लोरमी की चिंकी जायसवाल एवं मुंगेली की कविता साहू ने तृतीय स्थान हासिल किया। हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्तर पर मुंगेली के श्री समीर मिरी ने प्रथम, पथरिया के श्री आदित्य भारद्वाज ने द्वितीय तथा मुंगेली की टिकेश्वरी नागवंशी एवं संजना कश्यप ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण 2026 के अंतर्गत शिक्षा दूत पुरस्कार के लिए जिले के 09 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें मुंगेली विकासखंड से श्रीमती हेमलता शर्मा, श्रीमती परवीन बेबी दिवाकर एवं श्रीमती गीता किरण सोनी, लोरमी से श्री गीता राम साहू, श्री लेख राम नेताम एवं श्री नोहर सिंह कोहली तथा पथरिया से श्री गुना राम निर्मलकर, श्री महेन्द्र कुमार देवांगन एवं श्री संतोष कुमार शामिल हैं। वहीं ज्ञानदीप पुरस्कार 2026 के लिए 03 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें मुंगेली से श्रीमती विमला कश्यप, पथरिया से श्रीमती विजयलक्ष्मी सोनवानी तथा लोरमी से श्री भूपेन्द्र सिंह राजपूत शामिल हैं। इन सभी चयनित विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने जिले का गौरव बढ़ाया है।

जैविक एवं प्राकृतिक खेती तथा संतुलित उर्वरक उपयोग पर किसानों को किया गया जागरूक…..

रायपुर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर द्वारा संचालित खेत बचाओ अभियान-रबी 2026 के अंतर्गत आज जिला बेमेतरा के साजा विकासखंड की ग्राम पंचायत पदमी में किसान जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में गांव के 25 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक डॉ. एल. एल. खरबिकर एवं डॉ. अजय वर्मा ने किसानों को आधुनिक, टिकाऊ एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित एवं उचित उपयोग तथा पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने पर विशेष जोर दिया।

तकनीकी व्याख्यानों के माध्यम से किसानों को बताया गया कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, कृषि लागत कम करने तथा फसल उत्पादन की गुणवत्ता एवं स्थिरता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है। इसके साथ ही किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद भी आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने खेती से संबंधित अपनी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को साझा किया तथा वैज्ञानिकों से उपयोगी सुझाव प्राप्त किए।
कार्यक्रम में ग्राम पंचायत पदमी की सरपंच श्रीमती हेमलता सिन्हा की उपस्थिति रही।

संस्थान द्वारा संचालित खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण तथा जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना है, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।

लक्ष्य निर्धारित कर प्लानिंग और तैयारी करें, सफलता मिलेगी – वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी…..

रायपुर: वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने शासकीय खेमराज लक्ष्मीचंद कला एवं वाणिज्य कॉलेज बागबाहरा के ओपन स्टेडियम का फीता काटकर लोकार्पण किया। यह स्टेडियम 134. 67 लाख रुपये की लागत से निर्मित है। इसके बाद वित्त मंत्री ने कॉलेज प्रांगण में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ववलित कर की गई। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री परेस बागबाहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोंगरा पटेल, भारत स्काउट गाइड के जिलाध्यक्ष श्री येतराम साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री भीखम सिंह ठाकुर,  Jherh vydk paækdj एवं स्थानीय जनप्रतिनधिगण, प्रभारी प्राचार्य शिव गोपाल रात्रे, प्रोफेसर एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम, राष्ट्रगान जन गण मन और राजकीय गीत अरपा पैरी के धार का सामूहिक गायन किया गया।

वित्त मंत्री श्री चौधरी ने इस अवसर पर छात्रा भारती साहू सहित अन्य युवाओं से संवाद कर राजधानी रायपुर में स्थित राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों आईआईएम, एम्स, ट्रिपल आईटी, एचएनएलयू, सिपेट, के बारे में प्रश्न पूछकर युवाओं से जवाब मांगा और सही जवाब देने पर प्रति जवाब में उत्तर देने वाले और प्रश्न करने वाले युवाओं को एक हजार रूपये का प्रोत्साहन राशि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के पुस्तकें खरीदने के लिए दिया गया। साथ ही जनप्रतिनिधि श्रीमती अलका चंद्राकर को जिम्मेदारी दी कि इन युवाओं को इन राष्ट्रीय संस्थानों का भ्रमण अवलोकन कराए। जिससे वे इन संस्थाओं के बारे में जानकर वे इन सस्थाओं से कैरियर बना सकेंगे।

लक्ष्य निर्धारित कर प्लानिंग और तैयारी करें, सफलता मिलेगी - वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी

वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चैधरी ने युवाओं को कैरियर मार्गदर्शन और प्रेरणा देते हुए कहा कि, आप सब काॅलेज के इस पढ़ाई के स्वर्णिम और महत्वपूर्ण मोड पर हैं, जहां भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। आप जो कुछ बनने की सोचेंगे, उसके लिए प्लानिंग करें। अभी 5 से 7 साल में अच्छा तैयारी कर लें, जो चाहोगे कर सकते हैं । सही समय पर सही काम करें। साथ ही जिंदगी में जो भी फैसले लो, उसके सभी पहलुओं और परिणाम के लिए तैयार रहें। जब तक लक्ष्य तय नहीं करेंगे तो आगे बढ़ नहीं पाएंगे। लक्ष्य केंद्रित कर सभी सफलता पा सकते हैं। इसके साथ ही अपने पसंदीदा रोजगार मूलक कोर्स (नर्सिंग, तकनीकी और आर्ट) में भी अपना कैरियर बना सकते हैं।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी…..

रायपुर: बस्तर के जंगलों से निकलकर गुजरात के एकता नगर तक पहुंची यह यात्रा केवल 50 ग्रामीणों का सफर नहीं थी, बल्कि बदलते सुकमा की एक ऐसी तस्वीर थी, जिसमें पहली बार ट्रेन में बैठने का उत्साह भी था और देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों में से एक का हिस्सा बनने का गौरव भी। कभी नक्सल चुनौती के कारण चर्चा में रहने वाले सुकमा के ग्रामीणों ने गुजरात के केवड़िया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह और भव्य परेड को अपनी आंखों से देखा। जब परेड में छत्तीसगढ़ पुलिस के DRG और STF के जवानों ने कदमताल की, तो सुकमा से पहुंचे ग्रामीणों ने तालियों की गूंज के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

सुकमा जिले के अलग-अलग गांवों से आए 50 नागरिकों के इस दल के लिए गुजरात की यात्रा कई मायनों में खास रही। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ग्रामीणों की थी, जिन्होंने अपने जीवन में पहली बार ट्रेन से सफर किया। गांवों की परिचित सीमाओं से बाहर निकलकर लंबी रेल यात्रा करना, नए प्रदेश को देखना और राष्ट्रीय स्तर के भव्य समारोह में शामिल होना उनके लिए एक नया अनुभव था। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सानिध्य में आयोजित राष्ट्रीय एकता परेड ने इस यात्रा को यादगार बना दिया।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

जिन जवानों पर गर्व, उन्हें राष्ट्रीय मंच पर कदमताल करते देखा

एकता नगर में आयोजित समारोह के दौरान ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ पुलिस के उन जवानों को परेड में हिस्सा लेते देखा, जो बस्तर के चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सुरक्षा और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं। DRG और STF के जवानों की अनुशासित कदमताल ने ग्रामीणों को गौरवान्वित किया। अपने ही प्रदेश के जवानों को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिनिधित्व करते देख उन्होंने तालियां बजाकर उनका मनोबल बढ़ाया। यह उनके लिए केवल परेड देखना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के जवानों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का अनुभव भी था।

पुलिस की पहल से गांवों के लोगों को मिला देश देखने का अवसर

इस विशेष यात्रा का आयोजन पुलिस अधीक्षक सुकमा श्री मयंक गुर्जर (भापुसे) के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मनोज तिर्की के मार्गदर्शन में किया गया। उप पुलिस अधीक्षक श्री सपन चौधरी के नेतृत्व में 50 सदस्यीय दल गुजरात पहुंचा। यात्रा के दौरान ग्रामीणों को राष्ट्रीय एकता समारोह में भाग लेने के साथ स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने और गुजरात की संस्कृति तथा परिवेश से परिचित होने का अवसर मिला।

वापसी पर एसपी ने सुने अनुभव, पुष्पगुच्छ देकर किया स्वागत

गुजरात प्रवास के बाद सुकमा लौटे सभी 50 नागरिकों का पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर ने अपने कार्यालय में आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने प्रत्येक सदस्य को पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया और उनसे यात्रा के अनुभव सुने। ग्रामीणों ने बताया कि पहली बार ट्रेन में बैठने से लेकर प्रधानमंत्री की उपस्थिति में आयोजित राष्ट्रीय समारोह देखने तक, यह पूरी यात्रा उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृति बन गई है।

नक्सल प्रभावित सुकमा के 50 ग्रामीण पहली बार ट्रेन से पहुंचे गुजरात, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राष्ट्रीय एकता परेड के बने साक्षी

दल के सदस्यों ने इस अवसर के लिए सुकमा पुलिस और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके लिए यह यात्रा केवल गुजरात भ्रमण नहीं, बल्कि अपने गांव से निकलकर देश की विविधता, एकता और राष्ट्रीय गौरव को करीब से देखने का अवसर बन गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की 4 मोबाइल मेडिकल यूनिट का किया शुभारंभ…..

रायपुर: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर प्रवास के दौरान विश्राम गृह परिसर में भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की चार मोबाइल मेडिकल यूनिट का शुभारंभ किया। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों में रहने वाले नागरिकों को उनके नजदीकी हाट-बाजारों में निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के नागरिकों के लिए लाभकारी होगी, जहां स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश सरकार का संकल्प है कि बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विशेष रूप से जनजातीय बहुल और दूरस्थ अंचलों में रहने वाले नागरिकों को सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में किसी भी व्यक्ति को उपचार से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत और वनांचल क्षेत्रों वाले जिले में मोबाइल मेडिकल यूनिट स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनेंगी। हाट-बाजार ग्रामीण जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन स्थानों पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने से ग्रामीणों को अपने दैनिक कार्यों के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। इससे उपचार के लिए दूरस्थ स्वास्थ्य संस्थानों तक जाने में लगने वाले समय और खर्च में भी कमी आएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मानव सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में रेडक्रॉस सोसायटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। चार मोबाइल मेडिकल यूनिट की शुरुआत से जशपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और विशेष रूप से जरूरतमंद एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला हैं। राज्य सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने के साथ ही ऐसी जनहितकारी पहलों को प्रोत्साहित कर रही है, जिनसे स्वास्थ्य सेवाएं सीधे नागरिकों तक पहुंच सकें।

इस अवसर पर रायगढ़ सांसद श्री राधेश्याम राठिया, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनि भगत, पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, श्री सुनील गुप्ता, श्री भरत सिंह, श्री अमर सुल्तानिया, श्री कृष्णा राय, सरगुजा संभागायुक्त श्री नरेंद्र दुग्गा, सरगुजा पुलिस महानिरीक्षक श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी उपस्थित थे।

राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग की प्रदर्शनी में किसानों को मिल रही खेती से जुड़ी जानकारियां, एक ही जगह पर 20 से अधिक धान की किस्में, दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन….

रायपुर: नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव परिसर में कृषि विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर किसानों को आधुनिक खेती, पारंपरिक बीजों के संरक्षण और फसल विविधीकरण की जानकारी दी जा रही है। धान का कटोरा कहे जाने वाले प्रदेश में कृषि विरासत को सहेजने के साथ उन्नत धान प्रजातियों, दलहन-तिलहन, मोटे अनाज और फल-उद्यानिकी को बढ़ावा देकर किसानों की आर्थिक समृद्धि के नए रास्ते खोले जा रहे हैं। शासन की किसान हितैषी योजनाएं उनके जीवन में खुशहाली ला रही हैं

स्टॉल पर राज्य के विभिन्न जिलों की माटी और जलवायु के अनुकूल पारंपरिक सुगंधित धान किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इनमें कोरिया का श्री कमल, सूरजपुर का श्याम जीरा, बलरामपुर का ठाकुर भोग, सरगुजा का विष्णु भोग, जशपुर का शीतल भोग, बिलासपुर का समुंद चीनी, कोरबा का जटा शंकर, रायगढ़ का जौ फूल, कबीरधाम का गंगा प्रसाद, मुंगेली का सुकला फूल, जांजगीर-चांपा का चिन्नौर, बेमेतरा की छत्री, बलौदाबाजार-भाटापारा का मुनि भोग, राजनांदगांव का कपूर सार, दुर्ग का कालिका मोद, रायपुर व बालोद का दुबराज, महासमुंद का कुबरी मोहर, धमतरी की तुलसी मंजरी, गरियाबंद की इलायची, कांकेर का बादशाह भोग, नारायणपुर का अमृत भोग, कोंडागांव का राजा भोग, बीजापुर का कदम फूल, दंतेवाड़ा का आत्मा शीतल, बस्तर का लोकती मच्छी और सुकमा का गंगा बारू शामिल हैं।

एक ही जगह पर 20 से अधिक धान की किस्में, दलहन-तिलहन और उद्यानिकी फसलों की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन

इसके अलावा औषधीय गुणों से भरपूर और उच्च गुणवत्ता वाली 20 से अधिक धान की प्रजातियां भी रखी गई हैं। इनमें विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919, मधुराज, महामाया, तरुण भोग, छत्तीसगढ़ देवभोग, बादशाह भोग सलेक्शन-1, छत्तीसगढ़ सुगंधित भोग, छत्तीसगढ़ भाव्या, छत्तीसगढ़ जिंक राईस-1 (सी.जी. जिंक राइस एमएस), गठूवान, महाराजी, विष्णु भोग, दुबराज सलेक्शन-1, रेड राइस, ब्लैक राईस, प्रोटीन युक्त प्रोटेजिन, इंदिरा एरोबिक-1, बस्तर धान-1, स्वर्णा सब-1, सांभा सब-1, आई.आर.-64, पीकेवी एचएमटी तथा एमटीयू-3626, एमटीयू-1318, एमटीयू-1075, एमटीयू-1239 और एमटीयू-1223 प्रमुख हैं। कृषि विशेषज्ञ किसानों को इन किस्मों की उत्पादकता, पोषण और बाजार मांग के बारे में विस्तार से समझा रहे हैं।

फसल विविधीकरण को गति देने के लिए स्टॉल पर राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना के बारे में भी बताया जा रहा है। इस योजना के तहत खरीफ मौसम में धान के बदले दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो-कुटकी, रागी एवं कपास की फसल लेने वाले किसानों को 15,000 रुपए प्रति एकड़ तथा पहले से इन वैकल्पिक फसलों की खेती कर रहे किसानों को 10,000 रुपए प्रति एकड़ की आदान सहायता राशि सीधे बैंक खाते में दी जा रही है। इससे प्रेरित होकर किसान दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं। इनके प्रमाणित बीज भी प्रदर्शनी में रखे गए हैं।

दलहन संवर्ग में चना एवं तिवड़ा की उन्नत किस्मों जैसे महातिवड़ा, प्रतीक (तिवड़ा/लाथाइरस), छत्तीसगढ़ लोचन चना, छत्तीसगढ़ चना (सी.जी. चना-2), आरवीजी-210, जेजी-24, जीएनजी-2171 और इंदिरा चना-1 की विशेषताओं से किसानों को अवगत कराया जा रहा है। इसी तरह मूंग व उड़द की प्रज्ञा, पैरिमूँग, एमएच-421, टी-9 और इंदिरा उड़द (इंदिरा प्रथम-1), अरहर की सी.जी. अरहर-1 व बीडीएन-711, मसूर की सी.जी. मसूर-1 व आरवीएल-31, मटर की इंदिरा मटर-1, काशी नंदिनी, आर्किल व पीएफडी-11-05 तथा कुल्थी की इंदिरा कुलथी-1 व सी.जी. कुलथी-3 (बिलासा) किस्मों के बीज और खेती की तकनीक बताई जा रही है। रबी की सफल खेती के लिए गेहूं की दो उन्नत किस्में अवंति और कनिष्का भी सुझाई जा रही हैं।

तिलहन फसलों में अलसी की 12 किस्में रखी गई हैं, जिनमें अधिक भूरा, कम भूरा, आर-2607, आर-2717, वाईएल.एस-23, आर-552, आर-17, किरण, आर-2695, आरएलसी-187, कार्तिका व इंदिरा अलसी (आरएलसी-92) शामिल हैं। सरसों की तीन प्रमुख किस्मों आजाद महक, सुरेखा और आरएच-1975 के साथ सी.जी. सरसों व पीपीएस-1 को भी स्थान दिया गया है। इसी तरह कुसुम (सैफ्लावर) की तीन किस्में आईजीकेवी कुसुम, छत्तीसगढ़ कुसुम-1 और छत्तीसगढ़ कुसुम-2, सूरजमुखी की उन्नत संकर प्रजातियां सीओएच-4, सन एच-1 और सीओएच-3, सोयाबीन की सी.जी. सोया-1 व जेएस-20-98, रामतिल की जीए-10 व बीएन-03 तथा तिल की जीटी-10 और टीकेजी-55 किस्में उपलब्ध हैं। लघु धान्य सी.जी. कोदो-2 की तकनीक से भी किसानों को परिचित कराया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : राज्य स्थापना के 26 वर्ष : नए छत्तीसगढ़ की सशक्त होती तस्वीर, दशा और दिशा….

रायपुर:  1 नवंबर 2000 को अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ राज्य ने अपनी स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इन 26 वर्षों की विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्राकृतिक संसाधनों, समृद्ध वन संपदा, सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध इस प्रदेश ने विकास के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। राज्य गठन के बाद से शासन और प्रशासन के निरंतर प्रयासों ने प्रदेश को आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, सड़क, रेल संपर्क और जनकल्याण के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आधारभूत संरचना से विकास को मिली नई गति

छत्तीसगढ़ में पिछले 26 वर्षों के दौरान सड़क, बिजली, पेयजल, संचार और परिवहन सहित विभिन्न सुविधाओं का व्यापक विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों के विकास से दूरस्थ अंचलों को जिला मुख्यालयों और प्रमुख शहरों से जोड़ने में मदद मिली है। रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक गलियारा और रायपुर-धनबाद आर्थिक गलियारे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति देने वाली हैं।

रेल संपर्क के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग जैसे प्रमुख रेल केंद्रों के साथ अब बस्तर और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास तेज हुए हैं। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन के विस्तार तथा ताड़ोकी-रावघाट और अभनपुर-कुरूद रेलखंडों का शुभारंभ इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। रावघाट तक पहली बार रेल पहुंचना बस्तर के लिए ऐतिहासिक कदम है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन के साथ व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच के नए अवसर मिलेंगे।

जनजातीय विकास और जनकल्याणकारी अभियानों से बदलती तस्वीर

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। इसलिए प्रदेश के समग्र विकास में जनजातीय समुदायों का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। शासन द्वारा इस दिशा में विभिन्न योजनाओं और विशेष अभियानों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल, सड़क और आजीविका के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है।

नियद नेल्लानार योजना

बस्तर के माओवादी प्रभावित और दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश की विष्णु देव साय सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा शासन की व्यक्तिगत हितग्राही योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाना है।

पी एम जनमन योजना

विशेष रूप से पिछड़ी जनजातीय समूहों (PVTGs) के परिवारों के जीवन स्तर में सुधार के लिए संचालित इस अभियान के तहत पक्के आवास, पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों के लिए यह योजना विकास के नए अवसर लेकर आई है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

जनजातीय बहुल गांवों में आधारभूत और सामाजिक सुविधाओं की कमी दूर करने के उद्देश्य से शुरू इस अभियान के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के समन्वय से योजनाओं का लाभ गांवों तक पहुंचाने का प्रयास है। इनके साथ वन अधिकारों का संरक्षण, लघु वनोपज के संग्रहण एवं मूल्य संवर्धन, कौशल प्रशिक्षण, महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने जैसे प्रयास जनजातीय परिवारों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहे हैं।

कृषि, सिंचाई, खाद्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण,  स्वास्थ्य, शिक्षा और औद्योगिक निवेश के क्षेत्रों में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। नई औद्योगिक नीति 2024-30 के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहन, रोजगार के अवसरों का सृजन और स्थानीय युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में पहल की जा रही है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को अधिक व्यापक और रोजगारोन्मुख बनाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

संकल्प विकसित छत्तीसगढ़ का

केंद्र के विकसित भारत अभियान की तर्ज़ पर प्रदेश सरकार विकसित छत्तीसगढ़ राज्य बनाने के संकल्प के साथ सतत विकास के नए सोपान गढ़ रहा है। जनकल्याण का यह सफर छत्तीसगढ़ के लिए उपलब्धियों का पड़ाव होने के साथ विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनने के नए संकल्प का अवसर भी है। प्राकृतिक संसाधनों का सदुपयोग, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, आधुनिक आधारभूत संरचना और लोककल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण, सहकारिता के दम पर बस्तर ने रचा इतिहास, ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार 2026 से सम्मानित….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के 26 वें राज्य स्थापना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर बस्तर जिले ने सहकारिता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सहकारिता के मूल सिद्धांतों को निष्ठापूर्वक अपनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को नई दिशा देने वाली लोहण्डीगुड़ा विकासखंड की प्राथमिक कुडूक मछुआ सहकारी समिति मर्यादित चित्रकोट को राज्य शासन द्वारा प्रतिष्ठित ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण 2026 से विभूषित किया गया। राज्योत्सव के अवसर पर मुख्य अतिथि देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह के करकमलों से यह गरिमामय सम्मान श्री धनसिंह बघेल ने ग्रहण किया।

विगत करीब 17 वर्ष पहले 23 मार्च 2009 को पंजीकृत यह समिति आज बस्तर के 62 मछुआ परिवारों के लिए एक मजबूत जीवनरेखा बन चुकी है। विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर पर्यटन और मत्स्याखेट को अपनी मुख्य गतिविधि बनाते हुए समिति ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। शासन या बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय समिति ने अपनी स्वयं की अर्जित आय से न केवल 7 कार्यशील नौकाओं की खरीद की, बल्कि अपने कार्यालय भवन का निर्माण भी सफलतापूर्वक पूरा कराया।

चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण

पर्यटन सेवा के क्षेत्र में समिति ने सुरक्षा और किफायती दर का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया है। चित्रकोट जलप्रपात में पर्यटकों को मात्र 50 रुपए प्रति व्यक्ति की दर से सुरक्षित नौका विहार कराया जा रहा है, जिसकी बदौलत पर्यटकों का विश्वास तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में जहां 30,775 सैलानियों ने नौका विहार का आनंद लिया था, वहीं पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा दोगुने से अधिक बढ़कर वर्ष 2025-26 में 70 हजार से ज्यादा तक पहुंच गया, जिससे समिति को 35 लाख रुपए से अधिक का उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ।

पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और सदस्यों की कड़ी मेहनत के दम पर समिति ने वर्ष 2025-26 के दौरान साढ़े पांच लाख रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जिसमें से सदस्यों को ढाई प्रतिशत की दर से लाभांश भी वितरित किया गया। बीते 31 मार्च 2026 की वित्तीय स्थिति के अनुसार समिति का संचित लाभ 37 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। ग्रामीण सहकारिता, आजीविका संवर्धन और पर्यटन प्रबंधन का यह बेजोड़ संगम आज पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है।

 

अटल जी के सपनों से विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प तक, संस्कृति, स्वाभिमान और विकास की गौरवशाली यात्रा: मंत्री राजेश अग्रवाल…..

रायपुर: छत्तीसगढ़ की माटी में इतिहास की गहराई है, संस्कृति की मिठास है, परंपराओं की सुगंध है और भविष्य की असीम संभावनाएं हैं। यहां के लोकगीतों में जीवन का संगीत है, लोकनृत्यों में उत्साह की उमंग है और जनजातीय परंपराओं में   प्रकृति के साथ सहअस्तित्व का अद्भुत दर्शन समाहित है। यह वह धरती है, जहां श्रम को सम्मान, प्रकृति को आराधना और संस्कृति को जीवन का आधार माना जाता है। छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट भाषा, लोकजीवन, परंपराओं और गौरवशाली विरासत से निर्मित एक जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।

आज जब हम छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव के भव्य समापन के साक्षी बने हैं, तब मन गर्व, आत्मीयता और कृतज्ञता से भर उठता है। यह उत्सव केवल रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और समारोहों का आयोजन नहीं था, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा, अस्मिता, स्वाभिमान और विकास यात्रा का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया। नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और यही शक्ति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की प्रेरणा भी है।

अटल जी का ऐतिहासिक निर्णय, छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान का नया अध्याय

छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा का स्मरण पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के उल्लेख के बिना अधूरा है। उनके नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। यह ऐतिहासिक निर्णय इस अंचल की वर्षों पुरानी आकांक्षाओं, सांस्कृतिक पहचान और विकास की अपेक्षाओं को साकार करने वाला था।

अटल जी ने छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान, यहां की जनभावनाओं और विकास की संभावनाओं को समझते हुए अलग राज्य के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। उनका यह निर्णय छत्तीसगढ़ की जनता के लिए एक ऐतिहासिक सौगात बना। आज राज्य स्थापना के 26 वर्ष पूर्ण होने पर हम अटल जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ को अपनी नियति स्वयं गढ़ने और विकास की नई इबारत लिखने का अवसर प्रदान किया।

अटल जी ने जिस छत्तीसगढ़ की आधारशिला रखी थी, उसे समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में स्थापित करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। राज्योत्सव का प्रत्येक आयोजन हमें उनके इस ऐतिहासिक योगदान की याद दिलाता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प से जुड़ता छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का जो संकल्प देश के सामने रखा है, उसमें छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्राकृतिक संसाधनों, कृषि संपदा, वन संपदा, खनिज संपदा, सांस्कृतिक विविधता और परिश्रमी मानव संसाधन से समृद्ध हमारा प्रदेश विकास की व्यापक संभावनाओं से परिपूर्ण है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में विरासत के संरक्षण और विकास को एक-दूसरे का पूरक मानते हुए आगे बढ़ने की सोच को नई दिशा मिली है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ में भी अपनी लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ आधुनिक विकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हमारा विश्वास है कि विकास का वास्तविक अर्थ केवल भौतिक अधोसंरचना का विस्तार नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है। हमारी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहे, गांव समृद्ध हों, किसान खुशहाल हों, महिलाएं सशक्त बनें और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें, यही विकसित छत्तीसगढ़ की हमारी परिकल्पना है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संस्कृति और विकास को नई दिशा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनकल्याणकारी विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में लोककला, लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराओं, पुरातात्विक धरोहरों और पर्यटन स्थलों का संरक्षण एवं संवर्धन महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

छत्तीसगढ़ की पहचान केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से नहीं, बल्कि यहां की लोककलाओं, उत्सवों, धार्मिक आस्थाओं और विविध सांस्कृतिक परंपराओं से भी है। बस्तर दशहरा की अनूठी परंपरा हो, पंथी नृत्य की आध्यात्मिक चेतना हो, राउत नाचा का उल्लास हो, पंडवानी की अद्भुत कथावाचन शैली हो या सुआ और करमा गीतों की मधुरता, हमारी  संस्कृति का प्रत्येक स्वर छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को अभिव्यक्त करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में संस्कृति विभाग द्वारा प्रदेश की इस अमूल्य विरासत को संरक्षित करने, कलाकारों को प्रोत्साहित करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और परंपराओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिले।

राज्योत्सव 2026: तीन दिनों में साकार हुआ छत्तीसगढ़ का सांस्कृतिक वैभव

नवा रायपुर में 1 से 3 नवंबर तक आयोजित राज्योत्सव 2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, लोकजीवन और विकास की उपलब्धियों का भव्य संगम बना। तीन दिवसीय आयोजन में प्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और प्रतिभाओं को अपनी विशिष्ट पहचान के साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

राज्योत्सव के मंच पर लोककलाओं और शास्त्रीय कलाओं की प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक विविधता का सुंदर परिचय दिया। पंडवानी, पंथी, सुआ, जनजातीय लोकनृत्यों, कथक और ओडिसी जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की व्यापकता और छत्तीसगढ़ की विशिष्ट लोकपरंपराओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

शिल्पग्राम में स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों और पारंपरिक शिल्पकला ने उत्सव को विशेष पहचान दी। वहीं लोकप्रिय गायकों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने समारोह में संगीत के विविध रंग बिखेरे। यह आयोजन परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम का प्रतीक बना।

राज्योत्सव में विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों ने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों की झलक प्रस्तुत की। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से नागरिकों को प्रदेश में संचालित योजनाओं और विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी मिली।

इस आयोजन को प्रदेश की सांस्कृतिक गरिमा और जनभावनाओं के अनुरूप स्वरूप प्रदान करने के लिए विभिन्न विभागों, कलाकारों, आयोजन से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं ने समन्वित प्रयास किए।

हमारा प्रयास रहा कि राज्योत्सव केवल एक औपचारिक शासकीय आयोजन न होकर जनभागीदारी, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान का उत्सव बने। प्रदेश के स्थानीय कलाकारों, लोकनर्तकों, शिल्पकारों और सांस्कृतिक दलों को मंच प्रदान करना इस आयोजन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल रहा।

हम मानते हैं कि संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना और भविष्य की दिशा भी है। जब लोककलाकारों को मंच मिलता है, पारंपरिक शिल्प को सम्मान मिलता है और नई पीढ़ी अपनी विरासत से परिचित होती है, तब संस्कृति का वास्तविक संरक्षण होता है। राज्योत्सव ने इस भावना को साकार करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

राज्योत्सव 2026 का समापन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के इस ऐतिहासिक उत्सव को विशेष महत्व प्रदान किया।

समापन समारोह के अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रदेश की प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का अभिनंदन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभा, परिश्रम, सृजनशीलता और सामाजिक योगदान के प्रति पूरे प्रदेश की कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

राज्य अलंकरण समारोह हमारी उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें कला, साहित्य, संस्कृति, समाजसेवा और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मान प्रदान किया जाता है। ऐसे सम्मान नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा और क्षमता के माध्यम से समाज तथा प्रदेश के विकास में योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की उपस्थिति में राज्योत्सव का समापन छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा और भविष्य की विकास आकांक्षाओं को एक सूत्र में जोड़ने वाला महत्वपूर्ण अवसर बना।

लोक-कलाकार हमारी सांस्कृतिक पहचान के सच्चे संवाहक

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी जीवंतता है। हमारी संस्कृति केवल पुस्तकों और संग्रहालयों में सुरक्षित विरासत नहीं, बल्कि गांवों की चौपालों, लोकगीतों, पर्वों, उत्सवों और जनजीवन में आज भी जीवित है।

हमारे लोक कलाकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस अमूल्य धरोहर को आगे बढ़ाते आए हैं। पंडवानी की कथावाचन परंपरा, पंथी का आध्यात्मिक संदेश, करमा की सामूहिकता, सुआ गीतों की मधुरता, राउत नाचा का उत्साह और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराएं हमारी सांस्कृतिक समृद्धि की पहचान हैं।

मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि लोककलाकारों का सम्मान और संरक्षण हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। कलाकार केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं, बल्कि समाज की स्मृतियों, मूल्यों और परंपराओं के संवाहक हैं। उन्हें अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन प्रदान करना हमारी प्राथमिकता है।

अटल जी की विरासत, मोदी जी का संकल्प और विकसित छत्तीसगढ़ का भविष्य

छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की यात्रा हमें अतीत की उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ भविष्य के प्रति अपने दायित्वों का भी स्मरण कराती है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जिस राज्य के गठन का ऐतिहासिक निर्णय लिया, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए विकास के नए अवसर सृजित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न राज्योत्सव का यह आयोजन हमारे लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा का अवसर बना है।

हमारा संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहे, लोककलाओं को नई पहचान मिले, कलाकारों को सम्मान मिले और पर्यटन के माध्यम से प्रदेश की समृद्धि के नए द्वार खुलें।

राज्योत्सव का समापन नहीं, नए संकल्पों की शुरुआत

इस सफल आयोजन में सहभागी बने सभी कलाकारों, शिल्पकारों, सांस्कृतिक दलों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सुरक्षा एवं व्यवस्था से जुड़े कर्मियों, मीडिया प्रतिनिधियों और प्रदेशवासियों के प्रति मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। विशेष रूप से संस्कृति विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों सहित आयोजन से जुड़े सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।

छत्तीसगढ़ की माटी हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। हमारी लोक-संस्कृति हमें एकता का संदेश देती है और हमारी विकास यात्रा हमें निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प प्रदान करती है।

आइए, राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर हम सभी मिलकर संकल्प लें कि अटल जी के सपनों के छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप एक समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से गौरवशाली राज्य बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगे।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित….

रायपुर: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों एवं संस्थाओं को प्रतिष्ठित राज्य अलंकरण पुरस्कारों से सम्मानित किया। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस समारोह में साहित्य, कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल, कृषि, समाजसेवा, जनजातीय उत्थान, महिला सशक्तिकरण, सहकारिता, श्रम, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मान प्रदान किया गया।

राज्य अलंकरण से सम्मानित विभूतियों एवं संस्थाओं का विवरण

शहीद वीरनारायण सिंह स्मृति सम्मान आदिवासी सामाजिक चेतना तथा उनके उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के श्री डुमन लाल ध्रुव को प्रदान किया गया।

यति यतनलाल सम्मान अहिंसा एवं गोरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दुर्ग जिले के विश्व गीता धेनू गोविन्द पक्षी सेवा धाम, कुम्हारी को प्रदान किया गया।

गुण्डाधूर सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कोरबा जिले की सुश्री संजू देवी को प्रदान किया गया।

मिनीमाता सम्मान महिला उत्थान एवं जनजागृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए लोक आस्था सेवा संस्थान, गरियाबंद (सुश्री लता नेताम) को प्रदान किया गया।

गुरु घासीदास सामाजिक चेतना एवं अनुसूचित जाति उत्थान सम्मान सामाजिक चेतना एवं दलित उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सुखचंद भास्कर को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित

ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए बस्तर जिले की प्राथमिक कुडुक मछुवा सहकारी समिति मर्यादित, चित्रकोट (श्री धनसिंह बघेल) को प्रदान किया गया।

हबीब तनवीर सम्मान समकालीन रंगकर्म, छत्तीसगढ़ी, हिन्दी एवं अन्य भाषा नाटकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. पुरुषोत्तम चन्द्राकर को प्रदान किया गया।

महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन, विशेष रूप से तीरंदाजी के लिए बालोद जिले के श्री टोमन कुमार को प्रदान किया गया।

पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिलासपुर जिले के तेजस्विनी सेवा प्रतिष्ठान, नेहरू नगर को प्रदान किया गया।

पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायगढ़ जिले के डॉ. बिहारीलाल साहू को प्रदान किया गया।

चक्रधर सम्मान शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. एम. श्रीराम मूर्ति को प्रदान किया गया।

दाऊ मंदराजी सम्मान लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले की श्रीमती रेखा जलक्षत्री को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित

डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री पुन्नीदास भट्ट को प्रदान किया गया।

महाराजा अग्रसेन सम्मान सामाजिक समरसता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए रायगढ़ जिले के श्री बाबूलाल अग्रवाल को प्रदान किया गया।

चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री प्रमोद कुमार साहू को प्रदान किया गया।

चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार हिन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री बरुण सखाजी एवं सुश्री रसिका पांडेय को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार अंग्रेजी प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री शिशिर रॉय चौधरी को प्रदान किया गया।

धन्वन्तरि सम्मान आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा तथा शोध एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए धमतरी जिले के डॉ. दिनेश कुमार नाग को प्रदान किया गया।

श्रीमती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार मछली पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए बालोद जिले के श्री प्रदीप कुमार सोनी को प्रदान किया गया।

राजेश्री महंत वैष्णवदास जी महाराज संस्कृत भाषा पुरस्कार संस्कृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के डॉ. बहुरन सिंह पटेल को प्रदान किया गया।

डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा पुरस्कार आदिवासियों की सेवा और आर्थिक उत्थान के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल, नवा रायपुर (श्री सी. श्रीनिवास यंगम) को प्रदान किया गया।

स्व. रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार श्रम के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बलौदाबाजार जिले के अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड, यूनिट कुकुरडीह, सीमेंट वर्क्स, सरकीपार को प्रदान किया गया।

पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए रायपुर जिले के श्री सुरेश कुमार ध्रुव, उप पुलिस अधीक्षक को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान देश के बाहर अप्रवासी भारतीयों द्वारा सामाजिक कल्याण, साहित्य, मानव संसाधन, निकाय अथवा आर्थिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दंतेवाड़ा जिले की श्रीमती दीपाली सरावगी को प्रदान किया गया।

किशोर साहू सम्मान हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय, पटकथा एवं निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री सैयद ताहिर अली (करन खान) को प्रदान किया गया।

लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान छत्तीसगढ़ी लोकगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दुर्ग जिले की श्रीमती साधना यादव को प्रदान किया गया।

देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार पंथी नृत्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आरंग, रायपुर जिले के श्री सी.एल. रात्रे को प्रदान किया गया।

खुमान साव सम्मान छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री चंद्रभूषण वर्मा को प्रदान किया गया।

लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार आंचलिक साहित्य एवं लोक कविता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दुर्ग जिले के श्री दुर्गा प्रसाद पारकार को प्रदान किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 : केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 36 विभूतियों एवं संस्थाओं को राज्य अलंकरण से किया सम्मानित

किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी सिनेमा में निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए रायपुर जिले के श्री मोहन सुंदरानी को प्रदान किया गया।

बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान विधि के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मयूर विहार, दिल्ली के श्री कौस्तुभ शुक्ला एवं रायपुर जिले के श्री हेमन्त कुमार मिश्र को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।

माता बहादुर कलारिन सम्मान महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष एवं नारी उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कांकेर जिले की श्रीमती बुलबुल बैदया को प्रदान किया गया।

पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान रचनात्मक लेखन और हिन्दी भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री अनंत विजय को प्रदान किया गया।

डॉ. तीज़न बाई सम्मान पंडवानी कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पाहंदा, दुर्ग जिले के श्री चेतन लाल देवांगन को प्रदान किया गया।

चेंदरू राज्य ग्रामीण पर्यटन पुरस्कार ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कबीरधाम जिले के श्री सत्येन्द्र कुमार उपाध्याय ‘सन्नी’ को प्रदान किया गया।

संत रविदास सम्मान सामाजिक समरसता तथा साहित्य एवं काव्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बालोद जिले के श्री जगदीश प्रसाद देशमुख को प्रदान किया गया।

राज्य अलंकरण समारोह छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान का महत्वपूर्ण अवसर बना। इन पुरस्कारों के माध्यम से राज्य की लोककला, संस्कृति, साहित्य, सामाजिक समरसता, जनजातीय परंपराओं और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को प्रतिष्ठित पहचान मिली।

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के समापन अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह ने प्रदेश की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ ही नई पीढ़ी को समाज और राज्य के विकास में रचनात्मक योगदान देने की प्रेरणा दी।